Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 3, मार्च - मई, 2007)

संपादकीयआवरण कथादस्तावेजप्रसंगवशबातचीतमेरा समयसक्सेस स्टोरीविमर्शस्मृति-शेषपरदेशअंतरजालसाहित्यइत्यलम्

पत्रिका-जगत्अन्यान्यपाठ्यक्रमगतिविधिसमाचारसंदर्भ-कोशआलेख भेजिएआपके पत्रपुरातन अंकहमारा मिशनप्रकाशनमुख्य-पृष्ठ

 

गतिविधि

 

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और उनका पत्रकारिता पुस्तक के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण

 --------------------------------------------------------------------------

 हिंदी है संघर्ष की भाषा : अशोक चतुर्वेदी

 

रायपुर । हरिभूमि रायपुर के स्थानीय संपादक संजय द्विवेदी की चर्चित किताब सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और उनका पत्रकारिता के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण करते हुए वेब दुनिया डॉट कॉम के पूर्व संपादक और मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के संसदीय सलाहकार अशोक चतुर्वेदी ने कहा कि संजय द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता की विरासत को संभालकर छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की नई पीढ़ी को दिशा देने का काम कर रहे हैं ।

 

रायपुर (छग) के पेंशनबाड़ा स्थित माध्यमिक शिक्षा मंडल कॉलोनी में संस्था सृजन सम्मान द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी इस देश में पचास करोड़ से भी ज्यादा लोगों द्वारा बोली और समझी जाती है । बावजूद इसके इस भाषा का इतिहास रहा है कि यह सदा से संघर्ष करती रही है । अब इंटरनेट पर हिन्दी अपने पैर जमा रही है । इसे और भी समृद्ध किए जाने की जरूरत है ।इ सके लिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों को भी आगे आना चाहिए । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कार्पोरेशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य का समन्वय तिल-गुड़ की तरह ही है । उन्होंने कहा कि संजय द्वेविदी ने छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को समझा और अब इसे नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं, जो किसी भी पत्रकार का पहला प्रयास है । उन्होंने पत्रकारिता के प्रति सामान्य होते दृष्टिकोण को बदलने की जरूरत पर भी जोर दिया ।

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि मकर संक्रांति यानी जिसमें कर भी है और क्रांति भी । ऐसे मौके पर ऐसा पुण्य आयोजन होना अच्छी बात है । उन्होंने कहा कि संवेदना के साथ भाषा का जैसा चमत्कार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पत्रकारिता में था, वही तेवर संजय द्विवेदी की कलम में भी नजर आता है । हालांकि संजय कविता नहीं लिखते, लेकिन उनकी लेखनी में कविता-सी लय दिखती है । इस किताब के इंटरनेट पर जारी होने के साथ ही उनकी लेखनी और कृति वैश्विक हो गई है । कार्यक्रम का संचालन संजीव ठाकुर ने तथा आभार प्रदर्शन चेतन भारती ने किया ।

 

इस मौके पर सृजनगाथा डाट काम के संपादक-संचालक जयप्रकाश मानस, राम पटवा, डॉ. सुधीर शर्मा, नीलमणि दूबे, डॉ. जे.आर. सोनी, डॉ. सालिकराम शलभ, गौतम पटेल, हेमंत पाणिग्राहि, संजू बागड़े, एन.पी. विश्वकर्मा के.पी. सक्सेना, हरिप्रकाश वत्स, सुमनेश कुमार, रामायण प्रसाद, सतीश सिंह ठाकुर, अनिल तिवारी, यशवंद गोहिल, राबिन गौतम, नीलेश, आदि उपस्थित थे । यह पुस्तक वैभव प्रकाशन रायपुर ने दो वर्ष पहले प्रकाशित की थी । सृजन-सम्मान ने इस किताब को अपने अभियान "अंतरजाल पर हिंदी की प्रतिष्ठा अभियान" के तहत पूर्णतः ऑनलाइन किया है ।

 

 इसे इंटरनेट पर http;//sampadakmohoday.blogspat.com पर देखा जा सकता है ।

 

                               lll                                                  

 

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-भूमिका द्विवेदी संपादक मंडल-श्रीकांत सिंह, गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रवंध संपादक-चंदशेखर बघेल उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

Google
WWW www.mediavimarsh.com