कमोडिटीज
मार्केट की रीढ़ : वेब पत्रकारिता
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कुमार कार्तिकेय
सूचना ही
शक्ति है। सही समय पर उचित निर्णय लेकर कार्यान्वयन तभी संभव है जब समय
पर्याप्त सूचना प्राप्त हो। कमोडिटीज मार्केट में सफल भागीदारी के लिए भी सूचना
सर्वाधिक महत्वपूर्ण सहायक कारक और आधारभूत तत्व है। कमोडिटी मार्केट संबंधी
सूचनाओं का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्त्रोत वेब पत्रकारिता ही है।
भारत में ही
नहीं वरन् विश्व स्तर पर उभरते कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट की रीढ़ वेब पत्रकारिता
है। विश्व स्तर पर नए कमोडिटीज एक्सचेंजों का जन्म,
पुराने एक्सचेजों का कंसौलिडेशन और शिथिल पड़े कमोडिटीज
एक्सचेजों की सक्रियता सन् 1990
के दशक की आर्थिक गतिविधियों की
महत्वपूर्ण विशेषता है।
सोवियत संघ के
पतन,
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीय की बयार,
इंटरनेट के विकास और विस्तार
ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कमोडिटीज एक्सचेंजों के सुदृढ़ीकरण को अभूतपूर्व
प्रोत्साहन के साथ दिशा प्रदान की। इस दौर तथा इस प्रक्रिया के समांतर बिजनेस
पत्रकारिता का विविधकरण भी हुआ।
इस दौर में
बिजनेस पत्रकारिता का विकास और संप्रेषण प्रौद्योगिकी के स्तर पर विस्तार हुआ
कमोडिटी मार्केट संबंधी समाचारों और इंटरनेट टेक्नोलाजी के आधार पर बिजनेस
पत्रकारिता की नई शाखा का उद्भव देखा गया। यद्यपि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक
मीडिया में भी कमोडिटीज मार्केट के समाचारों का स्थान बढ़ा तथापि वेब पत्रकारिता
में कमोडिटीज मार्केट के कवरेज पर संसाधनों को विशेष और व्यापक रूप से नियोजित
किया गया। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की तरह भारत में भी कमोडिटीज मार्केट
समाचारों से संबंधित कई पोर्टल लाँच किए गए। इनको मार्केट पार्टीसिपेंट्स के
बीच प्रतिष्ठा भी प्राप्त हुई।
यहां से आगे
बढ़ने से पूर्व कमोडिटीज मार्केट का संक्षिप्त परिचय देखना उचित होगा।
अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र के ऐसे उत्पादों को मूलत: कमोडिटीज (वस्तु)
कहते हैं जिनका वाणिज्यिक मूल्य हो। इसमें कृषि उत्पाद जैसे खाद्यान्न,
दलहन, तिलहन व धातुएं आदि शामिल हैं।
वैसे व्यापक तौर पर द्वितीयक क्षेत्र के उत्पाद भी कमोडिटी में शामिल हैं जैसे
खाद्य तेल, पॉवीमर्स
आदि।
कमोडिटी
मार्केट के तीन प्रकारों में सबसे उन्नत चरण या प्रकार फ्यूचर्स मार्केट है। इस
क्रम में पहला चरण स्पॉट मार्केट या हाजिर बाजार है। ऐसे परंपरागत बाजारों से
सभी परिचित हैं। इसमें कमोडिटी का सीधा नकद क्रय-विक्रय होता है। अगला प्रकार
फारवर्ड मार्केट है। इसमें क्रेता-विक्रेता के बीच तुरंत भुगतान व भविष्य में
कमोडिटी की डिलेवरी का अनुबंध होता है। इससे कीमतों में भविष्य में होने वाले
उतार चढ़ावों से बचने का प्रयास किया जाता है। इसमें क्रेता या विक्रेता के
डिफाल्टर होने का भय रहता है। इसकी कमियों को फ्यूचर्स मार्केट में दूर किया
गया। इसमें कमोडिटी एक्सचेंज क्रेता-विक्रेता को ट्रेडिंग के लिए प्लेटफार्म
उपलब्ध करवाता है। अर्थात निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाता है,
जिसमें मांग-पूर्ति के आधार
पर स्टेंडडीइन्ज कांट्रेक्ट के तहत कीमतें तय की जाती हैं। ठ्ठ
लेखक
कमोडिटी कंट्रोल डॉट कॉम मुंबई में कार्यरत हैं

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