ये लड़कियां
जया जादवानी
फोन की घण्टी बजती है, फोन उठाया जाता है-
कौन है बे
?
यह मोंटी है।
क्या कर रहा साले
?
सौरभ
कुछ नहीं, बोल।
भारत माता में फेट है, चल चलते हैं।
कितने बजे
?
आठ बजे चलें
?
नहीं बे, आठ बजे के बाद तो लड़कियां चलीं जाती हैं।
कुछ दस बजे तक भी घूमती रहती हैं।
वो नहीं चाहिए । जो जल्दी घर जाती हैं, वो चाहिए।
जिनके साथ उनके भाई होते हैं, वो चाहिए
?
नहीं बे, मार खाने का शौक नहीं है। अच्छा जल्दी आ, मेथी
भी आ रहा है।
मेथी
?
चल आज उसके लिए सेट करते हैं।
अपने लिये नहीं
?
अबे हम वो नहीं, जो ढूंढते हैं। हम वो हैं, जिन्हें
जमाना ढूढता है।
अच्छा-बंडल मत मार। जल्दी आ। मोंटी फटाफट पंद्रह मिनट
में तैयार हो जाता है।
ममा, मैं फेट में जा रहा हूं, थोड़ी देर में आ जाऊंगा,
टेंशन मत लेना।
क्यों
?
अपने पुराने स्कूल को देखने या यादें ताजा करने
?
यादें ताजा करने मॉम, देखूं तो सही, मेरे जाने के बाद
क्या-क्या चेंजेस आए हैं।
उसके लिए तो किसी भी वक्त जाया जा सकता है, आज ही क्यों
?
ओ मॉ.... आज में क्या है
?
जो आज होता है न, कल नहीं होता।
तेरे पेपर चल रहें हैं, आज ही पढ़ने के लिए है, कल नहीं
?
मना कर दे।
कोई नहीं मानेगा मॉम, देखना घर आ जायेंगे सब। आपकी जान
खा जायेंगे तो आपको भी हां करनी पड़ेगी ।
अच्छा जा, जल्दी आना, खाना घर आकर खाना, खाने के लिए
नहीं तो दो घंटे और लेगा...।
मैं फोन कर दूंगा । मोंटी ने गाड़ी स्टार्ट की और सीधा
‘भारत
माता’
की और भागा ।
गेट पर ही पहचाने चेहरे मिल गये ... ।
जो कभी बच्चे थे, अब बड़े, अब बड़े हो गये हैं....।
हलो सर
¡
हॉय ।
बड़े स्मार्ट लग रहे हैं सर । क्यूं बे, खूब लड़कियां
पटा रहा है ।
कहां सर
?
लड़कियां अभी भी आपको याद करती हैं, कहती है.... मोंटी सर दुर्ग क्या चले गये,
सब सूना हो गया ।
स्कूल की तो रौनक ही आप थे सर ।
चल बे टेलर मत दे ।
मां कसम सर आपको देखने के बाद लड़कियां तो हमको भाव ही
नहीं देती।
छोड़ बे, बता कितनी पटायी
?
सर ऐसे ही...आपके लायक नहीं है।
छोड़ फिर ....। मोंटी अंदर चला गया।
अंदर घुसते ही रवि, सौरभ, मिथिल, आकाश, अनिल, सनी सभी से
घिर गया...
मां कसम, बड़ा बन-ठन के आया है।
अबे तो फेट में नंगा आ जाऊं।
उसमें भी जंचेगा।
चारों तरफ ठहाके गुंज उठे खीते-पीते, आने-जाने लोगों का
केंद्र बन गये वे..। चारों तरफ आने-पीने की चीजों से सजे स्टाल...अपने स्टालों
के पीछे-खड़े चुस्त-दुरुस्त लड़के..।
अबे मोंटी, एक ही लड़की बची है यार, सब चली गयीं, सेट कर
दे ना मेरे लिए। यह मेथी हैं।
तू बात करेगा न।
नहीं बे, मैं क्या करूंगा, तू कर लेना।
साले सेट तेरे को करनी है, बात मैं करूं।
मैं बाद में करूंगा।
अच्छा चल...। कोई मेरे पीछे नहीं आयेगा। तुम सब सालों
तब तक खाओ-पीओ..। चल मेथी....।
दोनों एक लड़की का पीछा करते हैं। लड़की थोड़ी ही देर
में समझ जाती है। उन्हें घूरना शुरू कर देती है। वे भी घूरते हैं। एक स्टाल से
दूसरे स्टाल वे उसके पीछे-पीछे घूमते हैं। घूमते-घूमते सामने आ जाते हैं.....
एक्सक्यूज मी, मुझे आपसे फ्रेंडशिप करनी है।
क्यूं।
क्यूं कि आप स्मार्ट दिखती हैं।
किसे करनी है आपको या आपके दोस्त को।
मेरे दोस्त को...।
अगर मैं मना कर दूं तो
?
हम चले जायेंगे।
लड़की सोचने की मुद्रा में है। तभी मोंटी के फोन की घंटी
बजती है....
अबे क्या कर रहा है वहां, बाहर आ, हम जा रहे हैं।
मोंटी के मुंह से गाली निकलते-निकलते बची.....
थोड़ी देर रूक जा।
नहीं एक मिनट में आ, हम जा रहे हैं। सौरभ था ।
वे दोनों पटने के कगार पर खड़ी लड़की को वहीं छोड़ बाहर
की ओर भागते हैं।....
सौरभ अपनी बाइक के पास खड़ा था....
क्या नाटक है वे
?
बस पटने ही वाली थी कि तूने फोन कर दिया। मोंटी बिगड़ा
अबे वो तुम लोगों के लायक नहीं है।
अबे तो मिथिल को कौन सा शादी करनी है, बात ही तो करनी
थी।
सौरभ ने मिथिल का उतरा मुंह और उखड़ा मूड देखा...
अबे मेथी के लिए मेरे पास बहुत है। वो साली ठीक नहीं लग
रही थी।
मां कसम। मेथी चहका
मां कसम।
आज इसके लिए सेट कर देते हैं यार, बहुत दिनों से कह रहा
है।
चल खाना खाने चलते हैं, वहीं सेट कर देंगे।
‘टेम्पटेशन’
में वे एक बडी सी टेबल घेर कर बैठ जाते हैं....
मुझे नहीं चाहिए वे। तुम लोग अपनी फिक्र करो।
अबे सनी को लड़कियां अच्छी नहीं लगती, इसको लड़के अच्छे
लगते हैं...वो देख...खिड़की के पास वाली टेबल पर एक स्मार्ट लड़का बैठा
है...बुलाऊं।
बस..हो गया न...सुलग गई मेरी, धुआं निल रहा है। अब मेथी
की फिकर कर....।
सौरभ अपने मोबाईल से एक सुंदर लड़की का मोबाईल नंबर ढूंढ
कर देता है...बताया की ये रायपुर में रहती है...फोन मिलाया जाता है।
- माइक आन...
नुपूर बोल रही है।
हां...।
हॉय मैं सोनू बोल रहा हूं।
तो
?
पहचाना।
नहीं ।
हम मिले थे।
नहीं पहचाना
ओ-असल में तुम मुझे नहीं पहचान पाओगी, पर मैं तुम्हें
जानता हूं।
तो
?
ऑय बाट टु डू फ्रेंडशिप विथ यू।
वट ऑय डोंट वांट.....।
व्हाय, एनी रीजन
?
तुम एक रीजन बताओ कि तुम्हें क्यूं करनी है।
ऑई हैव सीन यू,यू आर गुड लुकिंग..। मुझे लगा तुम
फ्रेंडशिप के लायक हो।
कहां देखा
?
सदर बाजार में...।
कौन सा
?
रायपुर या बिलासपुर
?
मेरे ख्याल में मैंने तुम्हें दोनों जगह देखा है । बड़ी
मुश्किलों से तुम्हारा नंबर मिला है।
मुझे नहीं करनी ।
इतनी शराफत से कह रहा हूं, फिर भी नहीं करनी......।
कैसी शराफत
?
सीधा-सीधा कह रहे हो मुझे फ्रेंडशिप करनी है।
ऑय थिंक, दिस इज द राइट वे टु डू फ्रेंडशिप विथ यू। अगर
मैं गाड़ी रोककर रास्ते में बोलूं या पैरेन्ट्स के सामने बोलूं तो क्या वो सही
होगा ?
मादर.....। फोन रख साले। सौरफ गुस्से में आकर फोन पर
चिल्लाया........
भाड़ में जा साली।
मोंटी ने घबराकर फोन काट दिया.....
क्या नाटक है बे
?
बढ़िया सेट हो रही थी।
कहां बे
?
साली भाव खा रही है।
अबे इतना भी नहीं खायेगी तो लड़की काहे की
?
पहली बार में बोल देगी कि हां, करनी है
?
छोड़ बे, बहुत मिल जायेगीं और.....।
मेथी, या तो मेरी किस्मत खराब है या हमें लड़कियां पटाना
नहीं आता। मोंटी ने मिथिल की तरफ देखकर कहा....
एक हमारा मनु है साला । घरवालों के साथ ब्यास गया सत्संग
सुनने...लड़की पटा के ले आया। पटाया भी ऐसी कि शादी कर ली। उससे पूछ
जरा...ब्यास जाने का सही सीजन कौन सा है।
कुछ भी कहो यार लड़की अच्छी पा गया साला। मेथी हसरत से
बोला-हमारे सामने कोई उसकी बात नहीं करता ।
फटती होगी ना बे, दोस्तों पर भरोसा नहीं आता होगा।
हर हफ्ते कहता है, बिजनेस बदल देगा। हर महीने कार बदल
देता है - बातें बड़ी-बड़ी । पार्टी में खाली जेब लेकर आता है, पूछो तो कहेगा,
सब बीबी को दे दिया-साला, पत्निव्रता।
सौरभ मुंह बनाकर बोला। वह अभी भी मोबाइल पर किसी लड़की
का नंबर ढूंढ रहा है.......।
देखो यारों, लड़की और सब्जी अगर ताजी लेनी हो तो एकदम
सुबह मिलती है..दोपहर तक तो मुरझा जाती है और अगर शाम हो गयी तो छंटी हुई
मिलेगा....जो दिन भर के नहीं बिक पाती। मोंटी बोला।
इसका मतलब बाल विवाह करना पडे़गा...स्कूल से निकलो शादी
कर लो। तुम अगर बी.ई., एमबीए और डॉक्टरी के चक्कर में पड़े तो बेटा दोपहर हो
जाएगी....फिर अपनी पसंद का माल नहीं मिलता। फिर जो मिल जाये, उसी से काम चलाना
पड़ता है।
छोड़ वे साले, टेलर मत दे। मनु को देखा है, कैसे डरता है
अपने ससुराल वालों से। ससुर को देखता है तो फट के हाथ में आ जाती है - जैसे कि
आकर छीन लेगा अपनी बेटी।
अबे, एक बात बताऊं गांव वालों को हमेशा शहरी लोगों से डर
लगता रहता है। -जैसे किसी शहर में नहीं चांद पर रहते हों जहां सिर्फ वहीं पहुंच
सकते हैं।
मैंने देखा है बे, बीबीयों के सामने अच्छे-अच्छों की फटी
पड़ी रहती है।
अच्छा छोड़, अब क्या कर रहा है
?
मोंटी ने पूछा। कुछ नहीं बे, अगले हफ्ते फाइनल इग्जाम्स है। अभी तक यह नहीं
पता, कोर्स में क्या है
?
सौरभ
पंद्रह हजार दे आया उसे
?
हां बे, इसमें तो देर ही नहीं करता।
तो डरता क्यों है, पूरा पेपर दे देगा तेरे को दो दिन
पहले।
अबे पहले तो मैं माता का दिल रखने के लिए पढ़ता था, फिर
अब मुझे अच्छा लगने लगा है। कम से कम पता तो है कि आगे क्या करना
–
क्या नहीं करना...ये साली लड़कियों के चक्कर में चारों तरफ अंधेरा ही दिखता है।
और तुझे लगता है कि तु इनके चक्कर में कभी नहीं पडे़गा।
अभी तक तो यही लगता है।
चल-चल साले । ये बातें अपनी माओं के सामने कहने में
अच्छी लगती हैं, दोस्तों के सामने नहीं । साला, उल्लू दा पट्ठा। तेरे जैसी शक्ल
ऊपर वाले ने हमें दी होती तो पता नहीं क्या करते यारों ...। साला मैं तो
मॉडलिंग के लिए निकल जाता...चारों तरफ लड़कियां ही लड़कियां.. हाय..। सौरभ आह
भरते हुए वहीं टेबिल पर ढेर हो गया ।
शाम को सौरभ का फोन आता है मोंटी के पास-
अब, एक लड़की से दोस्ती हो गयी।
कहां से पाया
?
नंबर दिया था विक्की ने।
कैसी है
?
अबे, यही तो दिक्कत है, अभी तक देखा नहीं पाया हूं।
अब क्या करेगा
?
वोई तो यार। ऐसी-वैसी निकल गयी तो बेकार में पैसे खर्च
करने का क्या फायदा
?
यहीं की है न
?
हां।
कल देख लो।
हॉ, अच्छा रखता हूं। हग्गू आ रही है।
मेरे को भी आ रही है।
------------00-------------
मोंटी ने रवि के सेल से दिवा का नंबर उड़ाया ,मिलाया-
हॉय, मोंटी बोल रहा हूं।
बोलो
मुझसे फ्रेंडशिप करोगी
?
ऐसा क्या है तुममें
?
नहीं देखा है तभी ऐसा कह रही हो, देखोगी तो मानोगी।
तुमने मुझे देखा है
?
हां, देखा है। तभी फोन कर रहा हूं।
तो क्या ख्याल है।
अच्छी हो, गुडलुकिंग हो।
पढ़ते हो
?
बी.ई. कर रहा हूं। थर्ड ईयर है।
मेरे घर वालों को यह सब पसंद नहीं।
क्या, पसंद नहीं
?
यही लड़कों से दोस्ती करना।
किसी के घरवाले पसंद नहीं करते पर लड़कियां दोस्ती करती
तो हैं।
ठीक है, फिर रखता हूं।
नहीं, मुझे मंजूर है।
दैट्स लाईक ए गुड गर्ल।
मैं तुम्हें देखूंगी कैसी
?
तुम अपने घर के बाहर निकलकर फोन करो, मैं आता हूं
तु्म्हारी पहचान
?
रेड टी शर्ट, रेड बाईक।
मैं अपने छत पर खड़ी रहूंगी उसने पूरा पता बताया ।
ओ. के. । आई एम कमिंग।
तैयार होकर बाहर निकलने ही वाला था कि सौरभ और मिथिल आ
गये-
अबे एक लड़की को सेट कर लिया है।
कहां रहती है
?
यहीं । ये ले पता।
अबे, ये तो वही है, जिसने मुझे बुलाया है ।
अच्छा तुमको भी बुलाया है । हम दोनों को भी बुलाया है
।
अभी ।
नहीं, बुलाया तो शाम को था । हमने सोचा झड़ी लगा के आते
हैं ।
चल मैं अपनी बाइक नहीं उठाता ।
तीनों एक साथ, एक बाइक पर । मोंटी ब्लैक शर्ट में ।
लड़की के घर तक । लड़की छत पर है तीनों मुड़ते देख लेते हैं । लड़की उन्हीं को
देख रही है । मोंटी को पसंद नहीं आती ।
अबे, मुझे पसंद नहीं है । तुम लोग रख लो ।
पक्का ।
पक्का ।
घर आते ही लड़की का फोन ।
आप आये नहीं ।
हां में निकल नहीं पाया, पढ़ रहा हूं ।
तो कब आयेंगे
?
पेपर खत्म होने के बाद ।
------------00----------
कालेज में-
हेलो सर । मोंटी के पास उसके जूनियर का फोन ।
बोल बे ।
बड़ा जबरदस्त माल है सर, दीप्ति शर्मा ।
देखा नहीं हूं ।
देख लीजिए सर ।
आपके लायक है ।
तू कैसे जानता है
?
हमारे ग्रुप का एक लड़का है, शान्तनु । घुमा रहा था
।
पट गयी है तो नहीं पटाउंगा ।
सर, आपको देख लेगी, तो उसे छोड़ देगी ।
वैसे है कौन
?
जूनियर है आपसे, कालेज में डांस किया था, मेरी सेल में
उसकी फोटो हैं ।
फोटो भेज ।
अभी भेजता हूं सर ।
तेरी नजर तो नहीं है ।
मां कसम सर । मुझे तो वो घास भी नहीं डालेगी ।
चल देखते हैं फिर..... ।
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हलो । दीप्ति ने अपना सेल उठाया ।
हॉय ।
कौन
?
मोंटी ।
मोंटी हूं ।
मोंटी सायनी ।
फ्राम बिलासपुर
?
या..... डू यू नो मी
?
तुम्हें कौन नहीं जानता
?
लड़कियां अक्सर तुम्हारी बातें करती हैं ।
ओ....मुझे पता नहीं था ।
न पता हो, यही अच्छा है ।
ओ.के. । मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूं
।
मैं भी.........
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बिना देखे दो
महीने बात चलती है - एस.एम.एस...एसएस.एम.एस....। मिलना तय हुआ संडे शाम को।
संडे को मोंटी का प्रेक्टिकल, वायवा के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा में आकर
खड़ा था। दो लड़कियां उसके आसपास चक्कर काट रहीं थीं । फ्रेंड ने टोका-
ए देख, तेरे
को देख रही है।
कौन है
?
दीप्ति
शर्मा...अपने फ्रेंड के साथ।
ये है।
और क्या वे
?
पटा ले।
पटाने लायक तो
माल ही नहीं है बे, अब तो पीछा छुड़ाना पडे़गा।
क्या बे। ठीक
तो है। हमारे कालेज में तो सबसे अच्छी है।
मुझे नहीं
चाहिये।
यहां ऐसा ही
माल मिलेगा
।
तू रख ले।
बात करवा दे
ना।
करवा दूंगा।
तेरी तारीफ भी कर दूंगा।
चुप कर आ रही
है।
दीप्ति शर्मा
पास आती है-
हॉय। दीप्ति
शर्मा मोंटी। आज बायवा है ?
हां।
बेस्ट ऑफ लक।
थैंक्स ।
आज शाम हम
घूमने जा रहे हैं।