जून 2010

मिक्स मसाला खबरों के दौर में न्यूज चैनल

भरोसा नहीं होता कि खबरें इतनी बदल जाएंगीं। समाचार चैनलों पर खबरों को देखना अब मिक्स मसाले जैसे मामला है। खबरिया चैनलों की होड़ और गलाकाट स्पर्धा ने खबरों के मायने बदल दिए हैं। खबरें अब सिर्फ सूचनाएं नहीं देती, वे एक्सक्लूसिव में बदल रही हैं।
                                                                                                                                                 -संजय द्विवेदी आगे पढ़िये...

प्रसंगवश, (131) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 जून 2010
संजय द्विवेदी

कायर नक्सली और बहादुर सरकारें

- संजय द्विवेदी
सुरक्षा
बलों और आम आदिवासी जनों का जिस तरह नक्सली सामूहिक नरसंहार कर रहे हैं यह सबसे बड़ी त्रासदी है। बावजूद इसके सरकारों का भ्रम कायम है। लोकतंत्र के सामने चुनौती बनकर खड़े नक्सलवाद के खिलाफ भी हमारी राजनीति का भ्रम अचरज में डालता है। क्या कारण है कि हमारी राजनीति इतने खूनी उदाहरणों के बावजूद लोकतंत्र के विरोधियों को अपने बच्चे कहने का साहस पा लेती है।
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प्रसंगवश, (94) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 जून 2010
संजय द्विवेदी

नहीं संभले तो यह कालिख हमें ले डूबेगी

सच मानिए यह कालिख हमें ले डूबेगी। पेड न्यूज की खबरों ने जितना और जैसा नुकसान मीडिया को पहुंचाया है, उतना नुकसान तो आपातकाल में घुटने टेकने पर भी नहीं हुआ था। चुनावी कवरेज के नाम पर यह एक ऐसी लूट थी जिसमें हम सब शामिल थे। इस लूट ने हमारे सिर शर्म से झुका दिए थे। आगे पढ़िये...

प्रसंगवश, (89) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 जून 2010
संजय द्विवेदी

नक्सली हिंसा, हिंसा न भवति

नक्सली हिंसा, हिंसा न भवति

पहला लक्ष्य था वह प्रचार जो गुनहगारों के पक्ष में वातावरण बनाता है, दूसरा लक्ष्य खुद को चर्चा में लाना और तीसरा लक्ष्य एक भ्रम का निर्माण।
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प्रसंगवश, (91) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 जून 2010
Sanjay Dwivedi

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आवरण कथा, (177) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 जून 2010
Sanjay Dwivedi

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अंतरजाल, (296) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 जून 2010
Sanjay Dwivedi

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