लेखक अपना एजेंडा स्वयं तय करें - काशीनाथ
सिंह
वागीश्वरी अलंकरण समारोह-2006
भोपाल।
मध्यप्रदेश
हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा भोपाल में आयोजित अलंकरण एवं सम्मान समारोह में
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के दूर शिक्षा कार्यक्रम
में रीडर एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संतोष भदौरिया को आलोचना विधा के लिए
वागीश्वरी सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान हिन्दी के वरिष्ठ
कथाकार काशीनाथ सिंह द्वारा प्रदान किया गया। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने अपने
उद्बोधन में कहा कि आज बहुत सारे लेखक दूसरों द्वारा थोपे गए एजेण्डे पर लिखा
गया साहित्य ईमानदार नहीं होता। खासतौर पर साम्प्रदायिकता,
स्त्री प्रताड़ना और दलित दमन जैसे मुद्दों पर रचनाकार का अनुभव
बहुत जरूरी है। प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं वसुधा के संपादक प्रो. कमला
प्रसाद ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला एवं स्वागत भाषण दिया।
डॉ. संतोष
भदौरिया की सम्मानित कृति शब्द प्रतिबंध में पराधीन भारत में प्रतिबंधित
पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्य की शोधपरक गवेषणा से राष्ट्रीय स्वाधीनता
आंदोलन में सत्य और समाज की प्रतिरोध क्षमता का यथार्थ आंकलन प्रस्तुत किया गया
है। डॉ. भदौरिया ने रचना पाठ के अंतर्गत अपनी पुरस्कृत पुस्तक के चुने गए अंशों
का पाठ किया,
जिस पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने कहा कि
पांच अध्यायों वाली यह किताब उस हिन्दी पत्रकारिता के शौर्य,
संघर्ष की गाथा है जो अभाव, दबाव और
दमन के बीच भी शीश ताने रही। संतोष भदौरिया ने इस संकल्पवान अंत:क्रांतिकारी
शब्द के जूझने की विकलता को आलोचनात्मक विवेक और विचार की दृष्टि सम्पन्नता के
धरातल पर परखने का प्रयास किया है। यह परख, प्रशंसा और
सफलता की सरगम पर सिर हिलाती हुई, औहदेदारों के बीच जगह
पाने को आतुर पीढ़ी के लिए एक पाठ हो सकती है।
अलंकरण समारोह
की अध्यता मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अक्षय कुमार जैन एवं
डॉ. मनोहर वर्मा ने की। संचालन वरिष्ठ कवि राजेन्द्र शर्मा एवं कथाकार उर्मिला
शिरीष ने किया। इस अवसर पर सर्वश्री भागवत रावत,
राजेश जोशी, विजय बहादुर सिंह,
स्वयं प्रकाश, कमला प्रसाद,
वंदना राग, पुन्नी सिंह,
हरि भटनागर, विनीत तिवारी,
महेश कटारे, विजय वाते,
महेन्द्र गगन, संतोष चौबे,
रामप्रकाश त्रिपाठी, संवेदना रावत आदि
रचनाकार उपस्थित थे।


