पी. साईनाथ को मैग्सेसे पुरस्कार
मनीला।
ग्रामीण मुद्दों और देश पर औद्योगीकरण के प्रभाव पर व्यापक रूप से लिखने वाले
जाने-माने भारतीय पत्रकार पालागुमी साईनाथ को
2007 के रमन मैग्सेसे पुरस्कार के लिए चुना गया है। श्री
साईनाथ के अलावा छह अन्य लोगों को पुरस्कार दिया जाएगा। मैग्सेसे को एशिया में
नोबेल पुरस्कार के समतुल्य माना जाता है। श्री साईनाथ के प्रशस्ति पत्र में कहा
गया है कि लेखनी द्वारा ग्रामीण भारत को मुख्यधारा से जोडने और देश को गरीबी और
अकाल जैसे गंभीर मुद्दों के प्रति जागरूक करने के सम्मान में उन्हें मैग्सेसे
पुरस्कार के लिए चुना गया है। मैग्सेसे पुरस्कार के प्रत्येक विजेता को
प्रशस्ति पत्र के साथ 50000 अमरीकी डालर की नकद राशि दी
जाती है। पुरस्कार के अन्य विजेताओं में चीन के उत्तरी इलाके में वर्ष
2005 में जबरन गर्भपात और नसबंदी का मामला उजागर करने के बाद
चार वर्ष कैद की सजा काट रहे चीन के द्यष्टिहीन कार्यकर्ता चेन गुआंचेंग,
फिलीपीन्स के पूर्व सीनेट अध्यक्ष जोविटो सालोंगा,
दक्षिण कोरिया में द्यष्टिहीन विकलांगों के लिए एक चर्च की
स्थापना करने वाली नेत्रहीन ईसाई धर्मगुरुकिम सुन ताये,
नेपाल में स्थानीय स्कूलों के लिए कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के लिए
अंतरराष्ट्रीय अनुदान एकत्र करने वाले महाबीर पुन, चीन
में पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के लिए काम करने वाले तांग जियांग और
हांगकांग तथा चीन के एड्स पीडितों के कल्याण के लिए फाउंडेशन की स्थापना करने
वाले बैंक कर्मी चुग तो शामिल हैं। श्री साईनाथ ने महाराष्ट्र में यवतमाल से
टेलीफोन पर कहा कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुने जाने पर वह गौरवान्वित
महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान से ग्रामीण मुद्दों से संबधित
पत्रकारिता को बढावा मिलने के साथ ऐसे मुद्दों को मीडिया में और अधिक स्थान
मिलेगा और युवा पीढ़ी देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित होगी।
50 वर्षीय साईनाथ पूर्व राष्ट्रपति वी वी गिरी के पोते
हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से
इतिहास में स्नात्कोत्तर डिग्री लेने के बाद 1980 में
अपनी पत्रकारिता की शुरूआत संवाद समिति यूनाईटेड न्यूज आफ इंडिया से की थी। बाद
में वह साप्ताहिक अखबार ब्लिटज से जुड़ गये। इस समय वह अंग्रेजी समाचार पत्र
हिंदू में ग्रामीण मामलों के संपादक हैं। श्री साईनाथ वर्ष में 270
से 300 दिन ग्रामीण क्षेत्रों में
बिताते हैं। उन्हें 30 से
अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार मिले हैं।
lll