Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 4, जून - अगस्त, 2007)

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आवरण कथा

 

 

 

सूचना क्रांति की महायोध्दा

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विजय आनंद

 

प्रसिध्द समाज विचारक एल्विन टॉफलर ने 'थर्ड वेब' नाम से पुस्तक लिखी थी जिसमें उन्होंने लगभग दस वर्ष पुरानी कृषि क्रांति तथा 400 वर्ष पूर्व की औद्योगिक क्रांति के बाद आज जारी सूचना प्रौद्योगिकी में क्रांति को 'थर्ड वेब' या तीसरी क्रांति का दर्जा प्रदान किया। इंटरनेट आज इसी क्रांति का परिणाम है इंटरनेट ने आज मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस रूप ने समय तथा स्थान को इतना छोटा कर दिया है कि हमारी मुट्ठी में समा गया है। 'की बोर्ड' पर हमारी एक उंगुली की हरकत से पूरी दुनिया सिकुड़ती नजर आती है। चार्ल्स बैबेज ने जब पहली बार कंप्यूटर का आविष्कार किया था तो किसी ने सोचा नहीं था कि वह पल में दुनिया की किसी भी जानकारी से परिचित हो जाएगा। अब तक हमारे सामने सूचना प्रदान करने के केवल तीन माध्यम थे पत्र-पत्रिकाएं, रेडियो और टेलिविजन लेकिन अब इंटरनेट पत्रकारिता का दौर प्रारंभ हो चुका है। कलम विहीन पत्रकारिता के इस युग ने एक नए युग का सूत्रपात किया, लेकिन कुछ समय पूर्व से इस क्षेत्र में कई क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। पहले इंटरनेट पत्रकारिता के क्षेत्र में केवल अंग्रेजी के अखबार ही दिखाई देते थे लेकिन अब इस क्षेत्र में हिन्दी के अखबारों ने भी आगे आना प्रारंभ कर दिया है। इंदौर से निकलने वाले हिन्दी दैनिक नई दुनिया ने वेब दुनिया नाम से हिन्दी का पहला समाचार पोर्टल प्रारंभ कर भारत में पहली बार हिन्दी पत्रकारिता के युग का सूत्रपात किया इसके बाद दिल्ली के साहित्यकार हरिशंकर व्यास ने हिन्दी पोर्टल 'नेट जाल' प्रारंभ किया। इसके बाद 'रेडिफ डॉट कॉम', 'सत्यम ऑनलाईन डॉट कॉम' आदि पोर्टलों ने अपने माध्यम से हिन्दी सेक्शन प्रारंभ किए। आज तो लगभग हर अंग्रेजी व हिन्दी समाचार पत्रों ने अपना इंटरनेट संस्करण प्रारंभ कर इंटरनेट पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। कंटेन्ट्स के दृष्टिकोण से दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर आज भारत में पहले हिन्दी के न्यूज पोर्टल के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुके हैं। इस तरह अमर उजाला, प्रभात खबर, राष्ट्रीय सहारा, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, राजस्थान पत्रकारिता, टाइम्स आफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, एशियन ऐज, इंडियन एक्सप्रेस, पायनियर आदि अखबारों के वेब पोर्टल प्रमुख हैं। इस दौड़ में चैनल भी पीछे नहीं हैं आज लगभग हर समाचार चैनल की अपनी समाचार आधारित न्यूज पोर्टल है। हिन्दी की महत्ता को समझते हुए विदेशी समाचार चैनल बीबीसी ने अपनी हिन्दी सेवा प्रारंभ की वहीं 'वायस आफ अमेरिका' ने हिन्दी में समाचार सुनने के लिए आडियो आधारित हिन्दी सेवा प्रारंभ की। अखबारों ने अपनी न्यूज आधारित सेवा को लगातार अपडेट करने का सिलसिला प्रारंभ किया। आरएनआई के 2003 के डाटा बताते हैं 55,780 कुल दैनिक समाचार  व पत्रिकाएं पंजीकृत थीं लेकिन दैनिक समाचार पत्रों में से 200 के इंटरनेट संस्करण भी नहीं है और यदि खबरिया पत्रिकाओं पर नजर दौड़ाएं तो इंडिया टुडे, आउटलुक या फिर पांचजन्य को छोड़ किसी भी अन्य पत्रिकाओं की अपनी वेब साइट नहीं है। कुल मिलाकर अंग्रेजी की अपेक्षा हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता का योगदान काफी निराशाजनक है। अभी कुल मिलाकर हिन्दी की इंटरनेट पत्रकारिता अपनी शैशव काल में है। कई राष्ट्रीय अखबार कहे जाने वाले अखबारों की वेब साइट भी अभी तक वेब में नहीं आई है कारण पर्याप्त विज्ञापन न मिलने के कारण अर्थ अर्जन न के बराबर है और इन्हें बराबर मेंटेन करने में कठिनाइयां भी आ रही है साथ ही साथ इन्हें लगातार अपडेट करने में भी लापरवाही, आदि प्रमुख कारण है। सूचना प्रौद्योगिकी ने हमारे समाज को क्रांतिकारी ढंग से बदलकर रख दिया है अब विश्व के किसी भी कोने पर बैठे लोग इस माध्यम से किसी भी देश में घटी घटना को कुछ ही पल में प्राप्त कर सकते हैं, उसे पढ़ सकते हैं तथा अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। यह एक ऐसा मंच प्रदान करती है जिसने धर्म, जाति तथा देशकाल की सीमाओं को भी तोड़ दिया है।

सन् 1994 में सबसे पहले व्यवसायिक वेब साइट को इंटरनेट पर लांच किया गया था तथा 1996 के आते-आते दुनियाभर के लोगों ने इंटरनेट के प्रति रूचि लेना प्रारंभ कर दिया। ताजा अध्ययन के अनुसार हर साल इंटरनेट प्रेमियों की संख्या 30 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार सन् 2004 की अवधि में करीब 1 करोड़ 20 लाख 60 हजार व्यक्तियों ने इंटरनेट का उपयोग किया था। पिछले वर्ष इस अवधि की तुलना में इस वर्ष इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में 16.7 प्रतिशत की वृध्दि पाई गई है।

 

अमेरिका की एक इंटरनेट फर्म 'स्कोर नेटवर्क' के अनुसार अन्य देशों के मुकाबले भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2006 के मध्य तक 1 करोड़ 80 लाख 2 हजार लोगों ने इंटरनेट सेवाओं का लाभ उठाया। वैसे इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं की कुल संख्या 71 करोड़ 30 लाख से अधिक मानी जाती है और भारत का विश्व में नौवा स्थान है।

 

आज ऑनलाइन की दुनिया में इंटरनेट आधारित पत्रकारिता केवल किसी देश तक ही सीमित नहीं रह गई है। बल्कि यह एक मात्र ऐसा साधन है जिसमें किसी देश की भौगोलिक सीमाएं खड़ी नहीं होती। आज हमारे देश में पाकिस्तान के अखबार डान या फ्राइडे टाइम्स को उसी तरह इंटरनेट पर पढ़ा जाता है जिस तरह हमारे यहां के टाइम्स आफ इंडिया तथा हिन्दुस्तान टाइम्स को। हिन्दी के जानकार लोग चाहें वे दुनिया के किसी भी कोने पर क्यों न बैठे हो हिन्दी समाचार पत्रों की वेबसाइट को खोलकर समाचारों को आसानी से पढ़ सकते हैं। 1995 के बाद से अधिकतर परंपरागत न्यूज एजेंसियों ने अपने-अपने इंटरनेट संस्करण निकालने प्रारंभ कर दिए, केवल अमेरिका में तो तकरीबन 1000 दैनिक समाचार पत्र तथा 100 के लगभग साप्ताहिक समाचार पत्रों के ही इंटरनेट संस्करण उपलब्ध थे। इसी तरह न्यूज चैनलों ने भी अपनी वेबसाइट तैयार कर खबरों को उसी तरह देना प्रारंभ कर दिया जिस तरह वे परंपरागत तरीकों से खबर प्रदान करते थे। वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयार्क टाइम्स, दि टाइम्स आदि समाचार पत्रों के इंटरनेट संस्करण काफी लोकप्रिय हुए।

 

सन् 1995 के बाद से चेन्नई स्थित 'द हिन्दू' ने सर्वप्रथम अपना इंटरनेट संस्करण निकाला इसके बाद तो कई समाचार पत्रों के इंटरनेट संस्करणों की बाढ सी आ गई। इस तरह 8 अप्रैल 1996 को टाइम्स आफ इंडिया तथा 14 अगस्त 1996 को हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपना न्यूज पोर्टल प्रारंभ किया। हिन्दी भाषा के अखबारों का देर से आने का महत्वपूर्ण कारण उनकी तकनीकी समस्या का रहा है हिन्दी फोंट के उपलब्ध न होने के कारण ये अंग्रेजी के अखबारों से काफी पिछड़ गये क्योंकि अंग्रेजी में फोन्ट की समस्या नहीं रही। बाद में जैसे-जैसे तकनीकी विकास होता चला गया हिन्दी अखबारों ने अपने इंटरनेट संस्करण निकालने प्रारंभ कर दिए। 17 जनवरी 1997 को दैनिक जागरण की वेब साइट जागरण डॉट कॉम, 24 जुलाई 1998 को दैनिक भास्कर की वेबसाइट भास्कर डॉट कॉम, 7 दिसंबर 1996 को नई दुनिया की वेब साइट नई दुनिया डाट काम, 4 मार्च 1997 को हिन्दी मिलाप की वेब साइट मिलाप डॉट कॉम, 19 फरवरी 1998 को राजस्थान पत्रिका की वेबसाइट राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम तथा 7 फरवरी 2000 को रांची से प्रकाशित प्रभात खबर की वेबसाइट प्रभात खबर डॉट कॉम आदि प्रमुख हैं।

 

आज पूरी दुनिया में लगभग 80 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय देशों व अमेरिकी देशों के लोग हैं। एक अध्ययन के आधार पर पता चला कि अधिकतर लोग आफिस की अपेक्षा घर में ज्यादा इंटरनेट का उपयोग करते हैं। केवल भारत में ही इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 3.5 मिलियन है। एक इंटरनेट कनेक्शन में लगभग पांच व्यक्ति इंटरनेट का उपयोग करते हैं। ई अखबारों के इंटरनेट संस्करण को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि एक ही जगह उपयोगकर्ता महत्वपूर्ण व्यक्तियों, फिल्मी हस्तियों, साहित्यकारों व अन्य चर्चित व्यक्तियों से बात कर सकते हैं तथा अपने विचार रख सकते हैं। इस तरह अब अखबारों के इंटरनेट संस्करण रेडियो, टेलीविजन व मनोरंजन के अन्य साधनों की अपेक्षा ज्यादा लोकप्रिय होते जा रहे हैं। भारत में स्टिंग आपरेशन को अंजाम देने वाली वेबसाइट 'तहलका' थी जिसके बाद से पत्रकारिता का यह क्षेत्र काफी लोकप्रिय हुआ। आज देखा जाये तो बीबीसी हिन्दी , हिन्दी के उपयोगकर्ता में सबसे ज्यादा लोकप्रिय वेबसाइट के रूप में उभरी है।

 

प्रसारण पत्रकारिता के क्षेत्र में यू-टयूब डॉट कॉम ऐसी वेबसाइट है जिसके माध्यम से किसी भी विडियो क्लिप कोई भी उपयोगकर्ता अपनी स्वयं की विडियो शूट करके उसे वेब साइट में अपलोड कर सकते हैं जिसे दुनिया भर के लोग देखते हैं तथा देखी गयी विडियो क्लिप की रेटिंग भी होती है। इस तरह स वेबसाइट ने स्वतंत्र प्रसारण पत्रकारिता की एक नई विधा को जन्म दिया है। एक अध्ययन के मुताबिक इस वेबसाइट को इंटरनेट पर सबसे ज्यादा देखी जानी वाली तीसरी वेबसाइट का दर्जा प्राप्त है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब इंटरनेट अन्य साधनों की अपेक्षा कितना लोकप्रिय हो चुका है। हाल ही में किये गये एक अनुसंधान से यह बात सामने आई कि रेडियो, टेलिविजन के बाद इंटरनेट अब समाचार व मनोरंजन के हिसाब से विश्व का तीसरा सबसे बड़े स्त्रोत के रूप में उभरा है। लंदन में हुए एक सर्वे से पता चलता है कि लगभग पचास प्रतिशत घरों में खबरों व मनोरंजन के लिए लोग रेडियो व टेलिविजन के बाद इंटरनेट का उपयोग ज्यादा करते हैं। नेशनल रीडरशिप स्टडी काउंसिल द्वारा कराए गए अध्ययन से यह बात सामने आई कि पत्रिकाओं की तरफ लोगों का रूझान कम होता जा रहा है वहीं भारतीय भाषाओं के कई अखबारों की तरफ लोगों में लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर देश के सबसे बड़े हिन्दी के समाचार पत्र के रूप में उभरे हैं जिनके पाठकों की संख्या 1.36 1.35 करोड़ है। वहीं दूसरी ओर टाइम्स आफ इंडिया को वर्ल्ड एसोसिएशन आफ न्यूज पेपर्स द्वारा 25 मार्च 2007 को वाशिंगटन में हुई कान्फ्रेंस में वर्ल्ड यंग रीडर न्यूज पेपर आफ दी इयर प्राइज से नवाजा गया। इस कान्फ्रेंस में 69 देशों से 400 प्रकाशक, संपादक तथा शिक्षा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। वर्ल्ड एसोसिएशन आफ न्यूज पेपर, न्यूज पेपर इंडस्ट्री के लिए ग्लोबल संगठन है जो 18000 न्यूज पेपर का प्रतिनिधित्व करते हैं। निश्चित ही यह हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार अब अंग्रेजी के अखबारों की तुलना में भाषायी अखबार आगे दिखाई पड़ते हैं, कारण अंग्रेजी के अखबार में राष्ट्रीय घटनाओं को ज्यादा से ज्यादा कवरेज दी जाती है तथा क्षेत्रीय खबरों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है। भाषायी अखबारों में राष्ट्रीय घटनाक्रम के अलावा क्षेत्रीय व स्थानीय खबरों की भरपूर जानकारी होने से यह अब लोगों में ज्यादा लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इंटरनेट संस्करणों में सभी प्रांतों से निकलने वाले संस्करणों को एक साथ पढ़ा जा सकता है इस तरह किसी भी संस्करण में कौन सी खबर छपी है इसकी जानकारी केवल की बोर्ड के एक बटन को क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है। पिछले वर्ष की तुलना में दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या में 35 प्रतिशत की वृध्दि रिकार्ड की गई इसी तरह भास्कर के पाठकों में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ। यदि भाषायी अखबारों के फोंट की समस्या को सुलझा लिया जाए तो हिन्दी के ई-अखबारों की समस्या को काफी हद तक सुलझाया जा सकता है।

 

इंटरनेट पत्रकारिता, पत्रकारिता के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। पत्रकारिता के परंपरागत तरीकों से हटकर इंटरनेट के माध्यम से की जाने वाली पत्रकारिता साइबर पत्रकारिता या इंटरनेट पत्रकारिता कहलाती है जिसमें जीवन के वास्तविक क्षणों के घटनाक्रम को तथ्यों समेत इंटरनेट के माध्यम से उसी तरह प्रस्तुत किया जाता है जिस तरह परंपरागत तरीकों से किया जाता है। परंपरागत पत्रकारिता में घटित घटनाओं को अखबार छापता है रेडियो तथा टेलिविजन द्वारा प्रसारित खबरों को देख सुन सकते हैं, लेकिन इंटरनेट पत्रकारिता में दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति खबरों को देख सुन व पढ़ सकता है। अब तो वेबसाइट में यह सुविधा दी जाने लगी है कि खबरों को कापी कर प्रिंट कर सकते हैं खबरों के विडियो क्लिप को डाउनलोड किया जा सकता है और किसी भी समय उन्हें देखा भी जा सकता है। इंटरनेट संस्करण को समय-समय पर अपटेड भी किया जा सकता है। पत्रकारिता के इस क्षेत्र ने सूचनाओं को सम्प्रेषण में तेजी ला दी है अब घटित घटनाओं को सम्प्रेषित करने के लिए वेब जर्नलिस्ट की किसी औपचारिकता को पूरी करने की आवश्यकता नहीं होती बस जानकारी मिलते ही उसे वेब साइट सेयर कर आनलाइन करना होता है। इस तरह खबर इंटरनेट के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रसारित हो जाती है तथा तुरंत प्राप्त हो जाती है जो परंपरागत तरीकों में संभव नहीं होती। इंटरनेट पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता उसका अंत:संबंध होना है। किसी खबर की गहराई से जानकारी प्रदान करने के लिए खबरों का अंत: संबंध कर दिया  जाता है जिससे खबरोें की परत पर परत खुलती चली जाती है जिससे एक खबर के बारे में विस्तार से परदा उठता चला जाता है। जो परंपरागत साधनों में संभव नहीं होता।  परंपरागत साधनों में जहां एक खबर के चयन से लेकर छपने तक कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है वहीं दूसरी ओर साइबर जर्नलिस्ट के लिए यह छूट होती है कि वह इतनी लंबी प्रक्रिया के विपरीत अपनी बुध्दि से तुरंत आनलाइन कर सकता है। परंपरागत पत्रकारिता के विपरीत साइबर पत्रकारिता में एक ही जगह एक ही समय खबर को पढ़ा जा सकता है। विडियो क्लिप भी देखी जा सकती है। समाचारों को सुना भी जा सकता है तथा डाउनलोड भी किया जा सकता है। इन सभी के लिए सारी सुविधा एक ही जगह होने के कारण कहीं भटकना भी नहीं पड़ता। इंटरनेट संस्करण के लिए अलग से संपादक की आवश्यकता नहीं होती और न ही किसी न्यूज एजेन्सी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। लेकिन काफी हद तक इसे सही नहीं कहा जा सकता।

 

फ्री सर्व द्वारा सन् 2002 में कराए एक सर्वेक्षण से एक बात सामने आयी कि अब इंटरनेट, समाचार व मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। यदि आल इंडिया रेडियो, आज तक, इंडिया टीवी, एनडी टीवी आदि खबरिया चैनलों को यदि दुनिया के किसी कोने तक अपनी पहुंच बनानी है तो उन सभी को वेब पर आना होगा। ऐसा नहीं है कि इस तरह की पहल भारत में ही हो रही है बल्कि दुनिया भर के अखबार अपने इंटरनेट संस्करणों में यह प्रयोग कर भी रहे हैं। कुछ समय पूर्व जागरण डॉट कॉम ने घटना स्थल से ही खबरों को मोबाइल या टेलिफोन से देने की कोशिश की थी जो एक सुखद प्रयास है। अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की लगातार संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ समय पूर्व अमेरिका में एक सर्वे हुआ था जिसमें यह माना गया कि दस में से नौ अमेरिकन 14 घंटे कंप्यूटर पर बिताते हैं। अखबार का इंटरनेट संस्करण तैयार करते समय अखबार के कंटेट के बारे में विचार कर लेना आवश्यक होगा। जैसे मुख्य पेज पर क्या-क्या देना है यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि वेब साइट से पाठक क्या अपेक्षा रखता है। मुख्य पृष्ठ पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, खेल, व्यापार, मनोरंजन आदि या फिर रोचक खबरों को स्थान देना। वैसे आज कल अधिकतर अखबार पाठकों की रूचियों को देखते हुए फोटो गैलरी व फिल्मों से जुड़ी खबरों को शामिल करने लगे हैं। साथ ही साथ ई मेल की सुविधा भी प्रदान करते हैं ताकि वे खबरों के बारे में पाठकों से विचार कर सके यह भी ध्यान रखा जाता है कि पेज खुलने में कठिनाई न हो साथ ही साथ पाठकों के सुझाव पर गौर करते रहना आवश्यक होता है, ताकि समय-समय पर वेबसाइट को अपडेट किया जा सके। समाचारों की भाषा भी स्पष्ट तथा सटीक होना चाहिए। शब्दों का संयोजन भी इस तरह का हो कि अर्थ का अनर्थ न हो। इंटरनेट समाचार पत्र तैयार करते समय निम्न बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा :

 

1. कंटेट का स्तरीय होना तथा उसे आसानी से विस्तार दिया जा सके।

2. समाचारों को लगातार समय-समय पर अपडेट किया जा सके।

3. आवश्यकता पड़ने पर पेज को आसानी से डिजाइन किया जा सके तथा उसे परिवर्तित किया जा सके।

4. समाचारों का आपस में इंटरलिंक होना आवश्यक है ताकि एक खबर के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की जा सके।

5. पाठकों के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए उनके विचारों से अखबार को लगातार स्तरीय बनाया जाना चाहिए।

6. वेबसाइट इस तरह तैयार की जानी चाहिए ताकि कोई भी पेज आसानी से खुल सके।

7. पेज का निर्माण इस तरह किया जाये कि एक ही समय में खबरों को पढ़ने के अलावा उसको डाउनलोड किया जा सके, खबरों को सुना जा सके, तथा आवश्यकता पड़े पर क्लिप भी देखी जा सके।

 

  निश्चित ही इंटरनेट पत्रकारिता का यह नया अवतार 21वीं सदी का क्रांतिकारी कदम है। 

 

लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में पुस्तकालय प्रमुख हैं

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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