Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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समाचार

 

 

उमा खुराना के स्टिंग आपरेशन के पीछे का सच


आरोपित महिला रश्मि सिंह की आपबीती

 

 

नई दिल्ली। पटना की रहने वाली रश्मि सिंह, 2004 में दिल्ली आई थी। उसने भोपाल से पत्रकारिता का कोर्स किया है। दिल्ली में उसे वैसे ही कठिन दिन देखने पड़े जो किसी भी स्ट्गलर पत्रकार को देखने पड़ते हैं। उसने एक छोटे अखबार में काम किया। कुछ माह बाद दूसरे अखबार में गईं। वहां एक सीनियर ने उसे फंसाना चाहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। उस सीनियर ने तब भी उसका पीछा नहीं छोड़ा और गाहे-बगाहे उसे परेशान करता रहा। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाना चाही लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार, उसे वह काम भी छोड़ना पड़ा। उसके दोस्तों ने काफी सहारा दिया। उनकी सलाह पर ही पिछले साल निर्भीक प्रहरी नामक अखबार रजिस्टर्ड कराया।

जिंदगी पटरी पर आ ही रही थी कि एक दिन वही सीनियर आफिस में आ धमका और झगड़ने लगा। उसने फिर पुलिस में शिकायत करनी चाही, लेकिन मायूसी ही हाथ लगी। एक चैनल पर उसने हैल्पलाईन नंबर देखा। उसने मदद के लिए काल किया, तो उधर से प्रकाश ने फोन उठाया। उसने, उससे मिलकर पूरी बात बताने के लिए कहा। वह उनकी पहली मुलाकात थी। इसके बाद भी प्रकाश से उसका संपर्क रहा। एक दिन प्रकाश दो लोगों के साथ कार में उसके पास आया और स्टिंग आपरेशन में मदद मांगी। उसने बताया कि इससे कई लड़कियों की जिंदगी खराब होने से बचेगी और उसे भी रिपोर्टिंग में नाम मिलेगा। यह सुनकर उसने बिना सोचे-समझे हां कर दी। रश्मि के अनुसार उससे टीचर खुराना से बात करने के लिए कहा गया, जिससे उनकी वीडियो ली जा सके। एक निश्चित जगह पर उमा खुराना एक आदमी वीरेन्द्र अरोरा के साथ कार में आई। उसने रश्मि से नाम पूछा तो उसने सारिका बताया। उन दोनों की बस इतनी सी बात हुई। इसके बाद वीडियो शूटिंग कर रहे प्रकाश के पास लौट आई। प्रकाश ने कैमरा उसकी ओर करके सवाल पूछे कि वह उमा को कब से जानती हैं? वे दोनों कब से साथ काम कर रहे हैं? जब उसने प्रकाश से सवालों पर सवाल किया तो उसे धमकी दी गई कि वह ये राज किसी को न बताए, नहीं तो उसे भी रैकेट में फंसा दिया जाएगा।

कुछ दिन बाद प्रकाश ने बताया कि उसने रिकार्डिंग नष्ट कर दी है, लेकिन उसे पता नहीं था कि उसे स्टिंग आपरेशन बताकर चैनल पर दिखाया जा चुका है। इस मामले के खुलने पर उसे गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया। टीचर उमा खुराना भी वहीं थीं। उसने रश्मि के पैर पकड़कर दो छोटे बच्चों की दुहाई दी। यह उमा से रश्मि की दूसरी मुलाकात थी। रश्मि को जमानत मिल गई है, लेकिन वह काफी सदमे में है। उसके भाइयों ने यह बात माता-पिता से छुपा रखी है। पिता पटना में सरकारी सर्विस में है और दिल के मरीज हैं। रश्मि ने कभी सोचा भी नहीं था कि करियर बनाने के लिए इतना बड़ा धोखा सहना पड़ेगा। अब रश्मि मीडिया से नफरत करती है और यह काम नहीं करना चाहती, लेकिन यह जरूर चाहती है कि प्रकाश को कड़ी से कड़ी सजा मिले। 

(श्रमजीवी पत्रकार बुलेटिन से)

 

 

 

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

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