Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 5, सित. - नवंबर, 2007)

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आवरण कथा

 

 

इंटरनेट पर भी बजता है रेडियो

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रविशंकर श्रीवास्तव

 

इंटरनेट रेडियो या ई-रेडियो एक ऐसी सेवा है जिसे कि पारंपरिक वायु-तरंगों के बजाए इंटरनेट कनेक्शन के जरिए ब्रॉडकास्ट किया जाता है, और चूंकि यह वायरलेस वायु तरंगों के जरिए ब्रॉडकास्ट नहीं होता, अपितु वेब पर विविध उपक्रमों के जरिए ब्रॉडकास्ट होता है इसीलिए इसे प्राय: वेबकास्टिंग भी कहा  जाता है। ई-रेडियो का अर्थ है-श्रोताओं को लगातार ऐसी ऑडियो सामग्री देना जिसमें श्रोताओं को उस ऑडियो सामग्री को नियंत्रित करने का कोई विकल्प नहीं होता है। यह ब्रॉडकास्टिंग या ऐसे ही दूसरे प्रकल्पों से पूरा अलग है जहां आप अपनी मर्जी के मुताबिक सामग्री चुनकर डाउनलोड कर सुनते हैं। इंटरनेट रेडियो आमतौर पर पारंपरिक रेडियो जैसा ही होता है-बस व इंटरनेट के जरिए ब्रॉडकास्ट होता है। बहुत से इंटरनेट रेडियो स्टेशन पारंपरिक रेडियो स्टेशनों से जुड़े हैं-यानि इन पारंपरिक  रेडियो स्टेशनों का प्रसारण इंटरनेट के जरिए भी होता है।

 

रेडियो को इंटरनेट के जरिए प्रसारण से लाभ यह है कि उनका प्रसारण धरती के किसी भी कोने पर जहां इंटरनेट है, मल्टीमीडिया कम्प्यूटरों के जरिए सुना जा सकता है। पारंपरिक रेडियो स्टेशन, चाहे वे कितने शक्तिशाली क्यों न हों, अपने आसपास के कुछ सीमित भौगोलिक क्षेत्र में ही प्रसारण कर पाते हैं और जैसे जैसे रेडियो स्टेशन श्रोताओं के स्थान से दूर होता जाता है, रेडियो सिग्नल कमजोर होता जाता है और ऑडियो क्वालिटी खराब होती जाती है, उसमें शोर घुसता जाता है। इंटरनेट रेडियो इस समस्या का सबसे सहज समाधान है। इंटरनेट रेडियो प्रसारण का सेटअप अत्यंत आसान है और यदि आपके पास बढ़िया और पर्याप्त बैंडविड्स का इंटरनेट कनेक्शन है तो आप अपने पीसी के जरिए इंटरनेट रेडियो प्रसारण कर सकते हैं। एक छोटे से कम्प्यूटर अनुप्रयोग-विनएम्प मीडिया प्लेयर या रियल ऑडियो प्लेयर के जरिए इंटरनेट रेडियो प्रसारण संभव है। यही वजह है कि आज इंटरनेट पर रेडियो प्रसारण सैकड़ों की संख्या में हो रहे हैं और यदि आप तलाश करें तो आपकी पसंद का कोई न कोई चैनल मिल ही जाएगा। भले ही आपकी पसंद पाश्चात्य संगीत हो, खेल जगत हो, भारतीय संगीत हो या हंसी मजाक या साहित्य। विकीपीडिया पर उपलब्ध स्रोत के अनुसार, इंटरनेट पर पहला रेडियो वार्ता प्रसारण 1993 में कार्ल मलमड ने किया था। उसी वर्ष, बाद में ऑस्टिन, अमरीका में ऑस्टिन आट्र्स बीबीएस ने नियमित इंटरनेट रेडियो प्रसारण प्रारंभ किया जिसमें पहले से रोकार्ड किए इंटरव्यू, कहानी, युक्तियों व संगीत का प्रसारण किया जाता था। इसे उस वक्त नेटकास्टिंग कहा जाता था। इसके बाद 1994 में वॉइस ऑफ अमरीका ने अपने समाचार प्रोग्राम को इंटरनेट के जरिए पहले पहल देना शुरू किया। फिरक तो जैसे इंटरनेट रेडियो की बाढ़ सी आ गई।

 

इंटरनेट रेडियो को आप पारंपकि रेडियो की तरह टयून तो नहीं कर सकते। इसलिए आपको रेडियो सेवाओं के लिए इंटरनेट पर ढूंढना होता है या फिर ऐसे जदाल स्थलों (जैसे कि लाइन 356 http://www.live356.com/index.live जहां सैकड़ों इंटरनेट रेडियो के पते दर्ज हैं) पर जाना होता है जहां ऐसे इंटरनेट रेडियो स्टेशनों के जाल-पते (वेब एड्रेस) दिए हुए होते हैं। इंटरनेट रेडियो भारत में तो खऐर अपनी पहुंच बनाने में नाकाम सा है क्योंकि पीसी उपभोक्ताओं के पास सस्ता और उच्च गति युक्त ब्रॉडबैण्ड इंटरनेट कनेक्शन की उपलब्धता ही सुनिश्चित नहीं है, परंतु एक अनुमान के अनुसार, अमरीका में इंटरनेट रेडियो वहां की 60 प्रतिशत जनसंख्या तक यह पहले ही पहुंच चुका है। इंटरनेट रेडियो का भविष्य उावल किया है विंडोज मोबाइल प्लेयर ने- अब इंटरनेट इनेबल्ड मोबाइल के जरिए विशेष मोबाइल इंटरनेट रेडियो स्टेशनों को सुना जा सकेगा।

 

रविशंकर श्रीवास्तव- 100-सुकृति, राजीव नगर (कस्तूरबा) रतलाम (मध्यप्रदेश)

 

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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