।। अब आया
रेडियो का नया अवतार।।
नई दिल्ली । अगर सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो हमें जनजागृति अभियानों में शीघ्र
ही एक नई क्रांति देखने को मिल सकेगी। यह क्रांति रेडियो सेवा के नए अवतार
सामुदायिक रेडियो सेवा के रूप में देखने को मिलेगी जिसे केंद्र सरकार ने पिछले
दिनों अनुमति दे दी। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण संबंधी सूचनाएं और
जानकारी प्रसारित करने के लिए अब स्वयंसेवी संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और
शिक्षा संस्थानों को परम्परागत साधनों के भरोसे ही नहीं रहना पड़ेगा। अब उनके
साथ में होगा रेडियो जैसा सशक्त माध्यम। हालांकि कैबिनेट ने सामुदायिक रेडियो
सेवा की मंजूरी देते हुए यह भी साफ कर दिया कि इन रेडियो स्टशनों को समाचार और
समसायिक मुद्दों पर कार्यक्रम प्रसारित करने की छूट नहीं होगी। ये रेडियो
स्टेशन लाभ रहित आधार पर चलाए जाएंगे।
इन्हें होगी अनुमति
: नागरिक सोसाइटियों, स्वयंसेवी संगठनों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान
केंद्रों, पंजीकृत सोसाइटियों, स्वायत्तशासी निकायों, सोसायटी एक्ट के तहत
पंजीकृत पब्लिक ट्रस्टों को सामुदायिक (कम्युनिटी) रेडियो स्टेशन शुरू करने के
लिए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे।
यह योग्य जरूरी :
उपयुक्त संगठनों को कम से कम तीन साल पुराना होना जरूरी है। साथ ही उनमें
मालिकाना एवं प्रबंधन ढांचा होना भी अनिवार्य है।
किस तरह के कार्यक्रम : शैक्षणिक, विकासपरक, सामाजिक और सांस्कृतिक
संबंधी कार्यक्रमों का ही प्रसारण किया जा सकता है। इनका मुख्य ध्येय समाज में
जागरूकता फैलाना होना चाहिए।
ये नहीं पात्र : व्यक्तिगत तौर पर कोई भी सामुदायिक रेडियो स्टेशन
खोलने का पात्र नहीं होगा। साथ ही राजनीतिक दल व उनसे जुड़े संगठन, ट्रेड
यूनियंस और राज्य या केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधइत संगठनों को लाइसेंस नहीं
दिए जाएंगे।
कौन देगा लाइसेंस : एक अंतरमंत्रालयीन समिति अंतिम मोहर लगाएगी। इस
समिति में गृह, रक्षा,सूचना एवं प्रसारण, संचार, पंचायती राज और ग्रामीण विकास
मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे।
क्या है सामुदायिक रेडियो सेवा : सामुदायिक रेडियो सेवा एक इलाके
विशेष के लोगों का ध्यान रखकर शुरू की जाती है। यह विश्व के कई देशों में
प्रचलन में है। हर देश में इसके अलग मायने हैं। कहीं इनका इस्तेमाल क्षेत्र
विशेष के समाचारों के प्रसारण में होता है, तो कहीं गीत-संगीत के लिए। भारत में
केवल जनजागृति अभियान के तौर पर इनकी अनुमित दी गई है।
अन्ना एफएम पहला स्टेशन : देश में इसके पहले विश्वविद्यालयों को
सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की अनुमति थी। तलिलनाडु की अन्ना युनियर्सिटी को देश
का पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन अन्ना एफएम शुरू करने का श्रेय जाता है। इसे
2004 में शूरू किया गया था।
(दैनिक भास्कर से साभार)
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