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रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत, दूरभाष-
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विशेष आलेख....
डॉ. अम्बेडकर और उनकी पत्रकारिता
-
मोहनदास
नैमिशराय
बाबा साहेब
डॉ. अम्बेडकर के महत्वपूर्ण पत्र होने पर भी ऐसा देखा पढ़ा गया कि हिंदी के गैर
दलित किसी भी शोध ग्रंथ में डॉ. अम्बेडकर की पत्रकारिता का जिक्र तक नहीं है।
पत्रकारिता की कोई भी किताब खोलिए उसका लेखक संपादक यदि सवर्ण है तो
'हरिजन'
की चर्चा उसने जरूर की होगी, लेकिन
'मूक नायक', 'बहिष्कृत भारत',
या 'जनता'
आदि
समाचार पत्रों की नहीं।
पढ़िए दलित चिंतक नैमिशराय का शोध आलेख......
  
नए युग का प्रारंभ बन सकती है पत्रकारिता
-
ओशो रजनीश
भारत में चौथे खंभे का पता-ठिकाना
- प्रो. ओमप्रकाश
सिंह
  
हमारी गतिविधियाँ....
पं.
बृजलाल द्विवेदी स्मृति पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत हुए डा.
व्यास
'मीडिया
साहित्य और समाज'
पर व्याख्यान
समाज को
संगठित करे मीडिया : शारदानंद
  
।।
मीडिया
विमर्श का आगामी अंक-
वार्षिकांक
।।
(रेडियो की वापसी
पर
केंद्रित)
मीडिया के
नए-नए साधनों की बहुलता और टेलिविजन मीडिया के हल्लाबोल में
यूं लगा कि रोडियो की तो मौत ही हो जाएगी पर अब रेडियो का नया
अवतार सामने आ रहा है । एफएम की क्रांति के साथ-साथ
सामुदायिक रेडियो सेवा भी पैर पसार रही है । इंटरनेट ने उसे
विश्व के दूसरे छोर तक पहुंचा दिया है । रेडियो के इतिहास,
विकास, दशा दिशा पर गंभीर विश्लेषण के साथ होगी खास सामग्री
?
भेजिए अपने लेख, अनुभव एवं विश्लेषण
30 जुलाई 2007 तक ।
- संपादक
 
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