Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 3, मार्च - मई, 2007)

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समाचार

 

 

।। पत्रकारों के लिए खतरनाक रहा गुजरा साल ।।

 

बीता साल पत्रकारों के लिए काफी खतरों से भरा साबित हुआ । इस दौरान 81 रिपोर्टर और 32 मीडिया कर्मी मारे गए । पत्रकारों के लिए काम से लिहाज से सबसे खतरनाक जगह इराक रही । आंकड़े उजागर करते हुए पेरिस की मीडिया निगरानी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर्स ने बताया कि बीता साल 1994 के बाद पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ है । उस साल रवांडा में हुए जनसंहार में दरियों पत्रकार मारे गए थे ।

 

उधर ब्रुशेल्स स्थित इंटरनेशनल फेडरेशन आफा जर्नलिस्टस (अईएफजे) के अनुसार 2006 में कुल 155 पत्रकारों की हत्या हुई । लेकिन यह नहीं बताया कि इनमें कितने रिपोर्टर और कितने सहयोगी मीडियाकर्मी शामिल थे । इन दोनों संगठनों द्वारा दी गई संख्याओं में अंतर होने के स्पष्ट कारण नहीं दिए गए हैं लेकिन मीडिया संगठन कभी-कभी अलग आंकड़े देते हैं, क्योंकि ये संगठन रिपोर्टरों के वर्गीकरण के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाते हैं।

 

आरएसएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि बीते साल में 871 रिपोर्टरों की गिरफ्तारी हुई और पूरी दुनिया में मीडिया के खिलाफ हमले में 1472 मामले दर्ज हुए जो कि एक नया रिकार्ड है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार वर्षों से लगातार इराक पत्रकारों के लिए काम के लिहाज से सबसे खतरनाक जगह बना हुआ है। इस दौरान 39 पत्रकार और 25 मीडिया सहयोगी मारे गए है। वहीं आईएफजे ने यह संख्या 68 बताई। आरएसएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक में 2003 में युद्ध की शुरूआत के बाद से अब तक वहां 139 पत्रकार मारे जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश पत्रकार इराक के नागरिक थे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक के बाद पत्रकारों के लिए काम के लिहाज से सबसे खतरनाक देश मैक्सिको रहा, जहां बीते वर्ष नशे के सौदागरों के मामले की जांच और सामाजिक हिंसा को कवर करने के प्रयास में नौ पत्रकार अपनी जान गंवा बैठे। तीसरा स्थान फिलीपिंस कार है जहां इस दौरान 6 पत्रकार मारे गए। वहीं आईएफजे के अनुसार फिलीपिंस में 13 मैक्सिको में 10 पत्रकार मारे गए । आरएसएफ के अनुसार पत्रकारों के लिए रूस भी कम खतरनाक नहीं रहा है। वहां राष्ट्रपति ब्वादिमीर पुतिन के घोर आलोचक अन्ना पोलितकोव्स्कया सहित तीन पत्रकारों की हत्या कर दी गई। इसमें कहा गया कि पुतिन के सत्ता संभालने के बाद से अब तक देश में कुल 21 पत्रकार मारे जा चुके हैं।

 

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