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संपर्कः संपादक,
मीडिया विमर्श, ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी.
रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत, दूरभाष-
0771-2444107,मोबाइल-98935-98888
स्मृति
शेष....
कमलेश्वर बनाम कमलेश्वर
- गिरीश पंकज
उनकी
सारी कहानियाँ सामने घटती हुई घटना लगती हैं । चाहे वह मानवीय
संबंधों की कहानियाँ हों चाहे अन्य विषयों पर केन्द्रित, हर
कहानी दृश्य में तब्दील होती चली जाती है । वे अपनी इस विशेषता
को जानते थे इसीलिए उन्होंने अपनी इस प्रतिभा का टीवी और
फिल्मी दुनिया में भरपूर इस्तेमाल किया । सौ से ज्यादा फिल्में
लिखने वाले वे हिंदी के इकलौते साहित्यकार थे ।
(आगे
पढ़िए.....)
छत्तीसगढ़ में दैनिक
पत्रकारिता के जनक
- बसंत कुमार तिवारी
दुनिया और ईश्वर से नाराज एक
लेखक - विनोद
शंकर शुक्ल
***
साहित्य में इस बार....
कहानी
-
वधस्थल से छलांग
- हृषिकेश सुलभ
मैं यहा आया ही इसलिए हूं कि
उन्हें बदल दूं या उखाड़ फेंकूं। मैं उन सब लोगों को वाजिब हक दूंगा जो
पत्रकारिता के लिए कमिटेड हैं।.... हां तो मैं कह रहा था....यहां राजनीति नहीं
चलेगी। मैं आप सबों के कई गुना ज्यादा मजा हुआ और पुरानी राजनीतिबाज हूं। मैंने
इस प्रदेश के दो-दो मुख्यमंत्रियों के साथ राजनीति की है और उनकी सत्ता को
चुनौती दी है । उन दिनों में विशेष संवाददाता था, पर अब तो संपादक हूं ।
आगे पढिए...
***
हमारी गतिविधियाँ....
बस्तर में मीडिया विमर्श का लोकार्पण एवं बाजारवाद पर व्याख्यान
मीडिया विमर्श पत्रिका के सूचना का अधिकार विशेषांक का लोकार्पण
सर्वेश्वर
दयाल सक्सेना और उनका पत्रकारिता’ इंटरनेट
पर
***
।।
मीडिया
विमर्श का आगामी अंक
।।
(वेब पत्रकारिता का भविष्य पर
केंद्रित)
प्रिंट
एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद वेब-पत्रकारिता का भी प्रभाव
एवं विस्तार बढ़ रहा है । भारत जैसे देश में जहाँ कम्पयूटर,
नेट सर्फिंग बहुत मंहगी है तथा बिजली भी कई प्रदेशों में कम
रहती है । वहीं अखबार दो और एक रुपए में और नेट सर्फिंग में
दाम बहुत ज्यादा हैं, लोगों में तकनीक के प्रति हिचक भी है ।
ऐसे में वेब-पत्रकारिता का भविष्य क्या है?
भेजिए अपने लेख, अनुभव एवं विश्लेषण ।
- संपादक
 
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