समाज को
संगठित करे मीडिया : शारदानंद
(मीडिया विमर्श के
'संपादक की
सत्ता और महत्ता' विशेषांक का
लोकार्पण)
बिलासपुर।
'संपादक की सत्ता और महत्ता'
पर केन्द्रित 'मीडिया विमर्श'
के तीसरे अंक का लोकार्पण करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी
शारदानंद सरस्वती ने कहा कि ''मीडिया समाज को संगठित
एवं सुसंस्कारित करने का काम करे। इससे ही समाज में सुख और शांति रहेगी।''
पत्रिका के इस विशेषांक में देश के जाने-माने पत्रकारों एवं
संपादकों के विचार प्रकाशित हुए हैं।
बिलासपुर के
जरहाभाठा स्थित 'तुलसी
कुंज' में आयोजित एक सादे समारोह में स्वामी शारदानंद
ने कहा कि समाज को दिशा देने में प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया,
दोनों की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। उसे समाज को जोड़ने के लिए
काम करना चाहिए। पत्रकारिता से सात्विकता के साथ सामाजिक संगठन मजबूत हो,
समाज में एकता को बढ़ावा मिले। साथ ही कलमकार इस बात का ध्यान
भी रखें कि समाज में कुरीतियों को बढ़ावा न मिले। उन्होंने कहा कि संगठित और
सुसंस्कारित समाज रहेगा तो समाज के भीतर शांति रहेगी। यदि समाज संगठित और
संस्कारित नहीं रहेगा तो अराजकता, अशांति और भ्रष्टाचार
चलता रहेगा। रेल का पटरी पर चलना जितना जरूरी है, उसी
तरह जीवन को भी नियम और संयम की पटरी पर चलाना आवश्यक है। उन्होंने देश की
शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई और कहा, ''आज देश में
दिशाहीन शिक्षा दी जा रही है। पहले तो लोग नौकरी पाने के लिए पढ़ते थे,
अब तो पढ़कर भी नौकरी नहीं मिलती। आज की शिक्षा में समाज और
राष्ट्र का चिंतन कहीं दिखाई नहीं देता।''
इसके पूर्व
स्वामी शारदानंद ने श्रीमती भूमिका द्विवेदी द्वारा संपादित 'मीडिया
विमर्श' के तृतीय अंक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर
पूर्व मंत्री बीआर यादव, संभागीय चेंबर आफ कामर्स के
महामंत्री बेनी गुप्ता, 'हरिभूमि'
रायपुर के स्थानीय संपादक संजय द्विवेदी, 'हरिभूमि'
बिलासपुर के स्थानीय संपादक रुद्र अवस्थी,
गुरु घासीदास विवि में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष
गोपा बागची, कुशाभाऊ ठाकरे राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं
जनसंचार विवि में रीडर डॉ. शाहिद अली, पत्रकार किशोर
दिवसे, सुभाष तिवारी, राजेश
मजुमदार, सुब्रत पाल, अनिल
तिवारी, हर्ष पाण्डेय, संजय
पाठक, प्रतीक वासनिक, रमन किरण,
जितेन्द्र रात्रे, राजू यादव,
चंद्रशेखर बघेल उपस्थित थे। समारोह के अंत में प्रेस क्लब
अध्यक्ष शशिकांत कोन्हेर ने आभार प्रदर्शन किया।
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