Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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स्मृति-शेष

 

 

एक साहित्यिक ऋषि का निधन


संजय द्विवेदी

 

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता के सबसे चमकदार हस्ताक्षर डा.श्यामसुंदर व्यास का निधन एक ऐसी घटना है जो हमें लंबे समय तक रूलाती रहेगी। साहित्यिक पत्रकारिता में अपने योगदान और विपुल लेखन से उन्होंने जो जगह बनाई वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का विषय है। देश की सबसे पुरानी और सतत प्रकाशित हो रही पत्रिका वीणा (इंदौर) के संपादक के रूप में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। वे वीणा के लगातार पैंतीस वर्षों तक संपादक रहे। उनके इसी साहित्यिक अवदान के लिए पं.बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिलभारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान-2006 से उन्हें सम्मानित किया गया। अपने पूज्य पितामह की याद में स्थापित कि ए गए इस सम्मान को लेकर मैं बहुत भावुक था। पुरस्कार का पहला साल था। मन के कोने में कहीं यह इच्छा भी थी कि यह सम्मान प्रथम वर्ष किसी ऐसे मनीषी को जाए जिससे इसकी प्रतिष्ठा स्थापित हो सके। यह संयोग ही था कि माननीय निर्णायकों सर्वश्री विश्वनाथ सचदेव, विजयदत्त श्रीधर, रमेश नैयर, सच्चिदानंद जोशी,गिरीश पंकज की ओर से जो फैसला आया वह इस पुरस्कार की प्रतिष्ठा को बढ़ाने वाला साबित हुआ। श्री व्यास के नाम का चयन वास्तव में साधना, समर्पण और सातत्य का चयन था। हम चाहते थे कि अपने शहर रायपुर में एक भव्य समारोह में श्री व्यास का सम्मान करें। किंतु वे स्वास्थ्यगत कारणों और लंबी आयु के चलते रायपुर आ सकने में असमर्थ थे। हम भी उनके स्वास्थ्य के चलते नहीं चाहते थे कि उन्हें कोई असुविधा हो। इंदौर शहर से मेरा परिचय बहुत कम रहा है फिर भी हमने तय किया कि आयोजन डा. व्यास के शहर इंदौर में ही करेंगें। प्रारंभिक तौर पर हमारे संपर्कों में श्री कमलेश पारे, श्री प्रकाश हिंदुस्तानी का ही नाम था। मीडिया विमर्श के उपसंपादक श्री हेमंत पाणिग्राही ने जाकर इंदौर में कार्यक्रम की व्यवस्थाएं जमानी प्रारंभ की फिर तो इंदौर प्रेस क्लब के सचिव अन्ना दुराई, जनसंपर्क विभाग के अधिकारी डा. भूपेन्द्र सिंह गौतम जैसे मित्रों ने काफी मदद की और आयोजन बहुत सफल रहा। 27 मई, 2007 को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह से इंदौर के वरिष्ठ नागरिकों समेत नई पीढ़ी के लोग शामिल हुए और जिस भावुकता से वे डा. व्यास के सम्मान में अपनी तरफ से फूल, मालाएं और उपहार लेकर आए वह दृश्य देखने योग्य था। अपने संबोधन में डा. व्यास इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखें सजल हो आयीं। अपने इतने सारे मित्रों के बीच उनका भावुक होना स्वाभाविक भी था। कार्यक्रम के बाद अपने इंद्रपुरी स्थित आवास पर उन्होंने कहा था कि 'स्वास्थ्य ठीक होते ही रायपुर आउंगा और आपका कर्ज चुकाउंगा।' हमें पता है डा. व्यास अब हमसे बहुत दूर जा चुके हैं। बावजूद इसके उनका आशीष-स्नेह जो हमने इंदौर के चार दिन के प्रवास में पाया वह हमारी अमूल्य निधि है। इस आयोजन के बहाने हम एक साहित्यिक ऋषि का आशीर्वाद पा सके। उनके व्यक्तित्व के बहुत से पहलुओं से अवगत हो सके। उनका महाप्रयाण एक ऐसा शून्य रच रहा है जिसकी भरपाई संभव नहीं है किंतु उनकी स्मृति हमारा संबल बनकर हमें प्रेरित करती रहेगी।

(लेखक दैनिक हरिभूमि, रायपुर के स्थानीय संपादक हैं)    

 

 

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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