Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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आवरण कथा

 

 

संकटो में सारथी-क्राइसिस कम्युनिकेशन


विजय आनंद

 

कुछ समय पूर्व नोकिया फोन की बैटरी के विस्फोट की खबर हमने सुनी थीं। जिसे लगभग सभी अखबारों ने अपनी खबर बनाया था। नोकिया कंपनी ने अपनी साख बचाने के लिए पूरी दुनिया में अखबारों के माध्यम से बैटरी बदलने के संबंध में विज्ञापन प्रकाशित किया था तथा अपनी वेबसाइट के माध्यम से बैटरी बदलने की मुहिम शुरू की। यह सारा कार्य नोकिया द्वारा अपने उपभोक्ताओं को रिझाने तथा कंपनी का विश्वास बनाए रखने के लिए किया गया था। नतीजा कंपनी को इतना नुकसान उठाने के बाद भी कंपनी के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा तथा कंपनी के उत्पादों की बिक्री दुगुनी हो गई।

ऐसा क्या किया कंपनी ने, बहुत से लोग न जानते होंगे। यदि कंपनी ऐसा न करती तो क्या होता? इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इस तरह की समस्या किसी भी संगठन या कंपनी के लिए नई नहीं है। जो संगठन ऐसी समस्याओं से उबरना जानते हैं वे अपनी साख बचाए रखने में कामयाब हैं। जो समस्याओं के आगे घुटने टेक देते हैं उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। तब कंपनी ऐसा क्या करे कि घटनाओं के घट जाने के  बाद नुकसान कम उठाना पड़े तथा कंपनी की साख भी बाकी रहे। यह सारा खेल किसी कंपनी के जनसंपर्क विभाग के महत्वपूर्ण हिस्से क्राइसिस कम्यूनिकेशन के ईर्द-गिर्द आता है।

क्राइसिस कम्यूनिकेशन जनसंपर्क व्यवसाय के सह विशेषता के रूप में देखा जाता है जो किसी व्यक्ति, कंपनी या संगठन को रोज की चुनौतियों से निपटने तथा अपनी साख बचाए रखने में मदद करने वाली होती है। ये चुनौतियां किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किसी जांच के रूप में, आपराधिक आरोप, मीडिया की छानबीन, किसी शेयर होल्डर द्वारा किए गए मुकदमें, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के रूप में, कानूनी नैतिक या वित्त आदि के रूप में आ सकती है।

क्राइसिस कम्यूनिकेशन व्यवसायी के लिए उसकी महत्वपूर्ण पूंजी अपने संगठन की साख बचानी होती है। जब ऐसे कारण उत्पन्न हो जाते हैं जिससे संगठन की साख धूमिल होने वाली हो तब संगठन की रक्षा करना सबसे पहली प्राथमिकता होगी।

आज यहां 24 घंटे के न्यूज चैनल, सरकारी जांज, संसदीय कार्रवाई तथा मीडिया में स्टींग आपरेशन आदि के चलते कोई भी संगठन इनसे बच नहीं सकता। संगठन को अपनी साख बचाने के लिए क्राइसिस कम्यूनिकेशन का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह किसी संगठन या कंपनी को अनुभवी क्राइसिस कम्यूनिकेशन विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है। किसी समस्या से निपटना किसी जनसंपर्क व्यवसायी के लिए किसी चुनौति से कम नहीं होता। इसके लिए लंबे समय के अनुभव की आवश्यकता होती है।

क्राइसिस कम्यूनिकेशन के अंतर्गत एक पूरी प्लानिंग तथा संदेश जैसे क्रियाकलापों की आवश्यकता होती है। वैसे देखा जाए तो क्राइसिस कम्यूनिकेशन क्राइसिस मैनेजमेंट का ही रूप है। जो सरकारी संस्थाओं, संगठनों या व्यापार में उत्पन्न समस्याओं व संकटों से निपटने का एक महत्वपूर्ण हथियार है।

आधुनिक समय में क्राइसिस कम्यूनिकेशन को महत्वपूर्ण माना गया है। इसका मुख्य उद्देश्य संकट या विपरीत परिस्थियों में संगठन को सहयोग देते हुए सामान्य ढंग से सूचनाओं का प्रवाह तथा व्यापारिक प्रक्रिया को बनाए रखना होता है। इसमें  लगातार संपर्क बनाए रखना, विभिन्न वितरण प्रणाली तक पहुंच, एक सार संचार प्रक्रिया, सूचना सुरक्षा बनाना, संचार का सरल प्रवाह, संचार के विभिन्न चैनल से जुड़े रहना, पेपर आधारित प्रक्रिया से निर्भरता हटाना तथा सही सूचना को प्रदान करना प्रमुख है।

वाशिंगटन विवि अमरीका के आहिन बिजनेस स्कूल की सीनियर प्रवक्ता सैनीट वीच कहती हैं कि संगठन को मीडिया के साथ तथा संकट की स्थिति से निपटने के लिए डाटा के विश्लेषण की तह में जाने की अपेक्षा जो संकेत तुरंत मिल रहे हों, के आधार पर रूपरेखा तैयार करनी चाहिए ताकि किसी बड़ी घटना को समय रहते रोका जा सके।

संकट उत्पन्न होने से पहले मैनेजर को तीन गुणदोषों को अवश्य सीखना चाहिए

1. आशा करना, आशा न करना

2. समस्या को स्वीकार करना तथा अपना दोष मानना

3. कंपनी प्रवक्ता के शब्दों का मिलान कंपनी के द्वारा उठाए गए कदमों से करना।

इसके साथ साथ बी प्रीपियर्ड की कहावत का पालन करना चाहिए। एैनीट वीथ कहती हैं कि आपको यह जानना चाहिए कि आप संकट का इंतजार नहीं कर सकते और तब यह सोचना चाहिए कि इसे टालने के लिए आपके द्वारा उठाए गए कदम आपके लिए भाग्यशाली बन सकते हैं।

संकट किसी भी जगह, किसी भी समय तथा जब तब इसके घटने की आशा बनी रहती है। जैसे ही संकट आता है तब इसे समझना तथा इससे निपटने की प्लानिंग करने का समय नहीं होता। ऐसी स्थिति में पहले से तैयारी करना जरूरी है।

घटनाओं के घट जाने से मीडिया से बचना भी कठिन होता है। क्योंकि मीडिया भी ऐसी घटनाओं को बड़े चटखारे लेकर प्रस्तुत करता है। इससे संगठन की साख खराब होती है तथा संगठन को नुकसान होता है। संकट को काफी कम किया जा सकता है। यदि उन्हें सही तरीके से काबू किया जाए। इसके लिए आवश्यक होगा कि एख विधिवत क्राइसिस कम्यूनिकेशन प्लान तैयार कर लिया जाए। यदि घटना घट जाए तो सभी को सूचना देना, जल्दी कहना, सही कहना आवश्यक है। यदि इसे प्रभाव में लाया जाए तो स्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है। जब ऐसी स्थिति  उत्पन्न हो  तो कंपनी के सीईओ तथा जनसंपर्क विभाग के प्रमुख से संपर्क करना चाहिए। इसके लिए निम्न कार्य किया जा सकता है -

क्राइसिस का पूर्व ज्ञान

पूर्व ज्ञान अतिआवश्यक है जिसके आधार पर संकट के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है तथा रणनीति तैयार की जा सकती है।

क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम का गठन

यह टीम महत्वपूर्ण होती है जो यह निर्णय लेती है कि कौन कौन से निर्णय लिए जाने हैं। यह टीम एक व्यक्ति के सानिध्य में कार्य करती है। यह परिस्थितियों से निपटने के लिए उत्तरदायी होगा। इस टीम में कम से कम सीईओ, जनसंपर्क का मुखिया, वाइस प्रेसिडेंट, एरिया का सीनियर मैनेजर, सिक्योरिटी आफिसर, संगठन का वकील आदि को सम्मिलित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त उस व्यक्ति को जिसके सामने घटना घटी हो। इस टीम का कार्य एक प्लान पर आधारित होगा जो यह निर्धारित करेगा कि कौन व्यक्ति प्रर्वतक होगा। प्रत्येक टीम मेंबर के कार्यों का ब्यौरा तथा सभी के मोबाइल नंबर भी पेपर पर नोट किया जाना भी जरूरी होगा। यह पेपर सभी को वितरित कर दिए जाएंगे। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि संकट समय या स्थान देखकर नहीं आता इसलिए यह लिस्ट पूरी तरह से तैयार होना चाहिए। इसे मैनेजमेंट लिस्ट कहा जा सकता है। एक बार जब क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम का निर्धारण हो जाता है तो यह निश्चित किया जाना चाहिए कि किस मेंबर को कौन से कार्य करने हैं। इसके लिए निम्न प्रारूप तैयार कि या  जा सकता है।

1. नाम    घर    कार्य

2. नाम    घर    कार्य

इस तरह क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम जनसंपर्क विभाग के संपर्क में रहेगी ताकि आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक प्रश्नों के उत्तर दिए जा सके। मीडिया द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का समुचित उत्तर देना  भी आवश्यक है। इसके लिए जितनी जल्दी हो सके, एक तैयार वक्तव्य दिया जा सकता है। 

क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम का पहला उत्तरदायित्व सही स्थिति का निर्धारण करना तथा आपातकाल के समय संदेशों को प्रसारित करना है। यह संदेश सही तथा जल्दी प्रसारित करना भी जरूरी है। सबसे प्रमुख अपनी कंपनी की साख बचाने के लिए झूठ नहीं बोलना चाहिए। अपनी उपस्थिति को भी नहीं छुपाना चाहिए यदि आप ऐसा करते हैं तो स्थिति काफी गड़बड़ा सकती है।

पद

पद का निर्धारण हो जाने के बाद यह आवश्यक हो जाता है कि कंपनी में आपकी क्या भूमिका होगी, स्थितियों से आप कैसे निपटेंगे तथा विपत्ति के समय आपकी रणनीति क्या होगी? विपत्ति या संकट निम्न कारणों से उत्पन्न हो सकती है

1. मनुष्य की गलती से

2. कार्यालयीन कार्य द्वारा

3. अप्रमाणिक प्रक्रिया द्वारा

4. लापरवाही से किए गए कार्यों द्वारा

5. गोपनीय सूचनाओं के दुरूपयोग से

6. गलत फैसले से

7. मानक क्रियात्मक प्रक्रियाओं को न मानने से

8. गुणवत्ता से समझौता करने से

प्रवक्ता का चयन

एक ऐसा व्यक्ति जो कंपनी का प्रतिनिधित्व करे, कार्यालयीन जवाबदेही के प्रति उत्तरदायी हो, मीडिया के प्रश्नों का जवाब दे सके। ऐसे व्यक्ति को कंपना का प्रवक्ता बनाया जा सकता है। यदि किन्ही कारणों से प्रवक्ता न हो, तो किसी अन्य व्यक्ति को यह पद सौंपा जा सकता है। ऐसे व्यक्ति को भी चुना जा सकता है जो तकनीकी रूप से दक्ष हो, सलाह देने का कार्य कर सकता हो। इसमें इंजीनियर, अधिकारी, संघ का नेता तथा वह व्यक्ति जो संकट के समय उचित निर्णय ले सकता हो, हो सकते हैं। प्रवक्ता ऐसा होना चाहिए जो रिपोर्टर के साथ टीवी कैमरे के सामने असहज महसूस न करे। मीडिया को संभाल सके, प्रश्नों का उचित उत्तर दे सके। मुख्य बिंदुओं को पहचान सके, अनाप-शनाप न बके, संकट में स्थिति को संभाल सके। पुलिस, डाक्टर, दमकल विभाग आदि की जानकारी हो।

मीडिया नीति तथा प्रक्रिया

एक ऐसा स्थान चुना जाना चाहिए जहां मीडिया सेंटर स्थापित किया जा सके। अच्छा होगा यदि क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम के कार्यालय के समीप इसे बनाया जाए। प्रवक्ता तथा आपातकालीन क्रिया केंद्र इस बात को स्वीकार कर कि यदि उनके द्वारा कोई गलत वक्तव्य दे दिया गया हो, तो मीडिया सेंटर इस पर ध्यान देगा। मीडिया केंद्र ऐसी जगह नहीं बनाना चाहिए जहां से घटित घटनाओं को न देखा जा सके। यदि आप ऐसा करते हैं तो लोग समझेंगे कि आप उनसे कुछ छिपा रहे हैं।

इंटरव्यू तथा प्रेस ब्रीफिंग की जगह का चुनाव क्राइसिस कम्यूनिकेशन टीम को करना चाहिए। यदि मीडिया के लिए एक बार कोई नियम बना दिए गए हों तो उसका परिवर्तन बेवजह नहीं करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा के संबंध में प्रबंध किए जाने चाहिए। ऐसा करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है जो इसे प्रभावी तरीके से संभाल सके। यदि आवश्यकता महसूस हो तो रिपोर्टर द्वारा व्यक्त किए गए विचारों पर ध्यान दिया जा सकता है। संकट में प्रभावित व्यक्तियों से रिपोर्टर बातचीत कर सकता है अत: संकट को संभालने के लिए सबसे अच्छा तरीका इंटरव्यू को संभालना है।

कठिन प्रश्नों का अभ्यास

इससे पहले मीडिया हमें घेरे हमें कठिन प्रश्नों की तैयारी तथा उन्हें समझने का कौशल विकसित कर पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए। ताकि कंपनी का प्रवक्ता इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार हो सके।  यह काफी महत्वपूर्ण है कि एक प्रवक्ता को कठिन प्रश्नों के उत्तरों की तैयारी पहले से ही कर लेनी चाहिए। ताकि वह रिपोर्टर से बात कर रहा हो तो उसके प्रश्नों का जवाब वह सहजता से दे सके। इस तरह का अभ्यास आवश्यक है।  यदि घटना के हिसाब से संभावित प्रश्नों के जवाब का अभ्यास भी कर लिया जाए तो अति उत्तम होगा। इस तरह के प्रश्नों को तैयार करने का जिम्मा जनसंपर्क विभाग को दिया जा सकता है। तथा इसके जवाबों को भी तैयार करवा लेना चाहिए। ताकि अभ्यास सत्रों का आयोजन किया जा सके।  ध्यान रहे कि यह प्रश्न आपके आंतरिक प्रयोगों के लिए हैं। इनका वितरण बाहर नहीं होना चाहिए।  प्रवक्ता यह सुनिश्चित करे कि वह आफ द रिकार्ड बात नहीं करेंगे।

वक्तव्य की तैयारी

यदि आप शीघ्र कुछ नहीं कह सकते तो आप घटनाओं को काबू करने की असफलता के लिए तैयार रहें। आपके पास न्यूज रिलीज तैयार अवस्था में होनी चाहिए जिससे स्थिति से संबंधित कौन, क्या, कब और कहां आदि जानकारियां दर्ज होनी चाहिए। संबंधित स्रोतों से तथ्य भी जुटाने चाहिए। उसी पर भरोसा करते हुए ज्यादा विचार नहीं करना चाहिए। आपको यह याद रखना चाहिए कि आपकी की भी एक सीमा है।

यदि आपके पास प्रेस को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है तो समझ लीजिए कि आप सही जा रहे हैं। आप अपने कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की पहल करते हैं तो आप अपना भरोसा जीतने में सफल होते हैं।

जब आप मीडिया से उत्पन्न क्राइसिस के संबंध में बात कर रहे हों तो आपके पास पहले से तैयार एक स्टेटमेंट होना चाहिए। जैसे जैसे क्राइसिस से संबंधित जानकारी प्राप्त होगीआप अपने स्टेटमेंट को बढ़ाते रहेंगे। यह स्टेटमेंट प्रवक्ता के पास मीडिया से बात करते  समय हमेशा होनी चाहिए। यह स्टेटमेंट टेलीफोन पर रिपोर्टर से बात करते समय पढ़ी जा सकती है। लेकिन ध्यान रहे कि इसे न्यूज कांफ्रेंस में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। विशेष मांग पर यह फैक्स या ई मेल से भेजी जा सकती है।

न्यूज रिलीज का खाका

आज (समय) पर (जगह) शामिल (कौन) में एक(क्या हुआ)। दुर्घटना की जांच चल रही है तथा इससे संबंधित और जानकारियां आने वाली हैं। आज 3 बजे कमला रोड पर स्थित राज खिलौने की मुख्य  यूनिट में विस्फोट हुआ। दुर्घटना की जांच चल रही है। अन्य जानकारियां आने वाली हैं। इस तरह का एक खाका बनाकर रखा जा सकता है।जैसे जैसे सूचनाएं आती जाएंगी, वैसे वैसे सूचनाएं जोड़ते रहना चाहिए। जोड़ी गई सूचना को जांचते रहना भी आवश्यक है।

सृजनात्मक सामग्री

अपनी कंपनी के बारे में सूचना विवरणिका तथा तथ्यसीट या जहां घटना घटी है का विवरण तैयार कर लेना चाहिए ताकि घटना की सूचना इस माध्यम से संवाददाता को प्रदान की जा सके  या उन्हें जो कंपनी के बारे में जानना चाहते हैं। यहां यह भी जानना आवश्यक होगा कि घटना किन कारणों से हुई है। इसके लिए जरूरी है कि कंपनी के तकनीकी पक्ष की जानकारी भी आपके पास हो। ताकि संवाददाता को समझना आसान हो। ऐसा करने से संवाददाता दिगभ्रमित होने से बच जाता है। आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि कठिन से कठिन मुद्दे को सरल बनाया जाए ताकि संवाददाता सरल ढंग से उसे समझ सके।  यदि दुर्घटना किसी उपकरण के पुर्जे से हुई है तब उसके जैसे दूसरे पूर्जे को संवाददाता के सामने दिखाएं यदि संभव हो तो उसकी ड्राइंग बनाकर दिखाई जा सकती है। विजुअल भी दिखाया जा सकता है। यहां पर ध्यान रखना आवश्यक है कि उस पुर्जे को न दिखाएं जिसके कारण घटना हुई है। यदि ऐसा होता है तो संकट हो सकता है।

लक्ष्य समूह

जब आप क्राइसिस के समय कार्य कर रहे होते हैं तो आपको प्रत्येक स्रोत समूह के साथ संवाद करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए जनसंपर्क विभाग की सेवाएं लेने की जरूरत होती है। यहां ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सारे स्रोत समूह आपके स्रोता हैं और आपके कार्य का हिस्सा हैं।

ये समूह निम्न हो सकते हैं जिनके बारे में जानना आवश्यक है

कर्मचारी : प्रबंधक, कर्मचारी, परिवार, यूनिट सदस्य रिर्टायर्ड व्यक्ति, पड़ोसी, संगठन

उपभोक्ता :  भौगोलिक, स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय

कार्य : वितरक, नौकरी पेशे वाले, होल सेलर, रीटेलर, उपभोक्ता

व्यवसाय : सप्लायर, पार्टनर, कांपीटिटर, व्यवसायिक सोसायटी, ठेकेदार, व्यापार समूह

मीडिया : सामान्य, स्थानीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, विशेषज्ञ

शैक्षणिक : ट्रस्टी, प्रतिशासक, निदेशक, वित्ताधिकारी, विद्यार्थी, प्रशासक, अध्यापक, भूतपूर्व विद्यार्थी

वित्त: संस्था के अध्यक्ष, शेयर होल्डर, बैंकर, स्टाक ब्रोकर, पोर्टफोलियो मैनेजर

कार्यात्मक : न्यायिक, कार्यपालिका, एक्सीक्युटिव, जूडिशियल

विशेष क्षेत्र : वातावरणीय सुरक्षा, अपंग, उपभोक्ता, स्वास्थ्य, वृध्द, धार्मिक, गरीब आदि।

संपर्क लेखा

क्राइसिस के बारे में मीडिया या अन्य लोगों द्वारा की गई बातचीत का ब्यौरा रखना आवश्यक होता है। यह ब्यौरा संकट के बाद विश्लेषण में लाभदायक होता है। ब्यौरे में निम्न जानकारियां होती है

दिनांक फोन करने वाले का नाम पूछे गए प्रश्न फोन नंबर अन्य

प्रवक्ता का प्रस्तुतीकरण

क्या करें :-

- सरल भाषा में पढ़ने योग्य स्क्रिप्ट तैयार करें

- ज्यादा से ज्यादा मार्जिन छोड़ें

- पेजों को व्यवस्थित स्टेपल करें

- मुख्य बिंदुओं को हाइलाइट करें

- बोलने से पहले शीशे के सामने अभ्यास करें

- स्रोता को ध्यान में रखें

- प्रस्तुति से पहले सारी चीजें पहले जुटा लें

- 15 मिनट पहले पहुंचे

- साथ ले जाने वाले उपकरणों को जांच लें ताकि बाद में परेशानी न हो

स्लाइड

जब आप स्लाइड से प्रस्तुतीकरण दे रहे होते हैं तो इसे जांचना आवश्यक है। यह देखना चाहिए कि स्लाइड क्रम से है या नहीं। प्रकाश की व्यवस्था कैसी है। बोलने से पहले माइक्रोफोनका परीक्षण कर लें। क्या आप मुझे सुन सकते हैं का उच्चारण किया जा सकता है।

ट्रांसपरेंसी

यदि ट्रांसपरेंसी का उपयोग कर रहे हैं तो यह देखना जरूरी है कि लिखे जाने वाले अक्षर दूर से पढ़े जा सकें। कमरे के हिसाब से ट्रांसपरेंसी बनानी आवश्यक है। स्क्रीन पर पूरा फोकस जरूरी है। आवाज स्पष्ट हो।

जब आप बोलें

बोलने की कला तथा बाडीलेंग्वेज सफलता व असफलता के बिंदु हैं। बोलते समय सीधे खड़े होनातेज बोलनापूरी आवाज से श्रोताओं तक पहुंचना तथा समय समय पर श्रोताओं से सीधा संपर्क बनाना जरूरी है।

जब आप प्रश्नों का जवाब दें

दोस्ताना व्यवहार तथा पूर्ण आत्मविश्वास का होना आवश्यक है। प्रश्नों का जवाब बहुत ही सरल व स्पष्ट भाषा में देना चाहिए। याद रखिए कि आप सब कुछ नहीं जानते। इसके लिए आप कह सकते हैं कि मैं इसे देखूंगा। कृपया मीटिंग के बाद मुझसे बात कर लें। यदि आप किसी व्यक्ति के प्रश्नों का जवाब न दे पा रहे हों तो आप कह सकते हैं प्रश्न के लिए धन्यवाद, मैं आपसे बातकर अभिभूत हुआ। मीटिंग के बाद आपसे मैं इस बारे में बात करूंगा। अगले प्रश्न की ओर चलते हैं।

जब आप अपना प्रस्तुतीकरण कर चुके हों

किसी एक व्यक्ति को अपने से बात करने का मौका दें, यदि कोई निवेदन करे तो सूचनात्मक सामग्री वितरित की जा सकती है।

क्या न करें-

जब आप बोलने के लिए जा रहे हों-

- महसूस करें कि आपके सिवाय कोई जानता ही नहीं है।

- आपको पूरा भरोसा है कि आप बिना तैयारी के जा सकते हैं

- पेपर में छोटे छोटे अक्षरों में टाइप करें ताकि रोशनी में पढ़ सकें

- लेट होने से बचें

- उपकरणों का परीक्षण कर लें

- व्यक्ति का नाम भूल जाएं

जब आप बोलें

-माइक्रोफोन पर तेजी से चिल्लाएं

- बिना तैयारी के चुटकुले सुनाएं

- निश्चित समय से ज्यादा समय लें

-माइक के पास गुनगुनाएं

 जब आप प्रश्नों के जवाब दें

-भावुक हो जाएं

- महसूस करें कि कठिन प्रश्न आपके निजी प्रश्न हैं

- किसी एक व्यक्ति को प्रश्न पूछने के लिए ज्याê