पंद्रह
साल में कहाँ पहुंच गया इंटरनेट
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विनीता वशिष्ठ
अगस्त
महीने में बिना किसी शोर-शराबे के सूचना तकनीक जगत के दिग्गजों ने इंटरनेट का
15वां जन्मदिन मनाया । 6 अगस्त, 1991 को टिम बर्नर ली ने जब वेब साफ्टवेयर को
ईजाद किया, तो किसी को अंदाजा भी नहीं था कि महज
‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू’
से दुनिया ‘ए
टू जेड’
तक पहूंच जाएगी । आज टिकट बुकिंग से लेकर शादी तक के लिए इंटरनेट खंगाला जा रहा
है । चिट्ठी-पत्री (ईमेल), बतकही (चैटिंग), शापिंग, पढ़ाई-लिखाई, खोज-खबरस
मुकदमें, नीलामी से लेकर शिकायतें तक आनलाईन हो गई हैं । सुई से लेकर जहाज तक
इंटरनेट के संसार में उपलब्ध हैं ।
आज इंटरनेट
अपने आप में पूरी दुनिया को समेटे हुए है ।बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय का पर्याय
बन चुका है इंटरनेट, जिसे तकनीकी भाषा में वर्ल्ड वाइड वेब कह सकते हैं । एक
क्लिक करते ही अकूत जानकारियां स्क्रीन पर झिलमिलाने लगती हैं । ग्लोबल हो रहे
भारत में भी इंटरनेट ने समय के साथ-साथ अपने पांव जमाए हैं । इंटरनेट की
लोकप्रियता की बात करें, तो भारत इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले देशों की सूची
में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। नंबर एक पर अमेरिका और दो पर चीन है। वर्ष
2005 में भारत में पांच करोड़ साठ लाख इंटरनेट उपभोक्ता थे। पिछले साल नवंबर
में इसमें 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। बीते पांच वर्षों में भारत में
इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या भले ही ज्यादा नहीं बढ़ी, लेकिन उनके सर्फिग के
समय में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। यानी नए उपभोक्ता कम बने हैं और मौजूदा
उपभोक्ताओं के इंटरनेट उपभोग की सीमा पढ़ी है।
आंकड़े कहते
हैं कि 1.75 करोड़ शहरी आबादी नियमित तौर पर नेट का उपयोग करती हैं, जबकि 52
लाख शहरी किफायती से इसका उपयोग करते हैं। मसलन, दिन में एक घंटा या दो घंटे ।
जहां तक लगातार नेट से जुड़े रहने की बात है, तो भारत में 75 लाख लोग अधिकतर
आनलाईन रहते हैं। ऐसे लोगों की संख्या खासी है, जो दिन में चार से पांच घंटे के
लिए नेट इस्तेमाल करते हैं। खास बात यह है, कि ऐसे लोगों में हर तीसरा व्यक्ति
लगभग पूरे दिन नेट से जुड़ा रहता है। ऐसे लोगों में कार्यालयों में काम करने
वाले लोग शामिल हैं। रोचक तथ्य यह है कि नेट इस्तेमाल करने वाले हर तीसरे
व्यक्ति के पास या तो अपना वाहन है या क्रेडिट कार्ड है। भारत में इंटरनेट
कलेक्शन लेने वालों की संख्या 80 लाख के आसपास है। इंटरनेट के बाजार से फायदा
उठाने में भारत पिछले कुछ साल तक अन्य देशों की तुलना में कुछ कम ही सफल हो
पाया था, क्योंकि 1998 में आया नेट क्रांति का बुलबुला वर्ष 2000 में फुस्स
साबित हो गया। भारतीय नेट दिग्गज इंटरनेट से पैसा कमाने के गुर तब तक समझ नहीं
पाये थे । लेकिन 2005 में नेट बाजार ने फिर जोर मारा और आज नेट विज्ञापन का
बाजार जोरों से चल रहा है । इंटरनेट का दौर महज पांच साल पुराना है । इन पांच
वर्षों में ही इसने 50 साल पुराने रेडियो विज्ञापन के दौर को खत्म कर दिया। नेट
विज्ञापन की अगली नजर 50 अरब डालर के टीवी विज्ञापन के साम्राज्य पर है । आजकल
वेबसाइट पर शादी से लेकर बैकों के विज्ञापन तक भारी कमाई कर रहे हैं । होटल
रिसॉर्ट, मनी ट्रांजैक्शन, शापिंग आदि के लिए नेट विज्ञापन बेहद कारगर साबित हो
रहे हैं । फिलहाल भारत में विज्ञापन के तौर-तरीकों में बदलाव को देखते हुए
जल्दी ही इसके 10 फीसदी तक हो जाने की उम्मीद है ।
हालांकि साठ
के दशक में सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए इंटरनेट की खोज हो गई थी,
लेकिन व्यवसायिक उपयोग वर्ष 1991 में जाकर ही शुरु हुआ । 1991 में वेब सर्वर
बनाया गया, जिससे वेबसाइट का निर्माण संभव हुआ । लीका वेब
‘वर्ल्ड-वाइड’
बन तो गया, पर उससे दुनिया देखने के लिए एक खिड़की ( विंडोज ) की जरुरत थी, जो
1993 में खुली । शीघ्र ही मोएजिक वेब ब्राउजर आया और दुनिया वेब फ्रेंडली हो गई
। नब्बे का पूर्वार्द्ध वेब के विस्तार का चरण था, तो उतत्रार्द्ध वेब सेवाओं
का सर्च इंजन और इ-मेल सूचना जगत में ऐसी क्रांति है, जिसने संचार और सूचना के
तमाम पारंपरिक तरीकों को हिलाकर रख दिया । 1994 में सर्च इंजन का जमाना आया और
दुनिया ‘गूगल
शरणम् गच्छामि’
हो गई । विद्यार्थी और शोधार्थी समुदाय के लिए अमेजन डाट काम किसी अनुभवी
प्रोफेसर से कम नहीं । इसे सुखद संयोग ही कहा जाएगा कि ई-मेल से दुनिया को
रुबरु कराने वाला शख्स एक भारतीय है । 1996 में भारत के सबीर भाटिया ने जैक
स्मिथ के साथ मिलकर पहली वेब बेस्ट ई-मेल
‘हॉटमेल’
बनाई । आज हॉटमेल दुनिया की सबसे बड़ी ई-मेल प्रोवाईडर कंपनी है और इसकी ग्राहक
संख्या छह करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है । बहरहाल, नेट का सफर जारी है और
सर्फिंग भी। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 1 अगस्त, 2006 को दुनिया में 9,26,15,392
वेबसाइट चल रही थीं । आज भारत के आईटी प्रोफेशनल्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर
पहचान बना रहे हैं । गली-मुहल्लों में खुल चुके साइबर कैफे और कार्यालयों में
इंटरनेट की मौजूदगी बता रही है कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला ।
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