Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 1, मार्च - मई, 2006)

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अंतरजाल

 

इंटरनेट के पृष्ठों पर राज करती हिंदी

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जयप्रकाश मानस

 

वे दिन अब लद चुके हैं, जब हम किसी सायबर कैफे में बैठे-बैठे मातृभाषा हिंदी की कोई बेबसाइट ढ़ूंढते रह जाते थे; और तब कोई साइट तो दूर जगत्-जाल यानी इंटरनेट पर हिंदी की दो-चार पंक्तियाँ पढ़ पाने की साध भी पूरी नहीं हो पाती थी । अब जगत्-जाल पर हिंदी की दुनिया दिन-प्रतिदिन समृद्ध होती जा रही है । हिंदीप्रेमियों की लगभग शिकायतें अब दूर हो चुकी हैं - वह घर में बैठे-बैठे हिंदी में ई-मेल कर सकता है, दूर देश में बस गये किसी आत्मीय-जन से घंटों हिंदी में वार्तालाप (चैटिंग) कर सकता है, रोज़ हिंदी के दैनिक समाचार पत्र बाँच सकता है, अपने प्रिय विधा की रचनाओं का आनंद आनलाईन साहित्यिक पत्रिका से ले सकता है, नियमित और पेशेवर स्तम्भ लेखक की तरह इंटरनेट पर मुफ़्त जगह (स्पेस) और मुफ़्त के औजारों का फायदा उठाकर हिंदी में स्वयं को अभिव्यक्त कर सकता है, लघुपत्रिका संचालित कर सारे विश्व में बतौर संपादक नाम कमा सकता है। चाहे तो अपनी संपूर्ण किताब या सर्जना को विश्वजाल पर प्रतिष्ठित कर सकता है । इतना ही नहीं रोजगार, शिक्षा, कैरियर, चिकित्सा, योग, इतिहास आदि किसी भी विषय की जानकारी पलक झपकते ही ले और दे सकता है । और यही नहीं, कभी भी समान रुचि वाले सैकड़ों मित्रों के साथ किसी प्रासंगिक मुद्दे पर एक दूसरे को लाईव देख-सुन सकता है यानी विचार-विमर्श कर सकता है । उदाहरण बतौर एक साथ कई देश के कवि अपनी-अपनी कविताओं के सस्वर पाठ का लुत्फ़ उठा सकते हैं, वह भी एक दूसरे को देखते-निहारते हुए। सुखद सत्य तो यह है कि हिंदी ने कंप्यूटर के क्षेत्र में अंग्रेजी क़ा वर्चस्व तोड ड़ाला है और हिंदीभाषी कंप्यूटर का (इंटरनेट का भी) प्रयोग अपनी भाषा में कर सकता हैं, वह भी अंगरेज़ी भाषा में दक्ष हुए बगैर। बावजूद इसके भारत में हिंदी कम्प्यूटिंग और इंटरनेट की दुनिया का एक सच यह भी है इन उपलब्धियों का लोकव्यापीकरण भारत में अभी प्रतीक्षित है ।

 

जन-जन को जोड़ती भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी

यह सच है कि कुछ ही वर्ष पहले तक आम हिंदीभाषी भी इस जुमले को दोहराता फिरता था कि हिंदी सहित स्थानीय भाषाओं में काम करने के लिए सॉफ्टवेयर का अभाव है । पर पिछले कई सालों के सतत् प्रौद्योगिक विकास से आजकल किसी भी साक्षर को कंप्यूटर में हिंदी में अपना काम निपटाते देखा जा सकता है । माइक्रोसॉफ्ट और रैडहैट जैसी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अंगरेज़ी की अनिवार्यता को निरस्त करने का पर्याप्त अवसर मुहैया करा दिया है । हिंदी कंप्यूटिंग अब किसी अंगरेज़ी जैसी विदेशी भाषा की दासी नहीं रही । माइक्रोसॉप्ट के एम.एस. ऑफिस के बारे में अब हर कोई जानता है । विंडोज तथा लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम का इंटरफेस भी हिंदी में बन चुका है । केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की इकाई सीडॉक (सेंटर फॉर डवलपमेंट आफ एडवांस कंप्यूटिंग) द्वारा एक अरब से भी अधिक बहुभाषी भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोने और परस्पर समीप लाने में अहम् भूमिका निभायी जाती रही है । भाषा तकनीक में विकसित उपकरणों को जनसामान्य तक पहुँचाने हेतु बकायदा www.ildc.gov.in तथा www.ildc.in वेबसाइटों के द्वारा व्यवस्था की गई है जिसके द्वारा टू टाइप हिंदी फ़ॉन्ट(ड्रायवर सहित), ट्रू टाइप फॉन्ट के लिए बहुफॉन्ट की-बोर्ड इंजन, यूनिकोड समर्थित ओपन टाइप फॉन्ट, यूनिकोड समर्थित की-बोर्ड फॉन्ट, कोड परिवर्तक, वर्तनी संशोधक, भारतीय ओपन ऑफिस का हिन्दी भाषा संस्करण, मल्टी प्रोटोकॉल हिंदी मैसेंजर, कोलम्बा - हिन्दी में ई-मेल क्लायंट, हिंदी ओसीआर, अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश, फायर- फॉक्स ब्राउजर, ट्रांसलिटरेशन, हिन्दी एवं अंग्रेजी के लिए आसान टंकण प्रशिक्षक, एकीकृत शब्द-संसाधक, वर्तनी संशोधक और हिंदी पाठ कॉर्पोरा जेसे महत्वपूर्ण उपकरण एवं सेवा मुफ़्त उपलब्ध करायी जा रही है । जहाँ मंत्रालय के वेबसाइट पर लाग आन करके सीडी मुफ़्त में बुलवाई जा सकती है वहाँ इन में से वांछित एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर डाउनलोड भी की जा सकती है ।

 

20 जून 2005 से विभिन्न भाषा-भाषियों को सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में मदद के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सी-डैक, भारत सरकार द्वारा मुफ्त वितरित हो रही इस सीडी और आन लाइन वितरण पैक में हिन्दी भाषा में वेबसाइट बनाने के सभी औजार शामिल हैं।  फिर भी मंत्रालय द्वारा यदि इन विविध फ़ॉन्ट्स को उपयोगकर्ताओं में मुफ्त वितरित कराने के साथ-साथ सीधे कंप्यूटर निर्माताओं को भी उपलब्ध करा दिया जाय, और उसे अनिवार्यतः निर्माताओं द्वारा कंप्यूटरों में डलवाया जाय तो कम समय में सारे देश में हिंदी (सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के भी) के फ़ॉन्ट पहले से ही हर पीसी में उपलब्ध हो सकता है । अर्थात् हर भाषा का एक फ़ॉन्ट ऐसा हो जो सभी कंप्यूटरों में अनिवार्यतः उपलब्ध हो । तकनीकि भाषा में इस फ़ॉन्ट को यूनिकोड पर ढ़ला होना भी चाहिए, ताकि समय की माँग के अनुसार सारे के सारे उस वांछित भाषा में काम कर सकें । ठीक उसी तरह जिस तरह दुनिया के सभी कंप्यूटरों में अंगरेज़ी का यूनिकोड पैमाना है ।

 

        अंगरेज़ी का एक मानक की-बोर्ड है । भारतीय भाषाओं में यह अराजकता के स्तर पर है । फ़ॉन्ट की मानकीकरण के साथ-साथ हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के की-बोर्ड का भी मानकीकरण किया जा सकता है । इस संदर्भ में यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा - 1999 में करुणानिधि सरकार ने तमिल भाषा के की-बोर्ड का मानकीकरण किया था । हिंदी के लिए ऐसा कर गुजरना असंभव नही होगा । आखिर इससे पहले टाइपराइटर के की-बोर्ड का मानकीकरण तो हो ही चुका है । आखिर कंप्यूटर उसी का तो विस्तार है । अखिल भारतीय स्तर पर ऐसा हो सका तो भारत में आई टी का फैलाव कई गुना बढ़ सकता है ।

 

        इन दिनों हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में फ़ॉन्ट की समस्या से निजात पाने की दिशा में सरकारी महकमें के साथ-साथ निजी क्षेत्र, दोनों स्तर पर तेज गति से प्रयास हो रहा हैं । माइक्रोसॉफ्ट यूनिकोड आधारित नये फ़ॉन्ट मंगल को विंडोज़-एक्स.पी. आपरेटिंग सिस्टम के साथ उपलब्ध करा रहा है, जो एम.एस. आफिस में सफल है तथा जिसमें विश्व के कई देश के हिंदी साइट बन रहे हैं । हिंदी के अधिकांश बेवसाइट संचालनकर्ताओं और चिट्ठेकारों द्वारा इसी यूनिकोड फ़ॉन्ट का उपयोग किया जा रहा है । माइक्रोसॉफ्ट ने भाषा इंडिया नामक एक विशेष परियोजना भी शुरू की है जिससे हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं की लगभग तमाम समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जा रहा है तथा हिंदी के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के लिए व्यक्तिगत प्रयासों और अनुप्रयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है ।

 

हाल ही में व्यक्तिगत प्रयासों से वर्तनी जांच की क्षमता युक्त मुफ्त हिंदी लेखक हमारे सामने आया है जो आफिस एक्सपी में भी सफल है । यह विंडोज़ के किसी भी संस्करण में सीधे ही फ़ॉनेटिक हिंदी में टाइप की सुविधा से लैश है । यद्यपि इस हिंदी लेखक की वर्तनी जांच क्षमता (हिंदी के 60 हजार शब्द शामिल) हिंदी की व्यापकता को देखते हुए अत्यल्प है । तथापि जनसाधारण या आम उपभोक्ता को इससे लाभ और सुविधा ही होगी । वैसे भी माइक्रोसॉफ्ट हिंदी ऑफ़िस हिंदी में संयुक्ताक्षरों या बहुवचनों में वर्तनी जांच के समय सही वर्तनी वाले शब्दों को भी यह ग़लत बताता है ।

 

इंटरनेट व कम्प्यूटर को हिन्दीकृत करने के कुछ सार्थक व्यक्तिगत प्रयास

 

इंटरनेट ने तमाम विश्व की सीमाएँ तोड़ दी हैं. अगर आपके पास इंटरनेट से जुड़ा कम्प्यूटर है तो आपको इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किसी गांव देहात के कस्बे में हैं या किसी महानगर में. मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे, गंज बसौदा के रहने वाले जगदीप सिंग डांगी ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से हिन्दी भाषा में ब्राउज़र ही बना डाला जिसमें हिन्दी अंग्रेजी शब्दकोश भी है और हिन्दी वर्तनी जाँचक भी. रतलाम के रहने वाले रविशंकर श्रीवास्तव ने लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तमाम, एक हजार से अधिक अनुप्रयोगों के हिन्दी अनुवाद कर डाले जिसके फलस्वरूप रेडहैट जैसी कंपनियों के द्वारा संपूर्ण लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम हिन्दी भाषा में जारी किया जा चुका है. जामनगर में रहते हुए ही स्व. श्री धनंजय शर्मा ने मेनड्रेक लिनक्स की नियंत्रक फ़ाइलों के अलावा ऑपेरा ब्राउज़र, पो-एडिट, डब्ल्यूएक्स-विंडोज़, हेलिक्सप्लेयर, रीयल प्लेयर, एक्सएमएमएस इत्यादि अनुप्रयोगों के हिन्दी स्थानीयकरण का कार्य किया था. आज तो स्थिति यह है कि हिन्दी का प्रत्येक कम्प्यूटर जानकार अपने स्तर पर हिन्दी के लिए कुछ न कुछ कर गुजरना चाहता है । बैंगलोर के आलोक, अमरीका के पंकज नरूला व रमण कौल, पूना के देबाशीश चक्रवर्ती, दुबई के जीतेन्द्र चौधरी इत्यादि अपने-अपने स्तरों पर इंटरनेट पर हिन्दी को समृद्ध बनाने में अनवरत् लगे हुए हैं । उधर छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक संगठन सृजन-सम्मान द्वारा अंतरजाल पर हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए एक अभियान छेड़ा गया है जिसमें विद्यार्थी, बुद्धिजीवी, साहित्यकार को इंटरनेट पर हिंदी के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है । संगठन द्वारा साहित्यकारों की किताबों को इंटरनेट पर प्रतिष्ठित करने का जनव्यापी कार्य भी अपने हाथों में लिया गया है ।  इस अभियान के तहत अब तक सैरेन्ध्री (खंडकाव्यः मैथिलीशरण गुप्त), विश्वबोध (कविताएँ : मुकुटधर पांडेय), कोई दूसरा नहीं (कविताः कुंवर नारायण), हँसी एक नाव सी(गीतः हरि ठाकुर), होना ही चाहिए आँगन (कविता संग्रह, जयप्रकाश मानस), पछतावाचंद्रकला (उपन्यासः डॉ.जे.आर.सोनी), एक हमारा देश (बाल कविताः गिरीश पंकज), सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और उनकी पत्रकारिता (पत्रकारिताः संजय द्विवेदी), मैं गीत गाना चाहता हूँ (गीतः अजय पाठक), रंगझांझर (लघुकथाः डॉ.जे.आर.सोनी), मेरे लोकप्रिय ललित निबंध (ललित निबंधः डॉ. शोभाकांत झा), हिरण्यगर्भ (अध्यात्मः गौतम पटेल) जैसे महत्वपूर्ण किताबों को समग्र रूप से अंतरजाल पर रखा जा चुका है । इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत साल के अंत तक 10 और किताबों को अंतरजाल पर रखे जाने का कार्य तीव्र गति से चल रहा है ।

 

हिंदी टाइप करने के कुछ अच्छे ऑनलाइन औज़ार

अब तक यूनिकोड हिंदी में टाइप करने के लिए सिर्फ़ इनस्क्रिप्ट कुंजीपट ही मौजूद था¸ जो विंडोज़ एक्सपी या लिनक्स के नये संस्करणों में संस्थापित करने के बाद प्रयोग में लाया जा सकता था। वैकल्पिक तौर पर इन दिनों बहुत से ऑफलाइन तथा ऑनलाइन औज़ारों की रचना विविध स्तरों पर की गई। आज अंतरजाल पर यूनिकोड हिंदी में टाइप करने के कई अच्छे ऑनलाइन उपकरण उपलब्ध हो चुके हैं। हिंदिनी के नये हग-2 औज़ार में टाइनी-एमसीई का इम्प्लीमेंटेशन इसके हिंदी अनुवाद के साथ किया गया है जिससे हिंदी पाठ को एचटीएमएल में सजाया-संवारा भी जा सकता है। इसमें .फोनेटिक हिंदी कुंजीपट विकल्प है। इस श्रृंखला में ऑनलाइन कुंजीपट सोर्सफ़ोर्ज, गेट2होम साइट पर आप हिंदी समेत विश्व की तमाम लोकप्रिय भाषाओं में ऑनलाइन टाइप कर सकते हैं।

 

हिंदी में मेल करना हुआ आसान

एमएसएन के हॉट मेल, बेबदुनिया के ई-पत्र और गूगल के जी-मेल में हिंदी भाषा में टाइप कर के संदेश भेजना बिलकुल सरल है । इसमें हॉटमेंल 25 एमबी एवं गूगल 2 जीबी का मुफ्त स्पेस उपलब्ध कराता है । हाल ही में रीडिफ ने भी हिंदी सहित 11 भारतीय भाषाओं में इमेल की सुविधा 1 जीबी स्पेस के साथ देना प्रारंभ कर दिया है । इसमें से गूगल के जी-मेल का रजिस्ट्रेशन बिना किसी की अनुशंसा से संभव नहीं है । इसके अलावा रसिक मेलजहाँ रोमन लिपि में लिखा जा सकता है, और देवनागरी में विपत्र भेजा जा सकता है। सब विकल्प अंगरेज़ी में हैं लेकिन हिन्दी में विपत्र लिखे जा सकते हैं।  इसके अलावा लंगू.कॉम के माध्यम से  हिन्दी में विपत्र (ईमेल), भेजा जा सकता है । यहाँ किसी विशेष मुद्रलिपि की ज़रूरत भी नहीं है।  इसके अलावा भी कई ऐसे मेल सर्विस है जिसके माध्यम से हिंदी में लिखकर ई-मेल भेजे और पढे जा सकते हैं ।

 

इंटरनेट भारतीय भाषाओं की फ़ॉन्ट की समस्या से मुक्त

जी हाँ, इंटरनेट के नियमित उपयोगकर्ताओं के लिए यह खुशखबरी है कि अब उन्हें हिंदी सहित भारतीय परिवार की अन्य मुख्य भाषाओं को पढ़ने के लिए फ़ॉन्ट विशेष के चक्कर में निराश नहीं होना पड़ेगा । अब भिन्न-भिन्न जाति के फ़ॉन्ट को अपने कंप्यूटर में इंस्टाल करने की बाध्यता समाप्त ही समझिए । भाषा विशेष की कोई भी एक यूनिकोड फ़ोंट अपने पीसी में संधारित कीजिए और सर्फिंग पर सर्फिंग करते चले जाइये। कहने का मतलब यह कि एक यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट मंगल या रघु के सहारे आप बीबीसीहिंदी, बेवदुनिया¸ नई दुनिया¸ आदि इत्यादि सभी हिंदी साइटों का रस ले सकते हैं। इस हेतु बहु प्रचलित ब्राउज़र मॉज़िल्ला फ़ॉयरफ़ॉक्स को उसके पद्मा एक्सटेंशन सहित इस्तेमाल करना होगा ।

हिंदी में खुलते चर्चा-परिचर्चा के द्वार

अब तक हिंदीभाषी नेट उपभोक्ता याहू, एमएसएन,नेटस्केप आदि द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सुविधा का फायदा उठाकर किसी समूह की सदस्यता मात्र ई-मेल के सहारे ग्रहण कर संबंधित या वांछित विषय पर आनलाइन चर्चा, गपशप (रोमन में टंकित)कर सकते थे । याहू गुट : विश्वभाषा - हिन्दी भाषा, साहित्य और फ़िल्मों के विषय में चर्चा करने के लिये मञ्च। इसी तरह एक अन्य फोरम याहू गुट : हिन्दी फ़ोरम के नाम से अधिक प्रसिद्ध है । किन्तु यहाँ चर्चा के लिये रोमन लिपि का प्रयोग होता है। गूगल टॉक के आगमन से रोमन की बाध्यता जाती रही और हिंदी में लिखकर बातचीत करने का सुनहरा दौर प्रारंभ हो चुका है । यथा(जैसे चिट्ठाकार समूह) । अब हाल ही में हिंदी फोरम परिचर्चा की शुभ शुरुआत से हिंदी में किसी खास मुद्दे पर आनलाइन बाचतीत करके जानकारी संग्रहण, विचार-विमर्श का नया द्वार खुला है । जिसमें कोई भी व्यक्ति जाति, लिंग, वर्ण, स्थान के शर्त के बगैर सम्मिलित हो सकता है । इसका उपयोग सकारात्मक दृष्टि से करें तो आनलाइन देशी-विदेशी भाषा शिक्षण जैसे अनेक गंभीर विषयो में भी किया जा सकता है।  

 

आनलाइन हिंदी साहित्य की सौगात

 इंटरनेट एक ऐसा स्थान है, जहां किसी भी विषय से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हिन्दी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है, इस दृष्टिकोण से हिंदी भाषा में इंटरनेट पर बहुत कम सामग्री उपलब्ध हैं पर आनलाइन हिंदी के रूप में अब तक काफी सामग्री जगत्-जाल पर उपलब्ध हो चुकी है । जो भारतीय कला, साहित्य एवं संस्कृति, धर्म आदि पर अभिकेंद्रित किताबें पढ़ना चाहते हैं उनके लिए भारत की बेबसाइट साइट (http://vrhad.com)महत्वपूर्ण जाल स्थल है जहाँ हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं की प्रसिद्ध किताबों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है । क्रयादेश देकर किताबें घर बैठे भी मंगवाई जा सकती हैं । यहाँ तुलसी दास रचित दोहावली, कवितावली एवं श्रीभद्भगवतगीता सहित कुछ अन्य किताबें मुफ्त में पढ़ी एवं डाउनलोड़ भी की जा सकती है । आजकल अपने देश में भी, इन्टरनेट पर बहुत सारे पुस्तकों के स्टोर खुल गये हैं। जो अच्छे हैं और भरोसे मन्द भी। मैं इनमे से एक http://www.firstandsecond.com/ से किताबें मंगवाता हूं। आप कहीं भी हों किताबें अपने देश के किसी इन्टरनेट बुक स्टोर से मंगवा सकते हैं। यहां भी आप मेनू पर ढ़ूढ़ सकते हैं।

 

सी-डैकचलपुस्तकालय (mobilelibrary.cdacnoida.com)सीडॅक नॉयडा का अधिकारिक स्थल हैं। यहाँ पर कुछ वेदों के अलावा गिजुभाई बधेका, चौधरी शिवनाथ सिंह शाण्डिल्य, प्रेमचन्द, यशपाल जैन, शिवानन्द तथा अन्य लेखकों की लिखी कई साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आदि विषयों की मुफ्त पुस्तकें हिन्दी व अंग्रेज़ी में उपलब्ध हैं। इंडिया एन इंडियन डॉट कॉम में आप यूनिकोड फ़ॉन्ट में मुंशी प्रेमचंद, अमीर खुसरो, कबीर, तुलसीदास, साहिर लुधियानवी अ‍ादि की रचनाओं का आनंद ले सकते हैं। विवेकानंद के व्‍याख्‍यान, श्रीमद् भागवत गीता, हनुमान चालीसा, आरती और भजन संग्रह आदि भी इंटरनेट पर हैं।आचार्य नागार्जुनकृत सुहृल्लेख ग्रन्थ का भोट देश में बहुत अधिक प्रचलन है। विशेषकर शास्त्रों का अध्ययन न करने वाले गृहस्थ एवं सरकारी अधिकारियों में यह काफी लोकप्रिय रहा है। इसी कारण तिब्बत में इस ग्रन्थ के ऊपर अनेकों भोट आचार्यों ने टीका-टिप्पणियाँ लिखी हैं। फलस्वरूप आजकल भारत में समस्त केन्द्रीय तिब्बती स्कूलों के पाठ्यक्रम में इस ग्रंथ का अध्यापन हो रहा है। केन्द्रीय बौद्ध विद्या संस्थान, लदाख के पाठ्यक्रम में भी इस ग्रन्थ को रखा गया है। साहित्य संग्रह में मीरा, कबीर, प्रेमचन्द, जैसे भारतीय साहित्य के कई शलाका पुरुषो की हिंदी रचनाए हैं। वेबदुनिया साहित्य - हिन्दी साहित्य का महा जालस्थल है। मल्हार में हिन्दी और उर्दू लेखों, कहानियों (प्रेमचन्द की) और ग़ज़लों का अद्भूत संग्रह है । कविताएँ और उपन्यास वह जालस्थल है जहाँ- अश्विनी कपूर, सफ़दर हाशिमी और स्वर्गीय सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं, लेखों, उपन्यासों इत्यादि का संग्रह हैं। भारतीय और अमेरिका-वासी मित्रों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित आधुनिक हिन्दी साहित्य को प्रेषित करने के प्रयास का नाम है- अन्यथा । यहाँ समकालीन कविता, सहित्य, कहानियों और आलोचना का आनंद उठाया जा सकता है। अंतरजाल पर भविष्य में हिंदी कविता का सबसे महत्वपूर्ण एवं बड़ा कोश सिद्ध होने वाला कार्य भी प्रारंभ हो चुका है । नाम है कविता कोश । संपूर्ण जगत्-जाल पर ललित निबंधों का एक मात्र संग्रह स्थल है- http://jayprakashmanas.info, यहाँ हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण ललित निबंधकारों यथा- हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय, पद्मश्री रमेशचंद्र शाह, डॉ. श्रीराम परिहार, डॉ.श्यामसुंदर दुबे, रमेश दत्त दुबे, श्रीकृष्णकुमार त्रिवेदी, डा.बल्देव, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, महेश अनघ, अष्टभुजा शुक्ल, डॉ.शोभाकांत झा सहित युवा ललित निबंधकार श्री जयप्रकाश मानस के ललित निबंधों को आनलाईन पढा जा सकता है । जिन्हें हाइकु का आस्वाद लेना है उन्हें हिंदी गगन डॉट कॉम से जुड़ना होगा । जगत्-जाल पर मात्र प्रौढ़ साहित्य ही नहीं यहाँ बाल साहित्य और दादा नानी की कहानियों का भी भंडार बिखरा पड़ा है । पिटारा और 4 to 40 आदि ऐसे ही जाल स्थलों के नाम हैं । बच्चों के मनोरंजन और कहानियों, कविताओं द्वारा उनका ज्ञान बढ़ाने क