Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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आवरण कथा

 

 

कारपोरेट में कम्युनिकेशन मैनेजमेंट


ऋतुराज सिंह चौहान

 

म्युनिकेशन को मैनेज करना आज एक ऐसी कला है जो छोटे से बड़े आदमी तक सभी के लिए जरूरी बन गई है। संचार की साधारण प्रक्रिया के असाधारण लाभ लिए जा रहे हैं। सिर्फ अपनी बात रखना और दूसरों की बात सुनने की बजाय इसमें ऐसे कई तत्व सम्मिलित हैं जो कारपोरेट की दुनिया बदलने में सक्षम हैं। मानव मन को प्रभावित करना संचार प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा रहा है लेकिन इस तत्व का इस प्रकार से दोहन किया जाएगा, ऐसा किसी संचार विशेषज्ञ ने भी नहीं सोचा होगा। तमाम सिध्दांतों और अवधारणाओं के बावजूद कम्युनिकेशन मैनेजमेंट कार्पोरेट का प्राण तत्व है। संचार की दुनिया में काम करने वाला अर्थात मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा है। वहां भी कम्युनिकेशन को इस प्रकार से मैनेज किया जा रहा है मानो वह कोई मशीनी गतिविधि हो। लेकिन उन्हें भी इसमें सफलता मिली है। मानव मन की गहराई और समाज में जीवन की सभी अवधारणाओं का उपयोग कम्युनिकेशन मैनेजर बखूबी कर रहे हैं।

कॉमन से होकर कम्युनिकेशन आज कारपोरेट की शान बन गया है। साधारण संवाद का हस्तांतरण एक ऐसी विधा बना है जो बड़े-बड़े उद्योगों को चलाने का सबसे बड़ा उपकरण कहलाने लगा है। कारपोरेट कम्युनिकेशन नाम से प्रचलित यह फंडा सभी बड़े उद्योग घरानों में सुनाई देता है। वहां पर दक्ष प्रशासक, कुशल मानव संसाधन, सक्षम आर्थिक संचालकों के चलते संचार के द्वारा ऐसे नए परिवर्तन किए जा रहे हैं, जिन्हें देखना-सुनना अपने आप में नवीन अनुभव है। कार्पोरेट्स में कम्युनिकेशन को इस तरह से मैनेज किया जा रहा है, जो उद्योग को नवीनता प्रदान करने के साथ उच्चता का शिखर प्रदान कर रहा है। कम्युनिकेशन को मैनेज करने से ऐसे कितने ही उद्योग सफलता की पायदानें चढ़ चुके हैं जो जीने की लडाई लड़ रहे थे। एक दशक पहले तक कंपनियां सिर्फ आकार में बड़ी होती थीं, लेकिन आज उनके पास विस्तार के नए आयाम हैं। लाखों कर्मचारी, करोड़ों-अरबों का कारोबार करने के साथ वे देश से लेकर समाज तक के सामान्य जनजीवन में शामिल हैं।

मीडिया उद्योग में कम्युनिकेशन मैनेजमेंट का यह फंडा देने वाले नामचीन संपादक हैं जो अपने संचार को स्थापित करने के लिए कई योजनाओं को क्रियान्वित कर रहे हैं। सभी मीडिया उद्योगों में काम करने वाले कम्युनिकेशन मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। इस बारे में उनका मानना है कि दुनिया में सिर्फ खबरें देने भर से हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती है। मीडिया का काम सतत् संवाद बनाए रखना है। इस संबंध में कम्युनिकेशन मैनेजमेंट एक अहम भूमिका अदा कर रहा है।

कार्पोरेट्स में कम्युनिकेशन के इतने आयाम देखे जा रहे हैं जिनका साधारण तौर पर आकलन संभव नहीं है। पहले जब हम जनसंपर्क के संबंध में बात करते थे तो आतंरिक और बाहरी जनता जैसा पक्ष हमारे सामने रहता था। आज कम्युनिकेशन मैनेजमेट ने संचार को विविध आयामी बना दिया है। किसी कारपोरेट के भीतर का संवाद और बाहर का संवाद दोनों में एकरूपता एक ऐसी थ्योरी है जिसमें कारपोरेट को पारदर्शी शीशे के समान बना दिया है। एक सिध्दांत के अनुसार आज कारपोरेट ऐसे हैं जिनके बारे में उनकी जनता सब कुछ जानती है। यह कुछ नहीं सिर्फ संचार प्रबंधन के कारण है। कंपनियों के सामने हमेशा से तीन मुद्दे रहे हैं- उत्पादकता, गुणवत्ता और जनता। इन तीनों पर खरा उतरने के लिए कंपनियां जुटी रहतीं हैं। लेकिन आज की कंपनियों की सबसे बड़ी खासियत हैं अपनी जनता से संवाद स्थापित करना। उसके लिए उन्होंने कई कम्युनिकेशन मैनेजरों को नियुक्त किया है।

आज हर कारपोरेट में एचआर विभाग की तरह कम्युनिकेशन विभाग भी स्थापित किया जा रहा है। कारपोरेट में संचार प्रबंधन के कई उद्देश्य हैं जिनके लिए विभिन्न नीतियां अपनाई जा रही हैं। संचारकों से लेकर ग्रहीता तक सभी को जोड़ने के लिए कई कड़ियों को जोड़ा गया है। संचार प्रबंधन के लक्ष्यों में संगठन का सामान्यीकरण करना और जनता तक सीधी पहुंच प्रमुख हैं।

कारपोरेट में संचार प्रबंधन पर जिस तरह से जोर दिया जा रहा हैं, उससे कई कार्य एक साथ सिध्द हो रहे हैं। जनता से सीधी बात होने के साथ प्रत्येक कर्मचारी के लिए भी संगठन की पकड़ सीधी हो गई है। सभी कारपोरेट की खासियत है कम्युनिकेशन मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट। भले ही वह मीडिया में विज्ञापन, प्रसारण के साथ ऐसे विभाग काम कर रहे हैं जो सीधे संचार का काम करते हैं। जनता से संवाद स्थापित करने के लिए वे सर्वे से लेकर प्रतियोगिता और कार्यशाला से लेकर सेमिनार तक का सहारा ले रहे हैं। यहां सिर्फ अपनी गुणवत्ता स्थापित करना उनका लक्ष्य नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में जगह बनाना है। जनता ही किसी भी कंपनी की नाक और आत्मा कहलाती है। इसके लिए कार्पोरेट्स कुछ भी करने को तैयार हैं। इसमें कम्युनिकेशन प्रबंधन की सहायता से ऐसे नए पक्ष जोड़े गए हैं जिनके द्वारा संबंधों में प्रगाढ़ता लाई जा रही है। संचार विभाग कंपनियों के अंदर और बाहर संवाद की ऐसी स्थिति का निर्माण कर रहे हैं जो उनके लिए सफलता के नए द्वार खोलतीं हैं।

आतंरिक संवाद में कई तत्व ऐसे हैं जो मानव संसाधन से संबंधित हैं लेकिन उनका निराकरण संवाद के द्वारा किया जा रहा है। संचार एक ऐसा साध्य बन गया है, जिसका सही और सटीक उपयोग कारपोरेट कंपनियों को सहायता प्रदान कर रहा है। इसमें टीम का चयन, टीम लीडर का चयन, कार्यों का विभाजन, समूह की संतुष्टि, समूह की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा रहा है। कम्युनिकेशन मैनेजर अपने स्तर पर इन कार्यों को अंजाम देता है। लेकिन इस संचार विभाग में प्राथमिक स्तर पर समाज और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाता। जनता की पहली इकाई समाज को ध्यान में रखकर संचार प्रबंधन पर जोर दिया जाता है। संचार प्रबंधन के उद्देश्यों में प्राथमिक तौर पर निम्न हैं-

संबंध स्थापित करने के लिए संचार प्रबंधन- आतंरिक और बाहरी जनता से सीधे संबंध को बनाना एवं उन्हें प्रगाढ़ करना। कंपनी से जुड़े लोगों से सीधे जुड़ने के साथ उनसे तर्कसंगत और न्यायसंगत संवाद स्थापित करना।

संचार प्रबंधन से नेतृत्व- कंपनी के अंदर लीडर बनाना और स्पर्धा में कंपनी को नेतृत्व प्रदान करने के दोहरे लक्ष्य संचार प्रबंधन के हैं। शक्ति का इस प्रकार से उपयोग करना कि वह कंपनी को सफलता दिला सकें। भले ही जनशक्ति हो या किसी समूह में काम करने वाला कोई टीम लीडर, सभी से इस प्रकार संचार रखा जाए कि वह कारपोरेट का समर्थन करें।

संचार से संपन्नता- संचार से हर प्रकार की संपन्नता को प्राप्त करना। भले ही वह जनसंपर्क की हो, उत्पाद की गुणवत्ता स्थापित करने की हो या फिर व्यापार को विस्तार देने की हो। नया विचार, जनसमूह की सहभागिता से निर्णय क्षमता तक  से आने वाली संपन्नता को कंपनियों में मान्य किया जा रहा है।

संचार से समूहों का निर्णय- अपने लिए ऐसे चयनित समूहों का निर्माण करना जो व्यापार में मदद करें। सामान्य जनता में अपने ऐसे उपभोक्ताओं को खोज निकालना जो सिर्फ आपमें विश्वास रखते हों।

संचार प्रबंधन से परिवर्तन- सांस्कृतिक, सामाजिक परिवर्तनों को आकार देना जो कि देश और समाज की जनता के लिए अनिवार्य हो, बॉस, जनता, पारंपरिक मुद्दों के साथ अनिवार्य परिवर्तनों को ध्यान में रखकर संवाद प्रबंधन करना।

इन लक्ष्यों के चलते आज कम्युनिकेशन प्रबंधन प्रत्येक कारपोरेट की आवश्यकता बन गया है। कम्युनिकेशन मैनेजर प्रबंधन के सभी नियमों को इसमें परिपालन कर संवाद के लिए ऐसी जमीन का निर्माण कर रहे हैं जो कारपोरेट को नई ऊंचाइयां दिलाने में सक्षम बन गए हैं। कम्युनिकेशन मैनेजमेंट के तहत कम्युनिकेशन डिपार्र्टमेंट एक ऐसी प्रभावी शक्ति के रुप में कार्यरत हैं जो संपूर्ण कारपोरेट को संचालित कर रहे हैं। इसमें सफल संचारक उनके लिए मददगार बन गए हैं।

 

 

 

 

367, , सुदामानगर, इन्दौर, 452009, (मध्यप्रदेश)

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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