Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 5, सित. - नवंबर, 2007)

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आवरण कथा

 

 

संतो के सेवाकार्य भी तो दिखाये मीडिया

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साध्वी ऋतम्भरा

 

 भारत के संत-समाज के विरूध्द अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत ही सोचा-समझा और नियोजित षडयंत्र रचा गया है। कभी कथित हत्या के आरोप तो कभी काले धन को सफेद करने के आरोप तो कभी योग से विश्व भर को निरोगी करने के एक योगी के प्रयासों को झूठा सिध्द करने एवं उनकी दवाओं में पशुओं की हड्डियां होने संबंधी आरोपों के कुत्सित समाचारों से चारों ओर सनसनी फैली हुई है। बहुत गहराई से विचार करने पर यही सत्य सामने आता है कि यह सब कुछ और नहीं। कोका कोला जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की बोतलों से निकला वह जिन्न है जिसका बाबा रामदेवजी महाराज जैसे संतों ने पर्दाफाश किया है। उसके बाद जिस प्रकार से कम -से-कम भारत में उस कोका कोला बनाम टायलेट क्लीनर की बिक्री को तगड़ा झटका लगा, उसके बाद यह तो तय ही था कि भारत के संत-समाज के विरूध्द कोई न-कोई साजिश तो रची ही जाएगी।

 

मैं पत्रकारिता जगत का पूर्ण सम्मान करती हूं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने के नाते उसकी अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका भी है। मगर मैं पत्रकार जगत को पूछना चाहती हूं कि जिस सजगता और सक्रियता से आप स्टिंग आपरेशन कर रहे हैं, काले और सफेद धन की पड़ताल कर रहे हैं, क्या उतनी ही सजगता के साथ आपके गुप्त कैमरों ने कभी उन दृश्यों को भी अपने स्टिंग ऑपरेशन में कैद किया है जिनमें भारत के संत इस देश के वनवासियों, गिरिवासियों एवं वंचितों के उत्थान के प्रयास करते दिखायी देते हैं? क्या आपके कैमरों की लाइटें कभी वहां भी चमकती हैं, जहां संतजन अपने सेवाकार्यों की रोशनी से गरीबों एवं विवशता के अंधेरों को मिटाने के भरसक प्रयास कर रहे हैं? मैं पूछना चाहती हूं टेलीविजन चैनलों से कि जिस तरह आप चौबीसों घंटे एक ऐसे स्टिंग आपरेंशन को बार-बार देश को दिखाते रहते हैं जिसकी सत्यता की जांच होनी बाकी हो, क्या कभी आपने चौबीसों घंटे संतों के किसी चिकित्सालय में चल रहे नि:शुल्क सेवाकार्यों का प्रसारण देशवासियों को दिखाया? क्या संतों के अथक परिश्रम से गढ़े गये वात्सल्य के उन मंदिरों पर आपने अपने कैमरों को केन्द्रित किया, जहां दिन-रात विशुध्द सेवाभाव से समाज के उपेक्षित एवं निराश्रित बचपन को सुसंस्कारित दिशा देने के प्रयास किये जा रहे हैं?

 

नहीं... ऐसा कभी-कभी ही किया करते हैं आप लोग। क्योंकि इसमें कोई सनसनी नहीं होती। कभी यदि यह दिखाया भी गया होगा तो कुछ मिनटों का वृत्तचित्र दिखाकर इतिश्री कर ली गयी होगी। मैं मीडिया पर दोषारोपण नहीं कर रही हूंं, कुछ कड़वी घटनाओं का स्मरण कर रही हूं कि कैसे सनसनी फैलने के लिए समाचारों का संकलन और दृश्यों का फिल्मांकन किया जाता है। मुझे आज भी वह भयानक और रोंगटे खड़े कर देनेवाला दृश्य स्मरण आता है जब दिल्ली में आरक्षण विरोधी एक छात्र के आत्मदाह करने का दृश्य मैंने टेलीविजन समाचारों में देखा था। स्वयं पर पेट्रोल डालकर धू-धूकर जलता वह छात्र और उसके पीछे दौड़-दौड़कर उस दृश्य को फिल्माते चैनलों के कैमरामैन। कल्पना कीजिये कैसा क्रूरतम दृश्य था कि चार-पांच लोग दौड़कर जलते हुए उस असहाय छात्र को शूट कर रहे हैं लेकिन किसी के भी मन में यह दया नहीं आयी कि अपने कैमरे रखकर कहीं से बाल्टी भर पानी उड़ेलकर उसकी आग बुझाने का प्रयास किया जाय। मैं पूछना चाहती हूं कि अगर वह छात्र उन छायाकारों में से किसी का बेटा या भाई होता तब भी क्या वह उसे जलता हुआ देखकर केवल तस्वीरें ही उतारते रहते? ऐसी भयावह एक्सक्लूसिव तस्वीरें दिखाकर आप देश को कहां ले जाना चाहते हैं?

 

आज विश्वगुरू बनने की ओर अग्रसर भारत के प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों, जिन्हें भारत का संत-समाज आज भी सहेजे हुए है, को नष्ट करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।  कभी अपने अत्याधुनिक कैमरों को सुदूर पूर्वोत्तर भारत के उन सुलगते प्रान्तों की ओर भी घुमाइए जहां अलगाववाद की आग भड़कायी जा रही है।

 

मैं निवेदन करना चाहती हूं भारत के पत्रकार जगत से कि आप लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत को भारत बनाए रखने के लिए कटिबध्द संत-समाज को जनमानस से काट देने के कैसे कुत्सित और अन्तर्राष्ट्रीय प्रयास किये जा रहे हैं। आप उन षडयंत्रों का पीछा कीजिये, जो कोका कोला के जहर को उजागर करनेवाले एक संत को रास्ते से हटाने के कथित मंसूबे पाले हुए हैं। सारे संत-समाज की छवि को नकारात्मक बनाया जाना अन्यायपूर्ण है और ऐसे प्रयासों को रोकने का उत्तरदायित्व भी मीडियाकर्मियों का ही है।

 

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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