Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 4, जून - अगस्त, 2007)

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आवरण कथा

 

 

भविष्य उज्जवल है वेब पत्रकारिता का

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सलमा जैदी

 

त्रकारिता की सबसे नई विधा वेब पत्रकारिता सबसे रोमांचक भी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े सहयोगी शायद इससे सहमत न हों लेकिन कम से कम मेरा अनुभव तो यही कहता है।मैं उन चंद सौभाग्यशालियों में से हूं जिन्हें प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन और फिर इंटरनेट पर काम करने का मौका मिला। 'समाचार भारती' से लेकर 'स्वतंत्र भारत' तक की यात्रा समाचार एजेंसी और समाचारपत्रों से जुड़ी दुनिया को लेकर काफी कुछ सिखा गई और फिर बीबीसी हिंदी रेडियो से प्रसारण की शुरूआत र्हुई। यह एक नितांत नया अनुभव था। माइक के जरिए करोड़ों श्रोताओं से सीधा संबोधन शुरू-शुरू में तो हाथ-पैर फुला देता था। माइक से दोस्ती हुई और कुछ सहजता महसूस होने लगी। उसके बाद कुछ समय के लिए बीबीसी हिंदी टेलीविजन से जुड़ने का अवसर मिला और वही दोस्ती कैमरे से करने की आदत डाली।

 

लेकिन पिछले पांच साल से कंप्यूटर के रूप में जो मित्र मिला है वह इतना अपना लगने लगा है कि लगता है उसके बिना जीवन अधूरा है। यह तो हुई मेरी अपनी बात। लेकिन वेब पत्रकारिता से जुड़े किसी भी पत्रकार से बात करके देखिए। वह शायद ही इसे छोड़कर किसी अन्य माध्यम को अपनाने को उत्सुक हो। बड़ी बुनियादी सी बात है। समाचारपत्र एक बार प्रकाशन के लिए चला जाए तो बड़ी से बड़ी खबर आ जाए, उसे अपडेट करने में चौबीस घंटे लगते हैं। रेडियो का प्रसारण भी एक समय सीमा से बंधा हुआ है। टेलीविजन चौबीस घंटे का चैनल है लेकिन एक रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही अगली रिपोर्ट का नंबर आता है और फिर विज्ञापनों का बंधन सो अलग।

 

लेकिन वेबसाइट पल-पल की खबरें आप तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध है। यही नहीं,आप जब चाहें अपनी सुविधा के अनुसार पुरानी से पुरानी रिपोर्ट को सर्चइंजन की मदद से ढूंढा जा सकता है, जो और कहीं संभव नहीं है। यह तो हुई वेब की उपयोगिता की बात। वेब पत्रकारिता का दायरा बहुत व्यापक है। इसकी पहुंच दुनिया के कोने-कोने में है। अब बीबीसी हिंदी रेडियो की ही बात करूं तो इसके श्रोताओं की संख्या भारत के कुछ शहरों और कुछ हद तक नेपाल के श्रोताओं तक ही सीमित थी।

 

शॉर्ट वेव पर रेडियो सुनने वाले इसके श्रोताओं की संख्या हालांकि करोड़ों में है लेकिन वे वहीं पर मौजूद हैं जहां रेडियो की तरंगें प्रसारण उन तक पहुंचा देती है। अब बीबीसी हिंदी वेबसाइट पर रेडियो प्रसारण मौजूद होने के कारण उन तमाम देशों में बसे हिंदी भाषी लोग इसे सुन पा रहे हैं जो रेडियो के जरिए ऐसा करने में असमर्थ थे।

 

मुझे बड़ी प्रसन्नता होती है जब अमरीका, कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से पत्र आते हैं कि स्वदेश में बीबीसी रेडियो सुनने की आदत थी और विदेश में इसका अभाव बहुत कचोटता था। लेकिन अब वेबसाइट के माध्यम से फिर यह जुड़ाव संभव हो पाया है। यह मेरा उत्तर है उन लोगों को जो वेबसाइट शुरू होने पर रेडियो की लोकप्रियता के भविष्य पर प्रश्चिन्ह लगाने लगे थे। वेबसाइट ने रेडियो श्रोताओं की संख्या घटाई नहीं है बल्कि बढ़ाई ही है।

 

पिछले दिनों बीबीसी हिंदी डॉट कॉम ने भारत में अपने पार्टनर वेबदुनिया के साथ मिल कर कई विश्वविद्यालयों और पत्रकारिता संस्थानों में वेब पत्रकारिता कार्यशालाओं का आयोजन किया।

 

मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि अधिकतर संस्थानों में पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं की जानकारी तो दी जाती है लेकिन वेब पत्रकारिता को लेकर कोई पाठयक्रम नहीं है। इन छात्रों से जब हमने बात की तो वे ये बताने में असमर्थ थे कि वेब पत्रकारिता प्रिंट से किन मायनों में अलग है। जब उन छात्रों से उनका रुझान पूछा तो उनमें से 95 प्रतिशत का कहना था कि वे अपना कोर्स पूरा करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भाग्य आजमाना चाहेंगे। लेकिन मुझे यह बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि दिन भर चली कार्यशाला के समापन पर उनमें से अधिकतर ने कहा कि वे वेब पत्रकारिता के बारे में सोचेंगे जरूर।

 

भारत में ब्रॉडबैण्ड का तेजी से प्रसार एक आशाजनक संकेत है। बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के पाठकों की संख्या अब तक अमरीका में सर्वाधिक थी। पिछले चार महीने में भारत के पाठकों की तादाद में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है और अब हमारे सबसे अधिक पाठक भारत से आते हैं। यह अलग बात है कि यह संख्या अब भी महानगरों तक सीमित है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि वह दिन दूर नहीं जब भारत के कस्बों और गांवों में विंडोज एक्सपी और ब्रॉडबैण्ड की पहुंच संभव हो जाएगी और फिर रेडियो श्रोताओं की तरह बीबीसी हिंदी वेबसाइट के पाठक भी पूर्णिया, बेतिया, छपरा, बलिया और बेगूसराय से हमें ई-मेल के जरिए अपनी राय से अवगत कराएंगे।

 

लेखिका बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की संपादक हैं

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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