Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 2, अंक - 6, दिसंबर.07.- फरवरी, 2008)

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आवरण कथा

 

 

कारपोरेट क्षेत्र में आंतरिक संचार


डॉ. श्रीकांत सिंह

 

 

कारपोरेट क्षेत्र में प्रबंधन, वाणिज्य, व्यवसाय, प्रशासन एवं विकास के लिए आंतरिक संचार एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। आज के कारपोरेट जगत में जिस प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है उसमें तो संचार का महत्व और भी बढ़ गया है। कारपोरेट क्षेत्र में आंतरिक जनसंचार ही जीवनदायिनी शक्ति है जो कारपोरेट को शक्ति प्रदान करती है। आज कारपोरेट क्षेत्र में पूंजी के अधिकारों एवं उत्तरदायित्वों की तुलना में आधुनिक प्रबंधन ने श्रेष्ठ कल के लिए एक सर्वमान्य पेशे का रूप धारण कर लिया है। ऐसे में आंतरिक संचार प्रक्रिया का महत्व स्वमेव सिध्द है। कारपोरेट क्षेत्र में आंतरिक संचार के द्वारा हमें अनेक कार्यों को संपादित करने में मदद मिलती है जैसे

* कारपोरेट में प्रबंधन तथा कर्मचारियों के बीच सौहार्द्र के वातावरण का निर्माण।

* कारपोरेट की समस्त गतिविधियों से अपने कर्मचारियों को  अवगत कराना।

* कर्मचारियों को उनकी स्थिति, कार्यकुशलता और सुरक्षा से अवगत कराना।

* कारपोरेट की छवि कर्मचारियों के बीच निर्मित करना।

* कारपोरेट की प्रगति में भागीदारी हेतु कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए उनकी कार्यक्षमता का भरपूर उपयोग।

* प्रबंधन और कर्मचारी संघों से समय समय पर वार्तालाप करने जिससे उनमें मतभेद न हो।

* कर्मचारियों की समस्याओं का आंतरिक स्तर पर हल।

* निर्णयों का निर्धारण

* प्रबंधन एवं कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करना।

* कर्मचारियों का प्रशिक्षण

* कारपोरेट की नीतियों का निर्धारण

* कारपोरेट संचार के दीर्घकालीन, सामाजिक, आर्थिक एवं वैधानिक स्थितियों को समझना एवं संकटकालीन प्रबंधन-समझ विकसन।

* प्रतिष्ठान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच अंत: संबंध का निर्माण करना।

* कारपोरेट के मूल्य, आदर्श, एवं उद्देश्यों के प्रति कर्मचारियों में समझ

* अंतर्विभागीय सहयोग में वृध्दि का विकास।

आंतरिक संचार के स्वरूप

कारपोरेट क्षेत्र में आंतरिक संचार मुख्य रूप से भाषिक संचार के रूप में होता है। भाषिक संचार मुख्य रूप से लिखित तथा मौखिक दोनों रूपों में होता है। यह परिस्थितियों के अनुरूप औपचारिक और अनौपचारिक दोनों प्रकार का होता है। कारपोरेट क्षेत्र में सामान्यत: संचार के जिस रूप का प्रयोग होता है वह है अंर्तवैयक्तिक समूह संचार। यह संचार उर्ध्वाकार एवं क्षैतिज दोनों रूपों में प्रयोग होता है। सामान्यत: कारपोरेट क्षेत्र में संचार के जिस रूप का प्रयोग होता है, उसे हम इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं।

अंर्तवैयक्तिक संचार

यह वह संचार प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति संप्रेषक द्वारा प्रेषित सूचना या संदेश को दूसरे व्यक्ति ग्रहीता द्वारा ग्रहण किया जाता है। यह संचार सामाजिक संबंधों का आधार है। यह मौखिक और सांकेतिक दोनों रूपों में हो सकता है। इस संचार प्रक्रिया में पत्र व्यवहार (आदेश, निर्देश, आवेदन पत्र, मेमोरेंडम) टेलीफोन और आमने सामने का संप्रेषण शामिल है। प्रबंधन की तरफ से कोई आदेश निर्देश चाहे लिखित हो या मौखिक वह कर्मचारी अपनी निजी समस्या पर प्रबंधन से कोई लिखित या मौखिक बात करता है वह भी इसका उदाहरण है। इसमें स्त्रोत एवं श्रोता परस्पर मिले हुए होते हैं। जब कोई व्यक्ति संदेश दे रहा है तो वह संप्रेषक बन जाता है और संदेश ग्रहण करने वाला व्यक्ति ग्रहीता। जब ग्रहीता सूचना को उत्तर या नए रूप में प्रस्तुत करता है तो वह संप्रेषक बन जाता है और सूचनादाता ग्रहीता की भूमिका में आ जाता है। कारपोरेट जगत में यदि किसी कर्मचारी से प्रबंधकीय अधिकारियों का मतभेद हो जाता है। कर्मचारियों को कार्य करने हेतु आदेश एवं निर्देश भी संप्रेषण के इसी स्वरूप द्वारा दिया जाता है। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिपुष्टि तुरंत प्राप्त हो जाती है। प्रबंधन किसी मुद्दे पर प्राय: किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत सलाह भी इसी प्रक्रिया के माध्यम से लेता है। अंर्तवैयक्तिक संचार में दो व्यक्तियों के मध्य सकारात्मक व्यवहार, पसंद, परस्पर आकर्षण आदि सम्मिलित होता है। यह परिस्थितियों के अनुरूप उर्ध्वाधर या क्षैतिज दोनों ही रूपों में हो सकता है। एक सफल कारपोरेट क्षेत्र की प्रबंधकीय कुशलता, निर्णय लेना, आपसी समन्वय, कर्मचारियों को दायित्वबोध कराना इत्यादि पर निर्भर करता है। अंर्तवैयक्तिक संचार इन सभी कार्यों का सहयोगी होता है। कारपोरेट क्षेत्र में प्राय: कार्यों का निष्पादन टीम वर्क की भावना पर ही होता है। अंर्तवैयक्तिक संचार की महत्ता इससे और अधिक बढ़ जाती है।

समूह संचार

कारपोरेट क्षेत्र में समूह संचार का भी प्रयोग होता है। कभी कभी प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों को एक निश्चित समूह में संबोधित करते हैं। कारपोरेट क्षेत्र अपनी नीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए समय समय पर मिटिंग आयोजित करते हैं। उसमें भाग लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने विचारों से समूह के अन्य सदस्यों को अवगत कराता है। इसके अतिरिक्त वह दूसरों के विचार को सूनता भी है। इस प्रकार समूह संचार में वैचारिक आदान प्रदान होता रहता है। परिणाम स्वरूप नए नए विचार उभरकर सामने आते रहते हैं। इससे प्रतिष्ठान को अपनी नीतियां बनाने में आसानी होती है। कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों की किसी समस्या पर विचार करते समय भी समूह संचार का ही प्रयोग होता है। समूह संचार में प्रतिपुष्टि तुरंत प्राप्त हो जाती है। परिणाम स्वरूप नीतियों के क्रियान्वयन या समस्या के समाधान में विलंब नहीं होता। सामान्यत: कारपोरेट क्षेत्र की कार्य संस्कृति टीम वर्क पर  आधारित होती है। कई संस्थानों ने तो अर्थपूर्ण चर्चाओं को सहत व त्वरित बनाने के लिए केंद्रित समूह स्थापित करना भी प्रारंभ कर दिया है। यह समूह अंर्तवैयक्तिक संचार के द्वारा ही कार्य करता है। ग्रुप में कार्य निष्पादित होने के कारण इसे समूह संचार भी कहते हैं। कारपोरेट जगत में समूह संचार के कार्यों की भूमिका को हम इस प्रकार समझ सकते हैं -

- विशिष्ट नीतियों एवं समस्याओं के अध्ययन हेतु, उनके समाधान की दिशा में प्रयास हेतु, इस संबंध में नई बातें व अनुभव तथा विशिष्ट निर्णयों के क्रियान्वयन के तरीके बताना।

बैठक के सदस्यों तथा उस विषय से संबध्द अन्य लोगों को तथ्य व सूचनाएं प्रेषित करना।

- समान रूचि के विषयों पर जानकारी व विचार प्राप्त करना, गलतफहमियों को दूर करना, विचारों का आदान प्रदान करना तथा उद्देशित कार्य करवाना और इस प्रकार निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना।

- व्यवहार व विचारों में बदलाव लाने के प्रयास करना तथा समूह गतिविधि से जुड़े लोगों को उनके  व्यक्तित्व विकास के अवसर प्रदान करना।

- चर्चा के लिए किसी मुद्दे के विभिन्न पहलुओं पर भिन्न भिन्न विचार व्यक्त करने के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

- दूसरे शब्दों में कहें तो आपके द्वारा इच्छित अनुशासन थोपने की कोशिश न कर समूह सदस्यों में ही अनुशासन की भावना को प्रोत्साहित करना।

समूह संचार में व्यवधान

विश्व भर के मंजे हुए संचारक इस संबंध में एकमत हैं कि विद्वेष रूपी व्यवधान समूह संचार में सबसे बड़ी बाधा है। कारपोरेट क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी व अधिकारी विभिन्न संस्कृति, समूहों और संप्रदायों से आते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें कारपोरेट  के हित में  अपने सभी पूर्वाग्रहों को त्यागकर एक परिवार के रूप में कार्य करना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। क्योंकि इसमें कई प्रकार की बाधाएं समय समय पर आती रहती है। पहली बाधा है व्यक्तिगत पूर्वाग्रह की। यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के अन्य व्यक्तियों के प्रति कुछ पूर्वाग्रह होते हैं। जब तक विद्वेष रहेगा तब तक संचार के लिए वह गंभीर समस्या पैदा करेगा। प्रतिष्ठान में व्याप्त विद्वेष कलह से जन्म लेता है। यह कलह हमेशा विभागों के मध्य होते हैं। प्रबंध स्वयं इस कलह को बढावा देता है। उदाहरण के लिए उत्पादन एवं विपणन, क्रय तथा उत्पादन और लेखा तथा अभियांत्रिकी के मध्य हमेशा तनाव व खिंचाव रहता है। यह लड़ाई या कलह प्रत्येक प्रतिष्ठान में रहती है। सबसे पहले समूह व प्रतिष्ठान को समस्या की पहचान करना चाहिए। और फिर उसे दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए। यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह कार्य सिर्फ समस्या को सुलझाने के लिए किया जा रहा है न कि कमियां निकालने के लिए। दूसरे चरण में सूचना के प्रसार पर ध्यान देना चाहिए। यदि इसमें किसी प्रकार की बाधा या अरूचि है तो संचार माहौल में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता होगी। यह समझना जरूरी है कि विद्वेष का भाव कहीं बाहर से नहीं उत्पन्न  होता। यह भाव स्वयं के तथा अन्य व्यक्तियों के अंदर से ही जागृत होता है। कई प्रतिष्ठानों में प्रबंधकों द्वारा अपनाया गया कठोर रवैय्या इस विद्वेष का कारण बन जाता है। ये प्रबंधक मुख्यत: अकुशल संप्रेषक हैं। विशेषकर उस स्थिति में जहां दूसरों की बात सुने जाने की बात आती है। यह शीर्ष प्रबंधन का दायित्व है कि वह अच्छे संप्रेषण कौशल को सशक्त करें। इस प्रक्रिया का एक चरण यह भी होता है कि फिर से खुले संचार माहौल का निर्माण करना। सहज और खुले संचार के लिए द्विपक्षीय संवाद तथा दूसरे की बात सुनना भी आवश्यक होता है। उपरोक्त के अतिरिक्त अंगूरीलता संचार का प्रयोग भी यथासमय कारपोरेट क्षेत्र में होता है। यह कभी कभी अफवाह का रूप धारण कर लेता है। कभी प्रतिष्ठान की छवि के लिए व्यूह रचना के अनुसार उपयोगी भी होता है।

 

 

 

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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