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कम संसाधन और कम बजट के बावजूद भारत आज अंतरिक्ष में कीर्तिमान स्थापित करने में लगा हुआ है। वर्ष 2011 में अब तक भारत छह उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ चुका है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (113 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011,
शशांक द्विवेदी

भ्रष्टाचार के गरमागरम मुद्दे के साथ चुनाव सुधारों का मुद्दा भी अब धीरे-धीरे गरम होने लगा है। कभी राइट टू रीकाल और कभी राइट टू रिजेक्ट की बात होती है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, विमर्श, (58 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 13 अक्टूबर 2011,
डा. घनश्‍याम वत्‍स

मध्य प्रदेश में बेटियों को बचाने के नाम पर सरकार द्वारा हर वर्ष करोड़ों रूपए स्वाहा किए जा रहे हैं लेकिन न तो बेटियां बच रही हैं और ना ही उनकी अस्मत। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, विमर्श, (94 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 12 अक्टूबर 2011,
विनोद उपाध्याय

क्रांतिकारी बदलाव का सूत्रपात कौन करता है, नेता या आंदोलन? यह सवाल कुछ वैसा ही है, जैसे कि यह पूछना कि पहले मुर्गी आई या अंडा? फिर भी महाभारत से उपग्रह संचारित मीडिया के जमाने तक यह यक्ष प्रश्न पूछा जाता ... पढ़िए
0 टिप्पणी, विमर्श, (36 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 12 अक्टूबर 2011,
मृणाल पाण्डे

रथ आवाम से नहीं जोड़ता, जनता से दूर ले जाता है। रथ सामंती प्रतीक है। हमारी परंपरा में रावण रथी है, और रघुवीर विरथ। फिर लालकृष्ण आडवाणी बिना घोड़ों के रथ पर सवार होने को क्यों आतुर हैं? ... पढ़िए
0 टिप्पणी, बातचीत, (132 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011,
हेमंत शर्मा

गजल सम्राट जगजीत सिंह ने सत्तर के दशक में संगीत की इस विधा में उस समय नई जान फूंकी जब इसकी चमक फीकी पड़ती जा रही थी। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (123 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 10 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

गुजरे दौर के लोकप्रिय अभिनेता शम्मी कपूर के बाद अब गजल सम्राट जगजीत सिंह के निधन से समूचा बॉलीवुड स्तब्ध है और इससे जुड़ी हस्तियां अपने इस पसंदीदा गायक को माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के जरिए श्रद्धाजंलि दे रही हैं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (113 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 10 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को वर्ष 2009 में शांति का नोबल पुरस्कार दिया जाना नोबेल पुरस्कारों के 110 के साल के इतिहास में सर्वाधिक विवादास्पद क्षण था। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (123 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 10 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

गजल गायिकी के सरताज जगजीत सिंह का सोमवार की सुबह निधन हो गया। उन्होंने हजारों ख्वाहिशें ऐसी, ये कागज की कश्ती और झुकी झुकी सी नजर जैसी गजलों को अपनी जादुई आवाज में जन जन तक पहुंचाया। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (119 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 10 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

क्या किसी ने सुना है कि बंधक को अपने अपहरण के दौरान आनंद आया हो, वह भी तब जबकि कुख्यात अपराधी वीरप्पन का गिरोह हो। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (119 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 8 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

विश्व की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के सदस्यों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और अब दुनिया का हरेक नौंवा व्यक्ति फेसबुक परिवार का सदस्य है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (88 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 8 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स के निधन पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वे बताती हैं कि दुनिया ने उनके जाने से क्या खो दिया है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (64 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 8 अक्टूबर 2011,
हरिवंश चतुर्वेदी

मैं दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटियों में से एक आपकी यूनिवर्सिटी में आकर आज खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूं। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की तीन कहानियां सुनाना चाहता हूं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (63 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 8 अक्टूबर 2011,
स्टीव जॉब्स

विचारक एवं चिंतक विनय सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि छोटी-छोटी अस्मिताओं का सम्मान करते हुए ही हम एक देश की एकात्मता को मजबूत कर सकते हैं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, (84 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011,
मीडिया विमर्श

आजकल अखबार और खबरिया चैनल खबरों के कम मनोरंजन के केन्द्र ज्यादा बने हुए हैं। राजनेताओं के साफ-सुथरे और पारदर्शी फूहड़पन को जितनी चुस्ती-फुर्ती से ये लोग जन-गण-मन तक पहुंचाते हैं उसका हरेक पाठक को तहेदिल से ही नहीं तहे दिमाग ... पढ़िए
0 टिप्पणी, समाचार, (105 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011,
पंडित सुरेश नीरव

उत्सव हमारी संस्कृति के प्रतीक है. यह हमारी आंतरिक खुशी, प्रसन्नता की अभिव्यक्ति का माध्यम है. ये उत्सव हमें एकजुटता का संदेश देते हैं. जब बात धर्म की होती है तो फिर धर्म हमें सामाजिक तौर पर सुसंस्कृत, शिक्षित, आदर्श आचरण ... पढ़िए
0 टिप्पणी, बातचीत, (98 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011,
गोविन्द बड़ोने

बीजेपी के एक नेता से बात हो रही थी। मैंने पूछा- अभी से आप लोग प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम क्यों नहीं घोषित कर देते? ... पढ़िए
0 टिप्पणी, समाचार, (78 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 3 अक्टूबर 2011,
आशुतोष

आज देश के सामने कई प्रकार की समस्यायें हैं जिनके साथ हम रोजाना जूझ भी रहे हैं व उनके साथ जी भी रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या कौन सी है इसको लेकर समाज में अलग-अलग प्रकार के लोगों के अलग-अलग ... पढ़िए
0 टिप्पणी, समाचार, (265 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 29 सितम्बर 2011,
सुनील कुमार बंसल

”पिट कर नहीं, पीट कर आओ, लोगों को घेर कर मारो” . यह ”महान” प्रेरक वाक्य किसी तानाशाह का नहीं, लोकशाही के एक प्रतिनिधि का है,. एक राज्य के गृह मंत्री का. जिस जनता के वोट से ये महोदय मंत्री बने, ... पढ़िए
0 टिप्पणी, बातचीत, (100 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 29 सितम्बर 2011,
गिरीश पंकज

पूंजीवादी नीतियों पर चलकर तो यही होना स्वाभाविक है!अगर कोई आदमी बीमार हो और उसे यही पता नहीं लगे कि उसको क्या रोग है तो वह अपना इलाज कैसे करा सकता है? ऐसा ही आलम हमारी सरकार काहै। वह आज तक ... पढ़िए
0 टिप्पणी, समाचार, (114 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 29 सितम्बर 2011,
इक़बाल हिंदुस्तानी

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