Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 5, सित. - नवंबर, 2007)

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आवरण कथा

 

 

रूह में उतर जाता है आवाज का जादू

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हसन खान

 

चुनौतियों के बावजूद कायम है रेडियो की अहमियत और उसका तिलिस्म। जो आज भी सुनने वालों को अपनी आकर्षक बाहों में भर लेता है। जनसंचार माध्यम के रूप में रेडियो की एक निश्चित भूमिका शुरू से रही है और आज भी है। भावनाओं, विचारों और संदेशों को दूर तक पहुंचाने में जब दृश्य साथ नहीं देते, छपे हुए शब्द साथ नहीं देते, तब ध्वनि माध्यम की शक्ति और सार्थकता से हम इंकार नहीं कर सकते। 23 जुलाई ,1927 को भारत में मुम्बई से आरंभ हुई रेडियो की यात्रा आज देश भर में अपनी सुगम पहचान बना चुकी है। एक छोटे से माइक्रोफोन से मीलों दूर बैठे मनुष्य के लिए मनोरंजन का माध्यम रेडियो अन्य माध्यमों से अधिक लोकप्रिय और सुलभ होने के कारण अत्याधिक सफल हुआ। ब्राडकास्टिंग के क्षेत्र में सफलताओं के सोपान तय करते हुए रेडियो ने कई चुनौतियों का सामना किया और अपना स्थान बनाये रखा। जैसे ही दूरदर्शन का युग आया रेडियो के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे किन्तु तमाम सवालों और चुनौतियों का जवाब देता रेडियो प्रगति राह पर आज भी कायम है।

 

रेडियो जनसंचार का सर्वसुलभ और सुगम माध्यम है। इसके पहुंच की कोई सीमा नहीं है। यही कारण है कि अपने प्रादुर्भाव के साथ ही इसका संचार सर्वत्र थोड़े ही समय में हो गया। ऐसे लोग जो विकास में पीछे रह गये हैं, जिन्हें अक्षरों की भी पहचान नही है, उन तक विकास कार्यों की जानकारियां पहुंचाने, खेती-किसानी की बातें बताने के अलावा रेडियो ने उन्हें अपने कार्यक्रमों में शामिल करके प्रसारण से भी जोड़ दिया है। आज रेडियो की सर्वव्यापकता एवं अपरिहार्यता से आम आदमी भी परिचित हो चुका है। रेडियो लोगों को आपस में पारस्परिक अनुभवों के जरिए जोड़ता है। रेडियो हर व्यक्ति की जीवन प्रक्रिया में एक आवश्यक कारक के रूप में कार्य करता है। रेडियो विभिन्न गतिविधियों का एक अभिन्न अंग स्वयं बन जाता है। चाहे हम घर पर हों, बाहर पिकनिक पर हों, कार चला रहे हों या कहीं भी कोई काम कर रहे हों, रेडियो एक साथी का कार्य करता है। रेडियो अवसाद ग्रसित व्यक्तियों को बातचीत, संगीत, कहानी एवं नाटकों के माध्यम से भावनात्मक सहारा प्रदान करता है। अधिकांश विकासशील देशों में रेडियो जन-संचार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण माध्यम है। रेडियो आज भी ग्रामीण एवं शहरी समाज के कमजोर वर्गों के लिए सूचना का एक शक्तिशाली माध्यम है। रेडियो में अमानवीय तत्वों के विरूध्द जनता की आवाज बनने की क्षमता है। रेडियो समाचार संवहन का तीव्रतम माध्यम है, रेडियो विद्युत रहित क्षेत्र में भी सुना जा सकता है, रेडियो कार्यक्रमों का निर्माण अन्य बड़े माध्यमों की तुलना में सस्ता होता है, रेडियो में सबसे अधिक नजदीक एवं सुलभ माध्यम होने की क्षमता है, रेडियो से, समाचार, घटना स्थल से प्रसारण करना आसान होता है रेडियो की सबसे बड़ी विशेषता है कि रेडियो के प्रयोग में निरक्षरता कोई बाधा नहीं है।

 

आज जब संचार माध्यमों की होड़ लगी हुई है वहीं टी.वी. के अनेकों चैनल जो जन से जन को जोड़ने का पुनीत कार्य करते आये हैं वे ही आज अपने फूहड़ एवं गलत समाचारों तथा कार्यक्रमों के द्वारा जन से जन को काटने के दोषारोपण से अपने आपको बचा नही पा रहे हैं। ऐसे घटाटोप में रेडियो अपनी रचनाधार्मिता एवं अपने तिलिस्म के साथ आज भी कायम है। इस सच्चाई को भी भुलाया नहीं जा सकता कि जितनी विविधता रेडियो के प्रसारण में है, उतनी विविधता किसी भी जनसंचार माध्यम में नही। विशेष रूप से अपनी धरती से जुड़ी जो बातें रेडियो करता है अन्य चैनल उससे कोसों दूर है। जितनी बोलियों और भाषाओं में रेडियो का प्रसारण होता है वह अनुपम एवं अदभुत है। भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोने के काम को जिस खूबसूरती के साथ रेडियो अंजाम दे रहा है निश्चित ही ये बेजोड़ है। अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ भारत में अनेक टी.वी. चैनलों के अतिरिक्त रेडियो की प्रगति में भी नये आयाम जुड़े हैं। उपग्रह प्रणाली से जुड़ने के कारण दूर से दूर स्थानों के प्रसारण की गुणवत्ता उत्कृष्ट स्तर को प्राप्त हुई है इसीलिए रेडियो, विश्व उपयोगी प्रसारण की अवधारणा नियत कर रहा है। ये कदम जनसंचार के लिए उल्लेखनीय और स्वागतयोग्य माना जा रहा है। देश के विभिन्न भागों में स्थापित हो रहे एफ.एम. ट्रांसमीटर तथा स्टीरियो स्टूडियो की स्थापना ने संगीत तथा अन्य कार्यक्रमों के द्वारा एक नए युग का शुभारंभ किया है। जो रेडियो की भूमिका को देश में नयी क्रांति के रूप में स्थापित कर रहा है। आज के नवीन से नवीन सूचना तंत्र के युग में रेडियो ने अपने प्रसारण के इतिहास में कुछ बदलाव के साथ ब्राडकास्टिंग को प्रसारण की नई तकनीक के साथ नेरो-कास्टिंग को अपनाया है। नेरो-कांस्टिंग का अर्थ लक्ष्य से सीधे संवाद को माना और जोड़ा गया है। संचार माध्यम आपकी आवश्यकतानुरूप विषयवस्तु की बात आपसे ऐसे करते हैं जैसे वे सिर्फ आपके लिए ही प्रसारण कर रहे हों। इससे आपको भी संतुष्टि मिलती है कि माध्यमों में आपको आकर्षित करने के लिए कुछ है। तभी तो आपका ध्यान एक खूबसूरत आवाज अपनी ओर आकर्षित कर प्रभावित करती है। नेरो-कांस्टिंग का सफलतापूर्वक प्रयोग और उपयोग रेडियो द्वारा काफी पहले आरंभ हो गया था किन्तु इस शब्द को प्रसिध्दि तब मिली जब ये दृश्य माध्यम के द्वारा अपनाया गया। नेरो-कॉस्टिंग का व्यवहार अभी नया-नया है, लेकिन आकर्षक एवं लाभकारी है।

 

हवाओं में घुलता हुआ आवाज का जादू जब रेडियो से सुनाई देता है तो हर शब्द दिलों को छू लेने के लिए आतुर होता है। रेडियो मनोरंजन, शिक्षा, संस्कृति, संगीत एवं लोक कलाओं की जीवनगाथा को अंजुलि में भर नित नये गीत गाता है। रेडियो के स्वर उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए अपने प्रसारण से आपको आपकी संवेदनाओं के करीब ले जाते हैं। रेडियो से निकला हुए हर शब्द एक चमत्कार का कार्य करता है। विविध भारती केन्द्रों ने तो रेडियो सीलोन का वर्चस्व ही समाप्त कर दिया है और अब तो विविध भारती का एफ.एम. गोल्ड मनोरंजन की दुनिया को अपनी मुट्ठी में समेट लेने के लिए बेचैन है। मनोरंजन की दुनिया से हटकर दूरस्थ शिक्षा के द्वारा लोकप्रिय हो रहा इग्नू का एफ.एम. ज्ञानवाणी रेडियो अपने प्रसारण के द्वारा शिक्षा को द्वार-द्वार पहुंचा रहा है। इससे हजारों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। पूरे देश में इन दिनों इग्नू के 26 ज्ञानवाणी एफ.एम. रेडियो लोकप्रिय हैं और अब तो शीघ्र ही देश के हर विश्वविद्यालय में केम्पस रेडियो का युग आरंभ होने जा रहा है। बादल समुद्र से चलकर स्वयं नहीं चले आते ये तो धरती की प्यास होती है जो उन्हें अपनी आकर्षक बांहों में बांधकर खींच लाती है। इसी तरह जुगनू की चमक अपनी खुद की नहीं होती, ये तो अंधेरे का प्यार होता है जो उसे चमकाता है। अब जल्दी ही एफ.एम. रेडियो चैनलों का आकर्षण आपको अपनी आकर्षक बांहों में भर लेने के लिए आतुर है। बहुत शीघ्र ही देश के अनेक नगरों के साथ रायपुर में जब रेडियो मिर्ची, रेडियो सिटी, रेडियो भास्कर का माई एफ.एम. और रेडियो रंगीला की तरंगें जुगनू की तरह अपने चमकने के तिलिस्म से आपको आकर्षित करेंगी तब आप एफ.एम. रेडियो की सुरीली एवं मोहक आवाज के जादू से मदहोश होने को आतुर हो जायेंगे। रेडियो के तिलिस्म का संगीत आपको खलाओं में भटकायेगा नहीं बल्कि मुन्तजिर करेगा, आपकी रूह में उतरता चला जाएगा और कायम करेगा आपके दिल में अपना जादू।

मुन्तजिर कोई तो दिल होगा, जहॉ में मेरा,

मैं खलाओं में भटकती हुई आवाज सही।

 

लेखक आकाशवाणी के पूर्व निदेशक रहे हैं।

 

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

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