Media Vimarsh

मीडिया विमर्श जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका  

(वर्ष 1, अंक-2,दिसंबर 06-फरवरी 07)

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 इस अंक के आकर्षण

 

संपादकीयःघूस देने वाले को भी दीजिए घूंसा - भूमिका द्विवेदी

 

आवरण कथा....

कैसी सूचना कैसा अधिकारः कुछ मंतव्य

कर्त्तव्य प्रधान व्यवस्था की जरूरत - राजनाथ सिंह 'सूर्य'

सूचना का अधिकार - अखिलेश अखिल

कानून से क्रांति असंभव - रघु ठाकुर

उठते हैं अनेक सवाल - बसंत कुमार तिवारी

सूचना का अधिकारः भ्रष्टाचार पर प्रहार - राकेश शर्मा निशीथ

जागरूक नागरिक तैयार करने की जरूरत - अशोक चतुर्वेदी

समय तय करेगा सार्थकता - डॉ. सालिकराम अग्रवाल

भारतीय संविधान और सूचना का अधिकार - डॉ. श्रीकांत सिंह

जागरूकता से मिलेगी सार्थकता - डॉ. पवित्र श्रीवास्तव

आम आदमी के हाथ में कानूनी हथियार - रमेश वर्ल्यानी

पहल पारदर्शिता की - नरेंद्र दत्तात्रय तेलंग

जानें, क्या है सूचना का अधिकार - अभय प्रधान

सूचना कानून के सरोकार - शताब्दी सुबोध पांडेय

जानने का हकः बाधक कौन - ए.जी.नूरानी

सूचनाधिकार की फिसलन और शिखर का स्वप्न - रमेश नैयर

सूचनाधिकार से समृद्ध हुई पत्रकारिता - विष्णु राजगढ़िया

छत्तीसगढ में सूचना का अधिकार - एस.पी.त्रिवेदी

आजादी की दूसरी लड़ाई - यशवंत गोहिल

कितना सूचना, कितना अधिकार - कृष्णचंद्र मौलि

सूचना युग से सामंजस्य की चुनौती - डॉ. सुशील त्रिवेदी

 

बातचीत....

लोग मांगते हैं एक-एक पिन का हिसाब- ए.के. विजयवर्गीय

(छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त से राजकुमार सोनी की बातचीत)

 

 परदेश....       

ब्रिटिश पत्रकारिता पर एक नजर -गिरीश पंकज

 

 

मेरा समय....

जिंदगी के कैनवास पर उभरते हैं कई चित्र - बबन प्रसाद मिश्र

 

 

जनसंचार....

सूचना युग से सामंजस्य की चुनौती - डॉ. सुशील त्रिवेदी

 

 

संस्कृत पत्रकारिता....

सामाजिक सरोकारों से है जीवंत रिश्ता - आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा

 

 

पुस्तक समीक्षा....

मीडियाकर्मियों के लिए एक जरूरी किताब - विजयदत्त श्रीधर

विसर्जन ने दी सृजन की प्रेरणा - अंजनी कुमार झा

समय को जानने की कोशिश - अनिल पुरोहित

समकालीन संदर्भों की पड़ताल - श्रीकांत सिंह

 

दस्तावेज....            

पत्रकार-संघर्ष और संभावनाएं -  माखनलाल चतुर्वेदी

 

 

समाचार....

 

वागीश्वरी अलंकरण समारोह-2006

उमा खुराना के स्टिंग आपरेशन के पीछे का सच

सूचना क्रांति का लाभ कितनों को

पुरुषोत्तम दास मोदी नहीं रहे

वर्ल्ड न्यूजपेपर कांग्रेस की मेजबानी भारत करेगा

 

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मिडिया विमर्श - संजय द्विवेदी

मूल्य

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वार्षिक शुल्क-100 रुपए

आजीवन शुल्क- 1000 रुपए

आजीवन शुल्क(संस्थागत)- 2000

 


संपर्कः संपादक, मीडिया विमर्श, ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी.    रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत,  दूरभाष- 0771-2444107,मोबाइल-98935-98888


 

साहित्य...

जया जादवानी की कहानी - ये लड़कियां

तीन कविताएं - रघुवीर सहाय

पत्रकार की अभिलाषा - रोमेश जोशी

 

विशेष टिप्पणी....

एकआग का दरिया और डूब के जाना है - विभु कुमार

 

व्याख्यान....-

किताबें मर भी रही हैं और सज भी रही हैं - ज्ञानरंजन

 

प्रतिवाद....

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोसने से क्या मिलेगा - कमल शर्मा

 

समाचार....

प्रिंट मीडिया की साख इलेक्ट्रॉनिक से ज्यादा

छत्तीसगढ़ में हुआ 781 प्रकरणों का निराकरण

 

दस्तावेज...

स्वाधीनता के असाधरण विंब हैं दद्दा - डॉ.विजयबहादुर सिंह

आज इस पर क्यों नहीं सोचा जाना चाहिए कि माखनलाल जी देश की जिस भट्ठी में तप रहे थे, वह सत्ता-राजनीति की थी या फिर वहीं जिसका संबंध न केवल गांधी बल्कि भगत सिंह आदि से भी था। माखनलाल जी पिस्तौल भी रखते थे। वे तिलक के अंगरक्षकों में थे पर इतने सच्चे और समर्पित किस्म के इंसान थे कि अपने देश वासियों के भावात्मक मोड़ों और वैचारिक बदलावों के प्रति अत्यन्त सचेत थे। उनके बाद हिन्दी में दूसरे कोई उस तरह के कवि दिखते हैं तो पहले नागार्जुन और दूसरे भवानी प्रसाद मिश्र ।

 

    माखनलाल जी की तरह इन्हें भी जन-राजनीति और उसके आन्दोलनों से कभी कोई परहेज नहीं रहा । भवानी मिश्र तो सन 42 में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान साढ़े तीन बरस नागपुर जेल में रहे । नागार्जुन स्वामी सहजानंद द्वारा प्रवर्तित किसान आन्दोलन में इससे पहले जेल गये पर 1975 में जब इन्दिरा गांधी ने आपातकाल घोषित कर दिया तब भी यो दोनों बूढ़े कवि हिन्दी लेखकों और कवियों की लाज रखने को आगे आए । नागार्जुन तो 18 महीने फिर आजाद भारत की जेलों में रहे । भवानी मिश्र त्रिकाल संध्या करते आपात काल के खात्मे के अभियान में जुटे रहे ।

    तीसरा नाम जो इसी में होम हो गया, वह थे कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु। बाकी जिसने भी जाने-पहचनाने छद्म क्रांतिकारी और प्रगतिशील थे, सबके सब इंदिरा और उनके आपातकाल के समर्थन और वाहवाही में जुट गए ।  बाद में ये ही लोग प्रतिष्ठान द्वारा तरह-तरह से नवाजे गए।

 

मानद सलाहकार संपादक-विश्वनाथ सचदेव संपादक-डॉ. श्रीकांत सिंह संपादक मंडल- गोपा बागची, पवित्र श्रीवास्तव

प्रकाशक-भूमिका द्विवेदी उपसंपादक-हेमंत पाणिग्राही वेब नियोजन-संजय द्विवेदी, जयप्रकाश मानस

 संपर्क- ए-2, अनमोल फ्लैट्स, अवंति विहार कॉलोनी. रायपुर, छत्तीसगढ़, दूरभाष-0771-2444107, ई-मेल- mediavimarshindia@yahoo.com

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मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता को विकसित करने के लिए प्रकाशित अव्यावसायिक त्रैमासिक पत्रिक 'मीडिया-विमर्श' में

प्रकाशित रचनाओं में अभिव्यक्त विचारों से संपादकीय या प्रकाशकीय सहमति अनिवार्य नहीं है

वेब-क्रियेशन- कामिनी इन्फार्मेटिक्स के लिए प्रशांत रथ

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