Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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आवरण कथा

 

 

बहुत बदल गया है अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य


संदीप भट्ट

 

मीडिया की उपयोगिता और महत्व को समझते हुए ही उद्योग जगत ने मीडिया संबंध को तरहीज दी। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में फल-फूल रहे कारपोरेट जगत ने जनता के बीच अपनी बेहतर स्वच्छ छवि को बनाने और बरकरार रखने के लिए मीडिया का बेहतर उपयोग किया है। दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी मित्तल आर्सेलर, रिटेल कंपनी वाल मार्ट समेत भारतीय कारपोरेट संस्थानों ऑयल एंड नैचुरल गैस लिमिटेड कार्पोरेशन गैस अर्थारिटी आफ इंडिया लिमिटेड, रिलायंस समूह, टाटा और बिडला समेत सभी कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। इसमें से अधिकांश समूहों ने मीडिया रिलेशंस को महत्व देते हुए अपनी संस्थाओं में जनसंपर्क या मीडिया रिलेशंस शाखा स्थापित की है। अधिकांश कारपोरेट समूहों में जनसंपर्क के पेशेवर ही मीडिया प्रबंधन का कार्य करते है। यूं भी इस जनसंपर्क क्षेत्र से जुड़े लोगों को 'मीडिया ट्रेनर' कहा जाता है। इसके पेशे का मुख्य उद्देश्य अपने संस्थान की बेहतर छवि का निर्माण और निर्मित छवि को बरकरार रखने का है। ये पेशेवर लोग मीडिया का कुशलता से प्रबंधन और बेहतरी से उपयोग कर, इस चुनौती भरे काम को अंजाम दे रहे हैं।

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में जहां कार्पोरेशनें अपने दायरे बढ़ा रही हैं वहीं मीडिया रिलेशंस और जनसंपर्क के क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गयी है। अंतर्राष्ट्रीय जनसंपर्क विशेषज्ञ 'फ्रेसर सीटल' ने अपनी पुस्तक 'द प्रैक्टिस ऑफ पब्लिक रिलेशंस' में लिखा है कि किसी कार्पोरेशन को जनता के बीच अपनी सकारात्मक छवि निर्मित करने में लंबा समय लगता है परंतु एक छोटी सी गलती पूरी स्थितियां बदलने के लिए काफी होती है। ऐसे समय में जब कारपोरेट कंपनियों के कारोबार अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को लांघ गया है, कंपनियों के लिए अपनी बेहतर छवि निर्माण का महत्व और भी बढ़ गया है। यही कारण है कि जनसंपर्क के पेशेवरों की मांग दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। कंपनियां ऊंचे वेतन और सुविधाएं जनसंपर्क एवं मीडिया रिलेशंस से जुड़े लोगों को मुहैया करा रही हैं। बावजूद इसके शीर्षस्थ लोगों की आज भी भारीकमी है।

हाल के शोध बताते हैं कि कई बड़ी कार्पोरेशनों में पब्लिक रिलेशंस या मीडिया रिलेशंस से संबंधित उच्च पद खाली पड़े हैं। इसके कई कारण तो हैं जिनमें प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी, प्रबंधकों का बार-बार नौकरियां बदलना मुख्य हैं। कारपोरेट संस्थाओं में मीडिया रिलेशंस या जनसंपर्क का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गयी है। उद्योगों ने अपना विस्तार किया है और वैश्वीकरण ने दुनिया को एक ग्लोबल विलेज में बदल डाला है। गलाकाट प्रतियोगिता की दौड़ में जनता के साथ संबंध और अपनी संस्थागत विश्वसनीय छवि को बरकरार रखने की चुनौती कंपनियों के सामने हैं। कारपोरेट ये महसूस करने लगे हैं कि मीडिया रिलेशंस या जनसंपर्क के बिना यह कार्य कुशलता से नहीं किया जा सकता है। यही तथ्य पब्लिक रिलेशंस के विशेषज्ञों की अहमियत और बढ़ा देता है।

जनसंपर्क के पेशेवर दो तरीकों से मीडिया रिलेशंस के कठिन काम को अंजाम देते हैं। पहला नियंत्रित मीडिया के द्वारा जिनमें कारपोरेट विज्ञापन, जनहित घोषणाएं, वार्षिक रिपोर्ट, गृहपत्रिकाएं (इन-हाऊस मैग्जीन), फिल्मों आदि का प्रयोग किया जाता है। दूसरी विधि में अनियंत्रित मीडिया के प्रबंधन की व्यवस्था है, जिसमें अखबारों, समाचार चैनलों, रेडियो आदि को प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर, प्रेस मीटिंग, ब्रीफिंग आदि आयोजित कर जनसंपर्क का कार्य किया जाता है। एक अंतर्राष्ट्रीय कार्पोरेशन के लिए मीडिया रिलेशंस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उसे अपनी साख पूरे विश्व समुदाय में बनानी होती है। आज दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी 'वाल मार्ट' भारत के खुदरा बाजार में रणनीति के साथ उतर रही है। वोडाफोन, हच के अधिग्रहण के साथ, कोरियाई स्टील कंपनी पास्को (पोहांग स्टील कार्पोरेशन) उड़ीसा में अपना प्लांट स्थापित कर रही है। दुनिया कीसबसे बड़ी स्टील कंपनी मित्तल आर्सेलर भारत में बाजार तलाश कर रही है। भारतीय कार्पोरेशंस भी विदेशों में स्थापित हो रहे हैं। रिलायंस, टाटा, ओएनजीसी, गेल, सेल जैसी चोटी की कंपनियां विदेशों में पैर पसार रही है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जनसंपर्क तथा मीडिया रिलेशंस के क्षेत्र में भी भारी परिवर्तन आये हैं।

पब्लिक रिलेशंस के विश्वविद्यालय विशेषज्ञ टाम हैरिस ने अपनी पुस्तक 'द मार्केट्स गाइड टु पब्लिक रिलेशंस' में लिखा कि मार्केटिंग पब्लिक रिलेशंस (एमपीआर) तेजी से बदलता है जो कारपोरेट के लिए ध्यान देने वाली बात है। मीडिया रिलेशंस के लोग छवि निर्माण के साथ-साथ क्राइसिस मैनेजमेंट अर्थात परेशानियों का प्रबंधन भी करते हैं। तथ्यों को जनताके समक्ष रखकर भविष्य के लिए बेहतर  प्रबंधन कर छवि को विश्वसनीय बनाना भी जनसंपर्क और मीडिया रिलेशंस के पेशेवरों की कार्यशैली का हिस्सा है। कुशल प्रबंधकों की कमी के चलते कारपोरेट कंपनियां मीडिया तथा पब्लिक रिलेशंस के लिए विभिन्न एजेंसियों की सेवाएं ले रही हैं। विश्वभर में मीडिया तथा विज्ञापन सेवाएं देने वाली टोक्यो की एजेंसी 'डेंसु' का वर्ष 2001 में कुल कारोबार 2070 मिलियन डालर रहा।

'पब्लिक वर्ल्डवाइड' ने उसी वर्ष 1066, मैक्कैन एरिकसन वर्ल्ड वाइड का 1875.2 तथा 'ग्रे वर्ल्ड वाइड' का कुल कारोबार 1321 मिलियन डालर का रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कारपोरेट कंपनियां मीडिया रिलेशंस और जनसंपर्क पर कितना खर्च कर रही है।  नि:संदेह इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। मीडिया रिलेशंस और जनसंपर्क के विशेषज्ञों की भारी मांग है। मांग पूरी न होने के कारण कंपनियां निजी एजेंसियों की सेवाएं ले रही हैं। ऐसे में साफ है कि कारपोरेट जगत में, दुनिया भर में मीडिया और पब्लिक रिलेशंस के पेशेवरों की खासी आवश्यकता लंबे समय तक बनी रहेगी।

 

 

प्रवक्ता मीडिया अध्ययन, विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग

रा.म.वि. डाक पत्थर, देहरादून

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

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