।।मीडिया
विमर्श के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण एवं
'मीडिया
साहित्य और समाज' पर व्याख्यान।।
समय
मीडिया की गिरफ्त में : अष्टभुजा शुक्ल
रायपुर।
'आज
का समय मीडिया की गिरफ्त में हैं जिसमें कोई प्रतिरोध,
अवरोह या टोका-टोकी की गुंजाइश नहीं है। साहित्य हो या समाज दोनों अब सिर्फ
मूकदर्शक की भूमिका में है। आलम यह है कि मीडिया का मायाजाल हमारी सोचने,
समझने की शक्ति को भी कुंद कर रहा है।'
ये विचार प्रख्यात कवि एवं ललित निबंधकार अष्टभुजा शुक्ल ने 7
मई को रायपुर के प्रेस क्लब में इंडियन मीडिया कांग्रेस द्वारा
आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।
इस अवसर पर उन्होंने
त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के इंटरनेट संस्करण का भी लोकार्पण किया।
मीडिया साहित्य और समाज विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि मीडिया
घटनाओं को घटनाओं की तरह नहीं काण्ड की तरह प्रस्तुत कर रहा है। इसके रामायण
में आठ काण्ड नहीं बल्कि दो काण्ड सुंदर काण्ड और लंका काण्ड ही बचे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
बख्शी सृजनपीठ के अध्यक्ष बबन प्रसाद मिश्र ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में
प्रख्यात कथाकार जया जादवानी, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ
अकादमी के संचालक रमेश नैयर, माखनलाल चतुर्वेदी
राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि, भोपाल में प्रसारण
पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत सिंह मौजूद थे।
प्रारंभ में अतिथियों
का स्वागत प्रेस क्लब, रायपुर के अध्यक्ष अनिल पुसदकर
ने किया। समारोह में पूर्व शिक्षामंत्री सत्यनारायण शर्मा,
छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के अध्यक्ष वीरेन्द्र पांडेय,
वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार तिवारी,
मुख्यमंत्री के सलाहकार अशोक चतुर्वेदी, वेब्ररेज
कार्पोरेशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने, पूर्व विधायक
रमेश वर्ल्यानी, महिला आयोग के सदस्य शताब्दी पांडेय,
कवि लक्ष्मण मस्तुरिया, डॉ. रमेश अनुपम,
डॉ. जे.आर. सोनी, डॉ. विनोद शंकर शुक्ल,
डॉ. रामकुमार बेहार, डॉ. सुभद्रा राठौर,
जयप्रकाश मानस, सुधीर शर्मा,
राजेन्द्र ओझा, चेतन भारती,
तपेश जैन आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम का संचालन
पत्रकार जितेन्द्र शर्मा ने किया। इस अवसर पर मीडिया विमर्श की वेबसाइट के
वेबक्रिएशन के लिए 14
वर्षीय प्रशांत रथ का स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र देकर सम्मान किया गया।
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