Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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कविता

 

 

दो कविताएँ


मोहन राणा

 

करतनों के बीच

तारों के कोलाहल में रात का आकाश

मैं टटोलता हूं अपनी जेबें अपेक्षाओं से भरी

कागज की करतनों के बीच,

अपने को रास्ता दिखाती रोशनियों से बचता

चला जाता हूं अंधेरे में

बचता हुआ छायाओं से

कोई एक छाया

भागता हुआ

जैसे अभी सीखा हो मैंने दोड़ना

और जाना दूरियां फिर भी समाप्त नहीं होतीं,

फिर भी नहीं होता तुम्हें विश्वास

कुछ करतनें ही जमा की हैं हमने अब तक

एक दूसरे को दिखाने

....

 

समाचारों के व्यापारी

एक लंबे अंतराल के बाद

दूर से आते हैं वे समाचारों से लदे

थके हुए वे पुरानी तस्वीर से लगते हैं

गीले सीमेण्ट की तरह कठोर हो चुके समाचार चौखट पे

छोड़ बढ़ जाते हैं वे चुपचाप

कोई उन्हें पूर्वज कहता है

कोई विशेषज्ञ कोई प्रवक्ता

कोई उन्हें काल यात्री कोई कुछ और 

जब उलझ जाते हैं शब्द

कुछ न कह पाने की बेचैनी में

न समझ पाने की उलझन में

कोई बस सिर हिला देता है

और कोई कुछ नहीं कहता किसी और को संकेत करता हुआ,

कोई हंसता हुआ चला जाता है सड़क के दूसरी ओर

यह बात सुनकर।

....

(दिल्ली में जन्में मोहन राणा इन दिनों इंग्लैण्ड के बाथ शहर में रहते हैं)

 

 

 

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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