Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक - 2, दिस.06 - फर., 2007)

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संपादकीय

 

 

घूस देने वाले को भी दीजिए घूंसा

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 भूमिका द्विवेदी

 

मीडिया विमर्श का यह दूसरा अंक आपके हाथों में है । एक गंभीर, वैचारिक त्रैमासिक का जैसा स्वागत अपेक्षित था, उससे कहीं अधिक गर्मजोशी और खुले दिन से मीडिया विमर्श का स्वागत हुआ, जो वैचारिक क्षेत्र में निष्पक्ष और निष्कपट बौद्धिक विमर्श की आतुरता का परिचायक है । इसके लिए मीडिया विमर्श नहीं, चिंतनशील समाज बधाई का पात्र है ।

 

इस सूचना पर कोई बहुत अधिक आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि मीडिया विमर्श का यह अंक सूचना के अधिकार पर केंद्रित है।  सूचना का अधिकार कानून लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है । इस कानून का लागू होना भारतीय लोकतंत्र का एक निर्णायक मोड़ है। यह कानून, दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार और सत्ता के दलदल में सड़ते जा रहे तंत्र को बचाने की आखिरी कोशिश है । इस लिहाज से इस बात की पड़ताल करना बेहद जरुरी है कि हम इस साल में कहां पहुंचे हैं और हमें कहां जाना है । हमारे समाज से सिर्फ  ‘घूस का घूंसा ही अपेक्षित नहीं है, बल्किघूस देने वाले को भी घूंसा अपेक्षित है । स्वार्थ और लालच को जड़ से मिटा कर उस प्रवृत्ति का ही नाश करना होगा । मीडिया के लिए सूचना का अधिकार कानून के रुप में लागू होना विशेष महत्व का है । सूचना को पाने की तथा उससे समाचार बनाने की जिस जद्दोजहद में मीडिया के उन सभी स्वैच्छिक और उत्साहपूर्ण, कोशिशों की वैधानिक मान्यता है । इसका उपयोग जितना जनसामान्य के लिए महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक मीडिया के लिए  है । यह वह  अस्त्र है, जो न्याय और सूचना की लड़ाई में मीडिया को बेहद सावधानी से सोच-समझकर करना होगा ।

 

इस अंक में हमने सूचना के अधिकार से जुड़े विभिन्न पक्षों पर सामग्री देने की कोशिश की है। हमने प्रयास किया है कि प्रशासन, मीडिया, विचारक और सूचना आयोग है, उस बर्फ को तोड़कर पिघलाना  भी है, जो संवाद और पारदर्शिता का मार्ग अवरूद्ध करती है । इसके अतिरिक्त इस अंक में हमने कुछ और भी रोचक तथा उपयोगी सामग्री दी है । दस्तावेज और मेरा समय जैसे नियमित स्तंभ हैं जो पीढियों से हमारा साक्षात्कार कराते हैं । दस्तावेज के अंतर्गत प्रकाशित दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी का व्याख्यान, जो उन्होंने 1927 में दिया था उनकी दूर दृष्टि हैं जो पीढियों चिंतन क्षमता के दर्शन हमें कराता है । इस आलेख की कई बातें आज भी शब्दशः खरी हैं । इसके अतिरिक्त हमने विभिन्न दूसरे विषयों पर विद्वानों के विमर्श को भी इस अंक का हिस्सा बनाया है ।

 

साहित्यिक खंड के अंतर्गत हमने मीडिया पर केंद्रित साहित्य के जरिए मीडिया, साहित्य और टेक्नोलॉजी के अंर्तसम्बधों को टटोलने की कोशिश की है । कहानीये लड़कियां आधुनिक संचार के परिप्रेक्ष्य में प्रेम की बदलती परिभाषा को गढ़ती है ।

 

अब समय आ गया है कि कुछ परिभाषाएं नये सिरे से गढ़ी  जाएं । मीडिया विमर्श के माध्यम से हमारा प्रयास बौद्धिक चिंतन की एक नई परिक्षाषा गढ़ने का है ।सूचना के अधिकार के माध्यम से सशक्तीकरण की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है । उसे सजदा करते हुए यह अंक आपकी नजर है ।

 

 

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मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-भूमिका द्विवेदी संपादक मंडल-श्रीकांत सिंह, गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रवंध संपादक-चंदशेखर बघेल उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन- जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

 

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