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छत्तीसगढ़ में हुआ 781 प्रकरणों का निराकरण
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छत्तीसगढ़
यूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत माह अक्टूबर 2006 तक
शिकायत/अपील
के 781 प्रकरणों का निराकरण किया गया है । इसमें शिकायत के 528 प्रकरण एवं अपील
के 253 प्रकरण शामिल हैं । आयोग द्वारा आवेदकों को निःशुल्क जानकारी प्रदान
करने के आदेश दिए गए हैं तथा इस हेतु समयावधि भी निर्धारित की गई । आयोग ने ऐसे
प्रकरणों में जिनमें अपूर्ण अथवा अधूरी जानकारी दी गई है, उन प्रकरणों में
संबंधित अधिकारियों को पूर्ण जानकारी देने के लिए निर्देशित किया है ।
आयोग को 07
नवंबर 2005 से 31 अक्टूबर 2006 तक शिकायतों के कुल 698 आवेदन प्राप्त हुए ।
जिनमें से 528 प्रकरणों का निराकरण किया गया है । शिकायतों के जिन प्रकरणों में
यह पाया गया कि जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई या अपूर्ण दी गई, ऐसे 05 प्रकरणों
में सूचना अधिकारियों पर अर्थदण्ड भी आरोपित किया गया । यह अर्थदण्ड 1500 रुपये
से लेकर 10,000 रुपये तक है । आयोग के द्वारा यह भी पाया गया कि आवेदकों को
जानकारी प्राप्त करने में समय एवं आर्थिक क्षति हुई है, इसको दृष्टिगत रखते हुए
शिकायत को 15 प्रकरणों में 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का मुआवजा विभागों
के द्वारा आवेदकों को दिए जाने का आदेश दिए गए । जिन प्रकरणों में मुआवजा देने
के आदेश दिए गए हैं, उनमें मुख्य रुप से वाणिज्यकर, संचालक लोक शिक्षण, उच्च
शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, कृषि विभाग, गृह निर्माण विभाग एवं विद्युत
मंडल शामिल है । ऐसे प्रकरण जिनमें जन सूचना अधिकारी के द्वारा अभिलेख शुल्क की
गणना ठीक से नहीं की गई, उनमें आयोग ने वसूल किए गए अधिक अभिलेख शुल्क वापिस
किये जाने के भी आदेश दिए हैं । जिन प्रकरणों में सूचना अधिकारियों के द्वारा
समयावधि में किसी कारणवश अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण जानकारी पूर्ण रुप से
नहीं दी गई उनमें निःशुल्क जानकारी दिए जाने के निर्देश संवंधित विभागीय सूचना
अधिकारी को दिए गए ।
आयोग के
समक्ष कुछ प्रकरण ऐसे भी सामने आये जिनमें कि सूचना अधिकारियों ने कार्यालय में
अभिलेख उपलब्ध न होना, गुम हो जाने के कारण जानकारी दिया जाना संभव नहीं होना
बतलाया । ऐसे प्रकरण में आयोग ने कड़ा रूख अपनाते हुए अभिलेख गुम हो जाने का
दायित्व निर्धारित करने तथा पुनः अभिलेख का पुनर्गठन करने एवं उनकी जानकारी
आवेदक को दिए जाने के आदेश पारित किए गए ।
आयोग को प्रथम
अपीलीय अधिकारियों के पश्चात द्वितीय अपील के रुप में प्राप्त 457 प्रकरणों में
से253 अपीलों का निराकरण किया गया है । अपीलीय प्रकरण में भी आयोग के द्वारा यह
पाया गया कि कुछ अधिकारी अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन समुचित रुप से नहीं कर
रहे हैं तथा विधिवत् आदेश पारित करने में त्रुटि कर रहे हैं । आयोग को प्राप्त
अपीलीय प्रकरणों में से 04 अपील प्रकरणों में आयोग के द्वारा अर्थदंड के आदेश
सूचना अधिकारियों के विरुद्ध पारित किए गए । इनमें गृह निर्माण मंडल, सरपंच
ग्राम पंचायत तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सम्मिलित है ।
आयोग
के द्वारा जिन अपीलीय प्रकरणों में पाया गया कि आवेदक को सूचना प्राप्त करने
में आर्थिक एवं मानसिक क्षति हुई है, ऐसे प्रकरणों में आवेदक को मुआवजा भी
संबंधित विभाग से उपलब्ध कराया गया । इस प्रकार के 26 प्रकरणों में 200 रुपये
से लेकर 1000 रुपये तक मुआवजा आवेदकों को दिलाया गया । इनमें गृह निर्माण मंडल,
नगर निगम, वन विभाग आदि प्रमुख हैं ।
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