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Media Vimarsh |
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मीडिया विमर्श
जनसंचार के सरोकारों पर
केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका
(वर्ष 2, अंक -
5,
सित. - नवंबर, 2007) |
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मीडिया संसद की तरफ देखे
नई दिल्ली।
संसद की कार्यवाही का बहुत कम प्रचार-प्रसार होने पर चिंता जताते हुए लोकसभा
अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने मीडिया प्रबधकों को स्मरण कराया कि वह प्रेस संसद की
अनदेखी कर केवल सनसनीखेज खबरें देकर अपना अस्तित्व कायम नहीं रख सकता। लोकसभा
की नवगठित प्रेस सलाहकार समिति के साथ पिछले दिनों यहां पहली अनौपचारिक मुलाकात
में श्री चटर्जी ने कहा कि भारत में संसद सबसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है
जिसके मजबूत होने से प्रेस सहित अन्य संस्थाएं और विकसित होंगी। उन्होंने कहा
कि संसदीय जनसंपर्क विभाग द्वारा पिछले छह महीने की अवधि में हुए संसद सत्रों
की कार्यवाही के प्रचार-प्रसार का पता लगाने के लिए कराए गए अध्ययन से पता चला
है कि इस अवधि में राष्ट्रीय दैनिकों के दस पत्रकारों ने
31
खबरें दीं जबकि तीन गैर राष्ट्रीय अखबारों में यही संख्या 96
रही। इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि
वह प्रेस पर कोई चीज थोपना नहीं चाहते, पर यह अपेक्षा
करते हैं कि संसद की कार्यवाही का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। श्री चटर्जी
ने कहा कि आमतौर पर अपरान्हकाल में संवाद समितियों के पत्रकार ही सदन में आते
हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है कि संसद में दिए गए सर्वश्रोष्ठ
भाषणों को भी प्रेस में जगह नहीं मिलती। यह कहे जाने पर कि संसद में बहस का
स्तर काफी गिर गया है, उन्होंने कहा कि ऐसा केवल संसद
में ही नहीं न्यायपालिका और मीडिया में भी हुआ है।
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